Delhi News: दिल्ली में मानसून की बौछारें आमतौर पर लोगों को गर्मी से राहत देती हैं, लेकिन पश्चिम दिल्ली के मोहन गार्डन और उसके आसपास के इलाकों के लिए यह राहत की बारिश महीनों तक परेशानी का सबब बन जाती है। थोड़ी सी बारिश होते ही यहां की सड़कें और गलियां नालों और सीवर के पानी से उबलने लगती हैं। यह सिर्फ पानी भरने की समस्या नहीं है, बल्कि दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के अधिकारियों की घोर लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है, जो स्वच्छता के सपने को काले पानी में डूबो रही है।
गलियों में फैली गंदगी और बदबू
मोहन गार्डन, उत्तम नगर से लेकर बुद्ध बाजार, राजा पुर खुर्द और गांधी चौक जैसे क्षेत्रों में सीवर लाइनों की बदहाली का आलम देखते ही बनता है। इन इलाकों में जिन घरों के सामने सीवर के डक्कन (कवर) लगे हैं, वहां हालत सबसे खराब है। बारिश का पानी और सीवर का गंदा पानी मिलकर घरों के मुख्य द्वार तक पहुंच जाता है।
इन आवासीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अपनी ही गली में निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चों को स्कूल जाने और बुजुर्गों को सुबह-शाम की सैर पर निकलने का डर सताता है। गंदे पानी में फिसलने का खतरा हमेशा बना रहता है। सड़कों पर जमा कीचड़ और दुर्गंध से निकलना तो दूर, सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।
बीमारियों का अड्डा बनता मोहन गार्डन
स्वच्छता के नाम पर जहां सरकारें बड़ी-बड़ी योजनाओं का ढोल पीटती हैं, वहीं मोहन गार्डन जैसे आबादी वाले इलाकों में स्वच्छता का कोई नामोनिशान नहीं है। लगातार कई दिनों तक सीवर का पानी घरों के बाहर खड़ा रहने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और त्वचा संबंधी संक्रमण यहां की आम बीमारियां बन गई हैं।
जिन परिवारों के घरों के सामने सीवर का डक्कन उखड़ा हुआ या फटा हुआ है, उनके बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा है। नालों का गंदा पानी सीधा घरों के अंदर तक घुसने का प्रयास करता है, जिससे महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी होती है। यह सिर्फ भौतिक असुविधा नहीं है, बल्कि लोगों की मानसिक सेहत पर भी भारी पड़ रहा है।
दिल्ली जल बोर्ड की सुन्न कर देने वाली चुप्पी
सबसे दुखद पहलू यह है कि यह समस्या नई नहीं है। हर बारिश के मौसम में यह नजारा दोहराता है। आम जनता द्वारा दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और हेल्पलाइन नंबरों पर कई बार शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। लेकिन जल बोर्ड की कार्यप्रणाली ‘जल्दी काम छोड़ो’ वाली बनी हुई है।
अक्सर देखा गया है कि शिकायत मिलने के बाद जल बोर्ड की टीमें आती हैं, लेकिन वे सिर्फ अस्थायी इंतजाम करके चली जाती हैं। सीवर लाइन की सफाई (डी-सिल्टिंग) ठीक से नहीं की जाती और पुरानी, टूटी पाइप लाइनों को बदलने के बजाय उन्हें पैचवर्क कर दिया जाता है। जैसे ही थोड़ी सी बारिश होती है, सड़कें फिर से नालों का तालाब बन जाती हैं। यह लापरवाही अब जनता के गले की फांस बन गई है।
भाजपा सरकार के लिए बन सकती है बड़ी राजनीतिक चुनौती
दिल्ली में वर्तमान में भाजपा सरकार है और नगर निकायों (MCD) भी इनके नियंत्रण में हीं। ऐसे में बुद्ध बाजार, गांधी चौक, राजा पुर खुर्द और मोहन गार्डन जैसे इलाकों में जल बोर्ड और नगर निगम की इस सांठगांठ भरी लापरवाही का खामियाजा सीधे भाजपा सरकार को भुगतना पड़ सकता है।
जनता ने विकास और बेहतर बुनियादी ढांचे के नाम पर जनादेश दिया था। लेकिन अगर एक आम नागरिक को बारिश के मौसम में अपने घर से निकलने के लिए भीगे कपड़ों और बदबूदार गलियों से गुजरना पड़ेगा, तो यह जनादेश जल्द ही नाराजगी में बदल सकता है। विपक्ष को इस मुद्दे को हथियार बनाने में देर नहीं लगेगी। अगर अगले चुनाव से पहले इन क्षेत्रों में सीवर की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो यह भाजपा के लिए एक बड़ी आफत साबित हो सकती है।






















