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“थाली बजाकर भगाएंगे शिक्षा का वायरस”, अभिजीत दीपके का तंज

Live protest at Jantar Mantar: कॉकरोच जनता पार्टी के इस अनोखे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर जमकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा तंज कसा और उन्होंने अपने संबोधन में कोरोना महामारी के दौरान देशभर में चलाए गए 'थाली बजाओ' अभियान को याद कराया।

'गो प्रधान गो' के नारों से गूंजा दिल्ली का जंतर-मंतर

HIGHLIGHTS

  • शिक्षा व्यवस्था के 'वायरस' को भगाने के लिए बजीं थालियां
  • परीक्षा प्रणाली में धांधली के खिलाफ छात्रों का अनोखा थाली प्रदर्शन
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उठी मांग
  • कोरोना काल के 'थाली बजाओ' से सरकार पर तीखा व्यंग्य
  • पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर-मंतर पर बड़ा धरना

Live protest at Jantar Mantar: दिल्ली में आज जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी का एक अनोखा और व्यंग्यपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला। केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों और लगातार सामने आ रही परीक्षा प्रणाली की कमियों के विरोध में यहां एक बड़ा धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन की सबसे अलग और चर्चित बात रही प्रदर्शनकारियों का तरीका। उन्होंने कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘थाली बजाओ’ के आह्वान को व्यंग्य का हथियार बनाया और शिक्षा व्यवस्था में बैठे ‘वायरस’ को भगाने के लिए थालियां और चम्मच बजाए। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

‘थाली बजाओ’ का व्यंग्यात्मक इस्तेमाल

कॉकरोच जनता पार्टी के इस अनोखे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर जमकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा तंज कसा और उन्होंने अपने संबोधन में कोरोना महामारी के दौरान देशभर में चलाए गए ‘थाली बजाओ’ अभियान को याद कराया। अभिजीत दीपके ने कहा कि जिस तरह कभी यह दावा किया गया था कि थाली बजाने और दीप जलाने से कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा, उसी तरह हमारी मान्यता है कि शिक्षा व्यवस्था में बैठे इन वायरसों (भ्रष्टाचार और अक्षमता) को भी थाली बजाकर हटाया जा सकता है।

हालांकि, अपने इस बयान पर सवाल उठने की संभावना को देखते हुए अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उनका यह बयान किसी भी तरह से वैज्ञानिक तथ्य नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से व्यंग्य (सटायर) है। उन्होंने सरकार की उस नीति की आलोचना करते हुए कहा कि जब विज्ञान और तर्क की जगह अंधविश्वास और नारेबाजी को तवज्जो दी जाती है, तो जनता को भी उसी भाषा में जवाब देना पड़ता है। उन्होंने मौजूद लोगों से अपील की है कि वे अपने हाथों में थाली और चम्मच लें और इस अनोखे तरीके से अपने गुस्से को व्यक्त करें।

‘गो प्रधान गो’ के नारों से गूंजा जंतर-मंतर

बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके के इस आह्वान पर तुरंत ही बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में थालियां और चम्मच पकड़ लिए। जैसे ही उन्होंने थालियां बजानी शुरू कीं, जंतर-मंतर का पूरा माहौल एक अलग ही रंग में नजर आने लगा। इस शोर के बीच लोगों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी—”गो प्रधान गो”, “शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो”।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका यह आंदोलन किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं है। उनकी मांग साफ है—शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, परीक्षा प्रणाली में पूरी पारदर्शिता और छात्रों के हितों की रक्षा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में शिक्षा का व्यापारीकरण तेजी से हुआ है और छात्रों को लगातार परीक्षाओं के रूप में एक तरह का यातना कक्ष बनाकर खड़ा कर दिया गया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मुख्य मांग

इस प्रदर्शन की सबसे प्रमुख और एकमत मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से शिक्षा क्षेत्र में लगातार सवाल उठ रहे हैं। चाहे राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NET) का मामला हो, या फिर अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोप—हर जगह असंतोष का माहौल है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक इन विवादों की जवाबदेही तय नहीं होती और शिक्षा मंत्री अपना इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, न कि केवल आश्वासन दिए जाएं। छात्र नेताओं ने कहा कि जब तक परीक्षा प्रणाली में भरोसा वापस नहीं आता, तब तक किसी भी नई नीति (जैसे नई शिक्षा नीति) को लागू करना छात्रों के साथ अन्याय होगा।

शांतिपूर्ण धरना जारी, लोकतांत्रिक तरीके से उठेगी आवाज

श्रद्धांजलि सभा और थाली-चम्मच प्रदर्शन के बाद मूड शांत हो गया। बड़ी संख्या में उपस्थित लोग सड़क पर बैठ गए और जंतर-मंतर पर एक शांतिपूर्ण धरना शुरू हो गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने लोगों से विशेष अपील की कि किसी भी तरह का आक्रामक रवैया अपनाने के बजाय शांति बनाए रखी जाए और कानून का पूरी तरह से पालन किया जाए।

इस धरने में शामिल युवाओं और छात्रों का कहना है कि उनका यह आंदोलन राजनीतिक दलों के इशारे पर नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की बदहाली से तंग आकर उठाया गया कदम है। उनका संदेश साफ था—”हम यहां किसी को उखाड़ने नहीं आए हैं, हम अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।”

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक छात्रों की तत्काल समस्याओं का समाधान नहीं होता, पेपर लीक के दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और शिक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार नहीं किए जाते, तब तक वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। यह थाली बजाने का व्यंग्य केवल एक शुरुआत है, अगर सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज हो सकता है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय इस ‘व्यंग्यात्मक थाली’ की आवाज़ को समझते हैं या इसे भी बेहद आम सुनने वाली बात मानकर अनदेखा कर देते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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