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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का शिक्षाविदों को बड़ा संदेश

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा

Delhi News: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के 39वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शिक्षा के महत्व और उसकी सार्वभौमिक पहुंच पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा सबके लिए सुलभ हो, सीखना जीवनभर जारी रहे और तकनीक को अपनाकर आगे बढ़ें।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। नई तकनीकों को अपनाकर ही देश को प्रगति की ओर ले जाया जा सकता है।” इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

IGNOU: देश को जोड़ने वाला शिक्षा का माध्यम

उपराष्ट्रपति ने कहा कि IGNOU ने पूरे देश को शिक्षा के माध्यम से जोड़ने का काम किया है। यह विश्वविद्यालय दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को उच्च शिक्षा उपलब्ध करा रहा है। अब यह सिर्फ ‘डिस्टेंस लर्निंग’ नहीं, बल्कि ‘क्लोजेस्ट लर्निंग सिस्टम’ बन चुका है।

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ग्रामीण और वंचित वर्ग के लिए आशा का केंद्र

उपराष्ट्रपति ने कहा कि IGNOU के अधिकतर छात्र ग्रामीण और वंचित वर्ग से आते हैं। यह संस्थान उन लोगों के लिए उम्मीद का संबल है, जिन्होंने संसाधनों और समय की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ दी थी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जब अधिकांश शिक्षण संस्थान बंद हो गए थे, तब IGNOU ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे SWAYAM और eGyanKosh के माध्यम से पढ़ाई जारी रखी, जिससे छात्रों का शिक्षा से जुड़ाव बना रहा।

तकनीक और AI से न डरें, बल्कि अपनाएं

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों से डरने की जरूरत नहीं है। जब कंप्यूटर भारत में आए थे, तो भी लोगों को नौकरी जाने का डर था, लेकिन आज वही तकनीक देश को आर्थिक शक्ति दे रही है।

उन्होंने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 की सराहना करते हुए कहा, “IGNOU ने इसे प्रभावी रूप से लागू किया है। अब छात्रों को चार वर्षीय डिग्री और मल्टीपल एग्जिट ऑप्शन जैसे विकल्प मिल रहे हैं, जो उनकी सुविधा और स्वायत्तता को बढ़ाते हैं।”

भारतीय संस्कृति और मूल्यों का सम्मान

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की ताकत सिर्फ ज्ञान में ही नहीं, बल्कि उसके संस्कार और नैतिक मूल्यों में भी है। उन्होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को संजोए रखें।

सतत सीखने का आह्वान

तमिल संत तिरुवल्लुवर के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “जैसे कुएं को जितना गहरा खोदा जाएगा, उतना अधिक पानी मिलेगा, वैसे ही जितना अधिक सीखेंगे, उतना ही ज्ञान बढ़ेगा।” उपराष्ट्रपति ने युवाओं से कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना आप जैसे जागरूक और शिक्षित युवाओं के प्रयासों से ही साकार होगा। अपना ज्ञान, कौशल और मूल्य देश की सेवा में लगाए।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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