राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। आयोग के मुताबिक, प्रदेश की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव चरणबद्ध तरीके से कराए जाएंगे। चुनाव की घोषणा के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। अब मतदाताओं की नजर इस बात पर है कि उनके क्षेत्र में मतदान किस तारीख को होगा और किस पद के लिए वोटिंग की प्रक्रिया कैसे चलेगी।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम की जानकारी दी। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव चार चरणों में 25 अक्टूबर से 16 नवंबर तक** होंगे। पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के मतदान का कार्यक्रम अलग-अलग चरणों में रखा गया है। आयोग ने बताया है कि सभी चरणों में मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा। पूरी चुनाव प्रक्रिया 28 नवंबर 2026 तक संपन्न कराने का लक्ष्य है।
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: एक नजर में
- कुल ग्राम पंचायतें: 14,403
- पंचायत समितियां: 457
- जिला परिषदें: 41
- सरपंच और वार्ड पंच मतदान: चार चरण
- मतदान का समय: सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक
- चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की निर्धारित तारीख: 28 नवंबर 2026
- ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता: चुनाव घोषणा के साथ लागू
सरपंच और वार्ड पंच चुनाव: चरणवार मतदान कार्यक्रम
राजस्थान में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए मतदान चार चरणों में होगा। पहले चरण में 25 अक्टूबर को 3,672 ग्राम पंचायतों में वोट डाले जाएंगे। दूसरे चरण का मतदान 31 अक्टूबर को 3,626 पंचायतों में होगा। इसके बाद 6 नवंबर को तीसरे चरण में 3,605 ग्राम पंचायतों और 16 नवंबर को चौथे चरण में 3,500 ग्राम पंचायतों में मतदान कराया जाएगा। सभी चरणों में वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी।
पहले चरण में 25 अक्टूबर को 3,672 ग्राम पंचायतों में मतदान होगा। इसके बाद 31 अक्टूबर को दूसरे चरण में 3,626 पंचायतों में वोट डाले जाएंगे। तीसरे चरण का मतदान 6 नवंबर को 3,605 ग्राम पंचायतों में और अंतिम चरण का मतदान 16 नवंबर को 3,500 ग्राम पंचायतों में होगा। मतदाताओं को अपने गांव के मतदान की तारीख और मतदान केंद्र की जानकारी चुनाव आयोग की आधिकारिक सूचना से जांचनी चाहिए।
पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव की तारीखें
पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव के लिए उपलब्ध जानकारी में अलग-अलग चरणों की तारीखें दी गई हैं। एक कार्यक्रम के अनुसार पंचायत समिति सदस्यों के मतदान की तारीखें 13, 16 और 23 अक्टूबर बताई गई हैं। वहीं, दूसरे विवरण में पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव के लिए चार चरणों की तारीखें 23 और 29 अक्टूबर तथा 4 और 14 नवंबर दी गई हैं।

चूंकि इन तारीखों में अंतर दिखाई देता है, इसलिए मतदाताओं और उम्मीदवारों को अपने क्षेत्र का अंतिम कार्यक्रम राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक अधिसूचना से जरूर मिलाना चाहिए। जिला, पंचायत समिति और पद के अनुसार मतदान की तारीख अलग हो सकती है। अंतिम और प्रमाणिक जानकारी के लिए आयोग की वेबसाइट, जिला निर्वाचन अधिकारी की सूचना या स्थानीय प्रशासन की घोषणा देखना सबसे सही रहेगा।
मतदान में बैलट पेपर और EVM का इस्तेमाल
इस बार चुनाव में पद के अनुसार अलग-अलग मतदान व्यवस्था अपनाई जाएगी। आयोग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलट पेपर से कराए जाएंगे। वहीं, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में EVM का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत मतदाता को अलग-अलग पदों के लिए मतदान करते समय संबंधित प्रक्रिया का पालन करना होगा। मतदान केंद्र पर चुनाव कर्मी मतदाता की पहचान की पुष्टि करेंगे और फिर उन्हें निर्धारित तरीके से वोट डालने का अवसर दिया जाएगा। मतदाता अपने साथ आयोग द्वारा मान्य पहचान पत्र रखें और मतदान केंद्र पर जारी निर्देशों का पालन करें।
आचार संहिता लागू: ग्रामीण क्षेत्रों में क्या बदलेगा?
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखना है। आचार संहिता लागू रहने के दौरान राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को चुनावी नियमों के अनुरूप काम करना होगा।
इस अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नई सरकारी योजनाओं या विकास कार्यों की घोषणा पर रोक हो सकती है। नए कार्यों के टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी करने, सरकारी संसाधनों के चुनावी प्रचार में इस्तेमाल तथा मतदाताओं को प्रभावित करने वाली घोषणाओं पर भी नियम लागू होंगे। मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के सरकारी वाहनों तथा सरकारी सुविधाओं के इस्तेमाल को लेकर भी चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करना होगा। तबादलों और नियुक्तियों पर भी निर्धारित नियम लागू रहेंगे।
हालांकि, जरूरी सेवाओं और पहले से स्वीकृत कार्यों को लेकर क्या अनुमति होगी, यह संबंधित आदेशों पर निर्भर करेगा। इसलिए किसी विशेष काम की स्थिति में जिला प्रशासन या निर्वाचन अधिकारी की सूचना देखना जरूरी है।
कुछ जिलों में चुनाव बाद में क्यों होंगे?
आयोग के अनुसार, बारां, श्रीगंगानगर, करौली और कोटा जिलों की कुछ पंचायती राज संस्थाओं का कानूनी कार्यकाल अभी शेष है। इसी वजह से इन संस्थाओं में चुनाव बाकी क्षेत्रों के साथ नहीं होंगे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन संस्थाओं में 22 दिसंबर 2026 के बाद चुनाव कराए जाने की बात कही गई है। संबंधित क्षेत्रों के लिए अलग अधिसूचना और कार्यक्रम जारी किया जा सकता है।
मतदाता और उम्मीदवार इन बातों का रखें ध्यान
राजस्थान पंचायत चुनाव में मतदान से पहले मतदाता अपने नाम की पुष्टि मतदाता सूची में करें। मतदान केंद्र, चरण और तारीख की जानकारी आधिकारिक चुनाव सूचना से जांचें। उम्मीदवारों को नामांकन, चुनाव प्रचार, खर्च और आचार संहिता से जुड़े नियमों का पालन करना चाहिए। गलत सूचना या अपुष्ट तारीखों पर भरोसा करने के बजाय राज्य निर्वाचन आयोग और जिला निर्वाचन अधिकारी के अपडेट को प्राथमिकता दें।
























