West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल में हिंसामुक्त और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के मिशन के तहत चुनाव आयोग (ECI) ने रविवार को राज्य प्रशासन पर बड़ा शिकंजा कसा है। आयोग ने एकबार फिर बड़े पैमाने पर फेरबदल करते हुए 184 पुलिस थाना प्रभारियों (IC) और 83 ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) समेत सहायक रिटर्निंग अधिकारियों (ARO) का तबादला कर दिया है।
मुख्य सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के बदलाव के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक और पुलिस फेरबदल माना जा रहा है।
संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल थानों पर आयोग की नजर
इस तबादले की सबसे बड़ी वजह संवेदनशील क्षेत्रों में ‘स्थानीय प्रभाव’ को खत्म करना है। आयोग ने कोलकाता पुलिस के अंतर्गत आने वाले कई हाई-प्रोफाइल थानों के प्रभारियों को बदल दिया है, जिनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का निर्वाचन क्षेत्र भाबनीपुर, कालीघाट और हिंसा के लिए कुख्यात भांगर थाना प्रमुख शामिल हैं।

कूचबिहार के चार संवेदनशील थानों के ओसी बदले
आयोग ने सीमावर्ती जिले कूचबिहार पर विशेष ध्यान दिया है। यहां के चार पुलिस स्टेशन प्रमुखों—सीतालकुची, मथाभंगा, दिन्हाटा और घोकसडांगा का तबादला कर दिया गया है। ये सभी इलाके सीमावर्ती और हिंसाग्रस्त माने जाते हैं। खास बात यह है कि 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान सीतालकुची में एक मतदान केंद्र पर कथित हमले के बाद सीएपीएफ की गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद से यहां की सुरक्षा व्यवस्था हमेशा सवालों के घेरे में रही है। इसके अलावा कूचबिहार से लेकर हावड़ा, हुगली, नादिया और पूर्वी मेदिनीपुर (जहां 9 अधिकारी बदले गए हैं) तक कुल 184 पुलिस अधिकारियों को इधर-उधर किया गया है।
18 जिलों के 83 BDO और ARO भी बदले
पुलिस व्यवस्था के साथ-साथ जमीनी स्तर पर चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए 18 जिलों में 83 BDO और ARO का तबादला किया गया है।
इस लिस्ट में शामिल प्रमुख ब्लॉक:
- दक्षिण 24 परगना: डायमंड हार्बर-1 और 2
- पूर्वी मेदिनीपुर: रामनगर, नंदीग्राम-1 और 2
- बीरभूम: नानूर, लाभपुर, मोहम्मद बाजार, सूरी-1, इलंबजार और मयूरेश्वर-1
- कूचबिहार: दिनहाटा-2
क्यों उठाया गया यह कदम?
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह आदेश सीधे नई दिल्ली स्थित आयोग कार्यालय से जारी किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव से पहले प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने और सभी राजनीतिक दलों को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर देने के लिए ये तबादले किए गए हैं। चुनावी प्रक्रिया पर किसी भी तरह के स्थानीय या राजनीतिक दबाव को खत्म करना हमारे प्रोटोकॉल का हिस्सा है।”
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राज्य और केंद्र के बीच बढ़ा तनाव
हालांकि, चुनाव से पहले अधिकारियों के इस तरह के बड़े पैमाने पर तबादले से राज्य सरकार (TMC) और केंद्र सरकार के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव को और हवा मिली है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले भी कई मौकों पर आरोप लगा चुकी हैं कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहा है और अचानक अधिकारियों के तबादले से प्रशासनिक कामकाज ठप होने की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
















