Bihar News: बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली NDA सरकार का आज गुरुवार को बेहद भव्य तरीके से कैबिनेट विस्तार किया गया। मुख्यमंत्री बनने के 22 दिनों के बाद हुए इस विस्तार में सभी दलों और जातियों के समीकरण को विशेष ध्यान में रखा गया।
सवाल यह है कि सम्राट की सेना (कैबिनेट) में किस जाति के कितने मंत्रियों को जगह मिली? तो इसका जवाब है— मुख्यमंत्री समेत कुल 8 मंत्री ओबीसी (OBC) समाज से, 9 मंत्री अगड़ी जाति से और अल्पसंख्यक समाज से अकेले जमा खान को मंत्री बनाया गया है।
PM मोदी और शाह रहे मौजूद
शपथ ग्रहण समारोह में देश के शीर्ष नेतृत्व ने शिरकत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस खास मौके पर मौजूद रहे। इस विस्तार ने बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है।
निशांत कुमार की एंट्री और नीतीश कुमार का आशीर्वाद
इस कैबिनेट विस्तार की सबसे चर्चित घटना रही जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की मंत्रिमंडल में एंट्री। शपथ ग्रहण से पहले नीतीश कुमार ने निशांत की इस नई पारी के लिए अपनी सहमति दे दी थी। (नोट: निशांत ने करीब 2 महीने पहले ही जेडीयू की सदस्यता ग्रहण की थी।) शपथ लेने के तुरंत बाद मंच पर ही निशांत ने अपने पिता नीतीश कुमार का पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जिसकी तस्वीरें काफी वायरल हुईं।
किस दल से कितने मंत्री?
इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है।
- BJP: 15 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली।
- JDU: 12 नेता मंत्री बनाए गए।
- LJP (रामविलास): चिराग पासवान की पार्टी से 2 मंत्री शामिल हुए।
- HAM और RLM: जीतन राम मांझी की HAM पार्टी से 1 और आरएलएम से दीपक प्रकाश को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई।
शीर्ष पदों पर जातीय समीकरण
सरकार के शीर्ष पर ओबीसी का ही वर्चस्व दिखता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्वयं कोइरी (OBC) वर्ग से आते हैं। सरकार में कुल 2 उपमुख्यमंत्री हैं— विजय चौधरी (भूमिहार जाति से) और विजयेंद्र यादव (OBC वर्ग से)।
इन दिग्गजों का पत्ता कटा
कैबिनेट विस्तार के दौरान कुछ पुराने चेहरों को निराशा हाथ लगी है। बीजेपी कोटे से कई मौजूदा मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया, जिसमें सबसे प्रमुख नाम पूर्व मंत्री मंगल पांडे का है, जिन्हें नई कैबिनेट में जगह नहीं मिली।
कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी सरकार का पहला कैबिनेट विस्तार जातीय समीकरण साधने और सभी सहयोगी दलों को तवज्जो देने वाला साबित हुआ है।

























