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बकरीद से पहले बंगाल में बांग्लादेशियों की वापसी से मचा हड़कंप

Eid-ul-Adha Kolkata:पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट इन दिनों इस पलायन का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। मंगलवार सुबह ही यहां सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हो गए।

बकरीद से पहले अवैध बांग्लादेशियों की ‘घर वापसी’ शुरू

HIGHLIGHTS

  • हकीमपुर बॉर्डर पर उमड़ी भीड़
  • डर के साये में लौट रहे बांग्लादेशी
  • बंगाल में घुसपैठियों पर सख्ती तेज
  • बंगाल में घुसपैठ विरोधी अभियान तेज
  • सीमा चौकियों पर बढ़ी हलचल

Eid-ul-Adha Kolkata: एक ओर जहां पूरे देश में बकरीद (Eid-ul-Adha) की धूमधाम से तैयारियां चल रही हैं, वहीं पश्चिम बंगाल का नजारा इस साल कुछ अलग है। बंगाल के सीमावर्ती इलाकों, खासकर उत्तर 24 परगना से लेकर मालदा तक, एक अजीब और तनावपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। कथित तौर पर अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के बड़े-बड़े समूह अचानक सक्रिय हो गए हैं। नए कानूनी आदेशों और सख्ती के डर से ये लोग त्योहार से पहले ही अपने वतन वापस लौटने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

हकीमपुर चेकपॉइंट पर उमड़ी भीड़

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट इन दिनों इस पलायन का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। मंगलवार सुबह ही यहां सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हो गए। इनके चेहरों पर एक तरफ जहां घर वापसी की राहत नजर आई, तो दूसरी तरफ भविष्य को लेकर गहरा डर और असमंजस था। ये सभी लोग अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके अपने देश लौटने की कोशिश में जुटे हुए थे।

इलाज के बहाने आई रोजीना, अब डर के साये में जीवन

इस भीड़ में शामिल बांग्लादेशी महिला रोजीना बीबी की कहानी कई अन्य घुसपैठियों की कहानी का आईना है। रोजीना ने बताया, “हम सात साल पहले अपने पति सैदुल के कैंसर के इलाज के लिए भारत आए थे। भारत में इलाज की प्रक्रिया इतनी लंबी चली कि हम गैर-कानूनी तौर पर ही यहीं बस गए।” हालांकि, हालिया कानूनी आदेशों ने पूरी स्थिति बदल दी है। सरकारी कार्रवाई के डर से बौखलाए उनके मकान मालिक ने उन्हें घर खाली करने का फरमान सुना दिया। रोजीना के पास अब वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।

सबीना की कहानी: बंटवारे का दर्द और बेबस बच्चे

हकीमपुर चेकपॉइंट के पास अपने दो मासूम बच्चों के साथ बैठी 36 वर्षीय सबीना खातून की कहानी दिल दहला देने वाली है। सालों पहले दलालों के जरिए भारत में घुसी सबीना ने यहां एक भारतीय नागरिक से शादी कर ली। उसने अपने पति के पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके अस्पताल में अपने बच्चों को जन्म दिया। लेकिन अब नए कानून ने उसे एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां से उसके लिए रास्ता नहीं नजर आ रहा।

चूंकि सबीना का पति भारतीय नागरिक है, इसलिए वह उनके साथ बांग्लादेश नहीं जा सकता। सबीना और उसके बेबस बच्चे सीमा पर अकेले इंतजार कर रहे हैं। आंखों में आंसू भरकर सबीना कहती है, “सतखिरा (बांग्लादेश) में मेरा परिवार तो है, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम दोबारा कैसे मिल पाएंगे। क्या मेरे बच्चे कभी अपने पिता को दोबारा देख पाएंगे?” सबीना की ये पूछताछ प्रशासन की सख्ती के बीच एक मानवीय संकट की तस्वीर पेश करती है।

राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासन का रुख

इस पूरे मामले पर पश्चिम बंगाल के नेता दिलीप घोष ने स्पष्ट रुख अख्तियार किया है। उन्होंने कहा, “बांग्लादेशी यहां क्यों रहें? वो केंद्र सरकार द्वारा दी गई हर सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। गरीबों के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं से उन्हें फायदा हो रहा है।”

दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि इन घुसपैठियों को नागरिकता देकर, वोटर आईडी और आधार कार्ड जारी करके उन्हें मतदाता के रूप में पंजीकृत किया गया और उनके वोट मांगे जा रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया, “ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें अलग किया जाएगा। गृह मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उन्हें वापस भेजा जाएगा। बेहतर होगा यदि वो स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं, अन्यथा सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”

अगले चरण में होगी सख्त कार्रवाई

बंगाल में जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है, वैसे-वैसे प्रशासनिक अभियान भी तेज हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, कड़ी सुरक्षा के बीच ‘होल्डिंग सेंटर’ (डिटेंशन सेंटर) को फिर से सक्रिय कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब महज चेकिंग वाले चरण से निकलकर सख्त कार्रवाई वाले चरण में प्रवेश कर गया है।

आने वाले हफ्तों में और भी संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की गहन जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होने की पूरी संभावना है। बकरीद से पहले यह ‘घर वापसी’ चाहे कितनी भी स्वैच्छिक क्यों न लगे, लेकिन इसके पीछे बदलते कानूनी ताने-बाने और प्रशासन की चल रही तैयारियों की गूंज साफ तौर पर सुनाई दे रही है। अब देखना यह है कि इस अभियान से सीमा की सुरक्षा कितनी मजबूत होती है और क्या इससे जुड़े मानवीय पहलुओं पर भी सरकार किसी तरह की नीतिगत सहानुभूति अपनाती है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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