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जंतर मंतर पर तीसरे दिन भी छात्रों का उग्र प्रदर्शन

Delhi News: धरना स्थल पर सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ी और नारेबाजी से पूरा वातावरण गूंज उठा। छात्रों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की। मंच से लगातार शिक्षा व्यवस्था, भ्रष्ट परीक्षा प्रणाली और छात्रों के काले भविष्य को लेकर तल्ख सवाल उठाए गए।

अभिजीत दीपके ने की कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील

HIGHLIGHTS

  • पेपर लीक के खिलाफ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
  • कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर मंतर पर चल रहा धरना
  • एनटीए को समाप्त करने की मांग उठी जंतर मंतर पर
  • छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए जारी है आंदोलन
  • पेपर लीक पर जवाबदेही और मंत्री के इस्तीफे की मांग

Delhi News: दिल्ली में जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं का गुस्सा लगातार तीसरे दिन भी उबलता हुआ दिखा। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले जुटे हजारों प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में जड़ से बदलाव, बढ़ते पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। यह आंदोलन अब किसी एक विशेष परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के करोड़ों ऐसे छात्रों के दर्द का प्रतीक बन चुका है, जिनके सालों की मेहनत और उम्मीदें सरकारी व्यवस्था की लापरवाही की भेंट चढ़ रही हैं। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

पेपर लीक और शिक्षा माफिया के खिलाफ जंतर-मंतर की गूंज

धरना स्थल पर सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ी और नारेबाजी से पूरा वातावरण गूंज उठा। छात्रों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की। मंच से लगातार शिक्षा व्यवस्था, भ्रष्ट परीक्षा प्रणाली और छात्रों के काले भविष्य को लेकर तल्ख सवाल उठाए गए।

वक्ताओं ने साफ तौर पर कहा कि बार-बार सामने आने वाली पेपर लीक की घटनाओं ने छात्र वर्ग के मन में शासन व्यवस्था के प्रति जो विश्वास था, उसे पूरी तरह तोड़ दिया है। लाखों छात्र दिन-रात एक करके तैयारी करते हैं, लेकिन जब परिणाम आता है तो उन्हें हताशा के सिवाय कुछ नहीं मिलता, क्योंकि धनबल और ताकतबल वाले पेपर लीक के जरिए सफलता की सीढ़ियां चढ़ जाते हैं। प्रदर्शनकारियों की स्पष्ट मांग है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं आती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।

पर्दे के पीछे के सिपाही: स्वयंसेवकों की अनुठी भूमिका

किसी भी लंबे आंदोलन की रीढ़ उन लोगों की होती है जो कैमरे और मंच से दूर रहकर काम करते हैं। जंतर-मंतर पर इस आंदोलन को जारी रखने के लिए एक बड़ी संख्या में स्वयंसेवक लगातार लगे हुए हैं। सुबह से लेकर देर रात तक इन स्वयंसेवकों ने प्रदर्शनकारियों के लिए चाय, समोसे और स्वच्छ पेयजल की निर्बाध व्यवस्था की हुई है।

खास बात यह है कि कई स्वयंसेवक ऐसे हैं जो अपनी निजी नौकरियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को अनदेखा करके यहां सेवा में जुटे हैं। आंदोलन के प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके ने इन पर्दे के पीछे काम करने वाले योद्धाओं की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि कोई भी आंदोलन केवल भाषणबाजी से सफल नहीं होता। यह ऐसे लोगों के समर्पण से मजबूत होता है, जो चुपचाप लोगों की सेवा में लगे रहते हैं। इनकी मेहनत ही इस आंदोलन की असली ताकत है।

एकजुटता का संदेश: आंदोलन बड़ा, व्यक्तिगत नहीं

लंबे धरने-प्रदर्शन में अक्सर आपसी मतभेद और गुटबाजी सामने आती है, लेकिन अभिजीत दीपके ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को इस गलती से बचने की सख्त चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति विशेष या संगठन का नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़े राष्ट्रीय उद्देश्य से जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि जब हम सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं की आलोचना करते हैं, तो हमें अपनी आंतरिक कमियों को स्वीकार करने का भी साहस रखना चाहिए। अगर किसी कार्यकर्ता से कोई भूल होती है, तो उसे खुलकर और निर्भीक होकर बताया जाना चाहिए। उन्होंने सभी से अपील की कि कोई भी आपसी मतभेद इस छात्र आंदोलन से बड़ा नहीं होना चाहिए और सभी को मिलकर इस लड़ाई को अंतिम चरण तक ले जाना है।

प्रशासन की कथित ‘दमनकारी’ रणनीति

जैसे-जैसे आंदोलन व्यापक होता जा रहा है, वैसे-वैसे प्रदर्शनकारियों को नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आयोजकों ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि धरना स्थल के आस-पास जान-बूझकर बिजली और पानी की आपूर्ति में बाधाएं पैदा की जा रही हैं।

हालांकि, इस संबंध में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। लेकिन धरना स्थल पर मौजूद लोगों का मानना है कि यह एक प्रतिक्रियावादी कदम है, जिसका उद्देश्य उनका मनोबल तोड़ना है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि इन कठिन परिस्थितियों ने उनके जज्बे को कम नहीं किया है, बल्कि उनका आक्रोश और भड़क गया है।

शाम को ‘इंडिया अगेंस्ट पेपर लीक’ कैंडल लाइट मार्च

आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाने और देशभर के छात्रों से एकजुटता का संदेश देने के लिए आज सोमवार शाम 6 बजे एक विशाल कैंडल लाइट मार्च निकाला जाएगा। आयोजकों द्वारा जारी पोस्टर में “India Against Paper Leak” का नारा दिया गया है।

इस मार्च में केवल कॉकरोच जनता पार्टी के लोग ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में आम छात्र, उनके अभिभावक और विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होने वाले हैं। इस कैंडल मार्च के जरिए यह संदेश देश के गलियारों तक जाने वाला है कि छात्र अब अंधेरे में रहने वाला नहीं है। पोस्टर में एनटीए (NTA) को पूरी तरह से समाप्त करने की मांग को भी सबसे प्रमुखता से जगह दी गई है, क्योंकि छात्र एनटीए को पारदर्शिता का दावा करने वाली इस एजेंसी पर पूरी तरह से भरोसा उठा चुके हैं।

कोई समझौता नहीं, जवाबदेही जरूरी

धरना स्थल से लगातार यह संदेश साफ होता जा रहा है कि यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है, लेकिन मांगों को लेकर कोई भी समझौता या बीच का रास्ता नहीं निकलेगा।

कॉकरोच जनता पार्टी और उसके समर्थकों ने साफ तौर पर शर्त रखी है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं देते, जब तक पेपर लीक मामलों में शामिल राजनेताओं और अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होती, और जब तक शिक्षा व्यवस्था में जमीनी स्तर पर सुधार नहीं होता, तब तक जंतर-मंतर पर यह मशाल बुझने वाली नहीं है। अब देखना यह है कि कि सरकार इस उग्रतर छात्र आंदोलन के सामने कब झुकती है और क्या देश के भविष्य को लेकर ठोस कदम उठाती है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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