Vasai-Virar News: महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई पूर्व क्षेत्र में मानसून का कहर और ठेकेदारों की बेपरवाही का ऐसा नंगा चित्र सामने आया है, जिसे देखकर इंसानियत को झटका लगता है। मधुबन इलाके में स्थित ‘सुरक्षा स्मार्ट सिटी’ परिसर में एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने एक परिवार की उम्मीदों को हमेशा के लिए तोड़ दिया। लगातार हो रई भारी बारिश के कारण निर्माण स्थल पर बने एक गहरे गड्ढे में डूबने से 20 वर्षीय एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई।
कौन था मृतक और कैसे पहुंचा था वसई?
इस त्रासदी का शिकार हुआ युवक सुमित कुमार सुरेश मंडल था, जिसकी उम्र महज 20 साल थी। सुमित मूल रूप से बिहार के भागलपुर जिले का निवासी था। रोजगार की तलाश में और परिवार का पेट पालने के लिए वह सैकड़ों किलोमीटर दूर वसई पहुंचा था। यहां स्थित सुरक्षा स्मार्ट सिटी परिसर में उच्चदाब बिजली टावर लगाने के बड़े प्रोजेक्ट पर वह एक मजदूर के रूप में तैनात था। जीवन के उस उम्र में, जब युवा अपने करियर की शुरुआत करते हैं और सपने देखते हैं, सुमित की जिंदगी एक खुले गड्ढे में समा गई।
बारिश बनी काल
बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र राज्य विद्युत मंडल (MSEB) की डीसीएल (DCL) नामक एक ठेकेदार कंपनी को यहां हाई-टेंशन टावर लगाने का काम सौंपा गया था। इस काम के लिए निर्माण स्थल पर एक बेहद गहरा गड्ढा खोदा गया था। हालांकि, मौसम के पूर्वानुमान के बावजूद कंपनी ने न तो गड्ढे को ढकने की व्यवस्था की और न ही आसपास कोई सुरक्षा बेरिकेडिंग लगाई गई।
लगातार हो रही बारिश के कारण यह गड्ढा एक छिपे हुए तालाब में तब्दील हो गया। काम के दौरान सुमित मंडल अचानक इसी पानी से भरे गड्ढे में गिर गया। पानी का दबाव और गड्ढे की गहराई इतनी ज्यादा थी कि वह बाहर नहीं निकल सका और उसकी तैराकी के अभाव में डूबकर मौत हो गई।
भाई ने पुलिस को दी घटना की सूचना
इस हादसे के बाद मौके पर हड़कंप मच गया। मृतक के 24 वर्षीय बड़े भाई रितेश कुमार सुरेश मंडल ने इस पूरी घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस को दी। रितेश ने बताया कि उसका भाई डीसीएल कंपनी की साइट पर ही काम करता था और कंपनी की चेतावनी और सुरक्षा व्यवस्था में कमी की वजह से ही यह वारदात हुई। परिवार पर इस घटना ने पहाड़ तोड़ दिया है और वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
स्मार्ट सिटी की ‘असलियत’ और ठेकेदारों की लापरवाही
इस हादसे ने एक बार फिर उन निर्माण कंपनियों की पोल खोलकर रख दी है, जो ‘स्मार्ट सिटी’ जैसे प्रोजेक्ट्स का निर्माण करती हैं, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा को लेकर अनसुनी करती हैं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का कहना है कि अगर साइट पर सुरक्षा जैकेट, रस्सियां या बेरिकेडिंग होती, तो एक बेकसूर जान नहीं जाती।
वसई पुलिस ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए आकस्मिक मृत्यु का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि जांच के दायरे को बड़ा रखा गया है। अब सिर्फ हादसे के कारणों की नहीं, बल्कि इस बात की भी गहन जांच की जा रही है कि क्या निर्माण कंपनी और ठेकेदार ने ‘बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स’ (BOCW) एक्ट के नियमों का उल्लंघन किया है?
मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं?
यह हादसा सिर्फ वसई तक सीमित नहीं है। मानसून के दौरान भारत के विभिन्न राज्यों में ऐसे हादसे लगातार सामने आते रहते हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां मुनाफे की दौड़ में बुनियादी सुरक्षा मानकों को ताक पर रख देती हैं। मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा आवरण के खतरनाक स्थलों पर काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।

सुमित की मौत एक चेतावनी है कि सरकारों और प्रशासन को निर्माण स्थलों पर सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) को और सख्ती से लागू करना होगा। जब तक ठेकेदारों पर डंडे नहीं चलेंगे और मजदूरों को मौत के बाद मुआवजे के अलावा जीते जी सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण नहीं मिलेगा, तब तक ऐसी त्रासदियां रुकने का नाम नहीं लेंगी। अब देखना यह है कि पुलिस की जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और क्या इस नौजवान के परिवार को न्याय मिल पाता है।






















