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चीन, जापान और इंडोनेशिया में भूकंप के तेज झटके, एक की मौत, चार घायल

चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के अनुसार, मंगलवार को किंगहाई प्रांत के हासी क्षेत्र में रिक्टर स्केल पर 6.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए।

चीन, जापान और इंडोनेशिया में भूकंप से दहशत

HIGHLIGHTS

  • 6.3 तीव्रता के भूकंप से चीन में मचा हड़कंप
  • चीन में भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक्स ने बढ़ाई चिंता
  • जापान और चीन में धरती कांपी, लोग घरों से निकले
  • इंडोनेशिया में 6.7 तीव्रता का भूकंप, लोग सड़कों पर
  • भूकंप से सहमा एशिया, चीन में एक की मौत

एशिया के कई देशों में मंगलवार को भूकंप के तेज झटकों ने लोगों में दहशत फैला दी। चीन, जापान और इंडोनेशिया में अलग-अलग स्थानों पर आए भूकंपों के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ। चीन के उत्तर-पश्चिमी प्रांत किंगहाई में आए 6.3 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। वहीं जापान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए, जबकि इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर 6.7 तीव्रता के भूकंप से लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

चीन में 6.3 तीव्रता का भूकंप

चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के अनुसार, मंगलवार को किंगहाई प्रांत के हासी क्षेत्र में रिक्टर स्केल पर 6.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि चार लोग घायल हुए हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

कई आफ्टरशॉक्स ने बढ़ाई चिंता

मुख्य भूकंप के बाद क्षेत्र में कई आफ्टरशॉक्स भी दर्ज किए गए। इनमें 4.9 तीव्रता का एक प्रमुख आफ्टरशॉक शामिल है। लगातार आने वाले झटकों के कारण स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स आना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन ये कमजोर संरचनाओं को अतिरिक्त नुकसान पहुंचा सकते हैं।

बचाव एवं राहत कार्य जारी

चीन भूकंप प्रशासन ने तत्काल इमरजेंसी रिस्पांस शुरू कर दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों और राहत एजेंसियों को प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया है। भूकंप का केंद्र ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके में होने के कारण राहत कार्यों में कुछ चुनौतियां सामने आ रही हैं।

एपिसेंटर के नजदीक स्थित कोयला खदानों से सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। राहत और बचाव दल लगातार क्षेत्र में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि जान-माल के नुकसान का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है।

जापान में भी महसूस किए गए झटके

मंगलवार को जापान के कुछ हिस्सों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं मिली है। जापान दुनिया के सबसे भूकंप प्रभावित देशों में से एक है और वहां भूकंप से निपटने के लिए अत्याधुनिक चेतावनी और सुरक्षा प्रणाली विकसित की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित होने के कारण जापान में अक्सर भूकंप आते रहते हैं। यहां की इमारतें भी विशेष रूप से भूकंप-रोधी तकनीक से बनाई जाती हैं ताकि नुकसान को कम किया जा सके।

इंडोनेशिया के सुलावेसी में 6.7 तीव्रता का भूकंप

उधर इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर भी मंगलवार को 6.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग अपने घरों, कार्यालयों और अन्य इमारतों से निकलकर सड़कों और खुले मैदानों में पहुंच गए।

सेंट्रल सुलावेसी प्रांत की राजधानी पालू और आसपास के इलाकों में कंपन काफी तेज महसूस किया गया। एहतियात के तौर पर कई अस्पतालों ने मरीजों को भवनों से बाहर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया। कई मरीजों को ड्रिप और मेडिकल उपकरणों के साथ खुले क्षेत्रों में रखा गया ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

2018 की त्रासदी की यादें हुईं ताजा

सुलावेसी का पालू शहर वर्ष 2018 में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी की त्रासदी को आज भी नहीं भूला है। उस समय हजारों लोगों की जान चली गई थी और भारी तबाही हुई थी। मंगलवार को आए भूकंप के बाद लोगों के मन में उसी भयावह घटना की यादें फिर से ताजा हो गईं। हालांकि फिलहाल सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है, लेकिन प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

आखिर क्यों आता है भूकंप?

भूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे होने वाली भूगर्भीय गतिविधियों का परिणाम होता है। पृथ्वी की बाहरी परत कई विशाल टेक्टोनिक प्लेट्स में विभाजित है। ये प्लेट्स लगातार धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटों के बीच अत्यधिक दबाव और घर्षण जमा हो जाता है तथा वे अचानक फिसलती हैं, तो भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। यही ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में पृथ्वी की सतह तक पहुंचती है और कंपन पैदा करती है, जिसे हम भूकंप कहते हैं। इसके अलावा ज्वालामुखी विस्फोट, खनन गतिविधियां, बड़े बांधों का निर्माण और भूमिगत विस्फोट जैसी मानवीय गतिविधियां भी छोटे भूकंपों का कारण बन सकती हैं।

भूकंप से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके लिए भूकंप-रोधी भवनों का निर्माण, आधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणाली, नियमित आपदा प्रबंधन अभ्यास और लोगों में जागरूकता बेहद जरूरी है। भूकंप आने की स्थिति में लोगों को घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर जाने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

Sandhya Samay News

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