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अमेरिका ने चाबहार पर बरसाए बम, ईरान ने किया बड़ा पलटवार

आज गुरुवार को हुए हमलों के दौरान चाबहार शहर में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, हमले के बाद शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई और बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट की स्थिति बन गई।

ईरान पर अमेरिकी हमला, कुवैत-बहरीन में गूंजे मिसाइल हमले लगातार

HIGHLIGHTS

  • भारत के चाबहार पोर्ट पर हमला, बढ़ा युद्ध का सबसे बड़ा खतरा
  • ट्रंप का बड़ा एक्शन, ईरान के 90 ठिकाने तबाह करने का दावा
  • चाबहार धमाकों से हड़कंप, ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
  • अमेरिका-ईरान जंग तेज, चाबहार हमले से भारत भी चिंतित दिखाई दिया
  • ईरान पर अमेरिकी बमबारी, ट्रंप बोले अब और भीषण जवाब मिलेगा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव एक बार फिर वैश्विक चिंता का कारण बन गया है। हाल के घटनाक्रमों ने दोनों देशों के रिश्तों को बेहद नाजुक स्थिति में पहुंचा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में घोषित युद्धविराम को समाप्त मानने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें सबसे प्रमुख हमला ईरान के दक्षिण-पूर्व में स्थित चाबहार पोर्ट पर बताया जा रहा है, जिसे भारत के लिए भी रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

हमले के बाद मचा हड़कंप

आज गुरुवार को हुए हमलों के दौरान चाबहार शहर में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, हमले के बाद शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई और बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि विस्फोटों के बाद सुरक्षा एजेंसियों और राहत दलों की गाड़ियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों की ओर जाती दिखाई दीं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक अप्रैल में युद्धविराम लागू होने के बाद यह पहली बार है जब चाबहार पोर्ट को सीधे निशाना बनाया गया है। इसके अलावा ईरान के गोलेस्तान प्रांत में स्थित अक टेकेह खान रेलवे ब्रिज पर भी मिसाइल हमले की खबर सामने आई है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

अमेरिका का दावा- 90 से ज्यादा ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि ताजा सैन्य अभियान के दौरान ईरान के लगभग 90 सैन्य और सामरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका के अनुसार इन हमलों का मुख्य उद्देश्य उन सैन्य ढांचों को नष्ट करना था जिनका इस्तेमाल ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में कर रहा था।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हमले में जहाज घाट, समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल टावर और आसपास मौजूद सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। हालांकि अमेरिका ने दावा किया है कि नागरिक बंदरगाह और ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचाने से बचने की कोशिश की गई।

आखिर अमेरिका ने क्यों की यह सैन्य कार्रवाई?

अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन कार्गो जहाजों पर हुए हमले के जवाब में की गई है। वाशिंगटन ने इस घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान लगातार इस अहम समुद्री मार्ग में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में बाधा डालना जारी रखा तो अमेरिका पहले से कहीं अधिक कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। ताजा हमले को उसी चेतावनी का हिस्सा माना जा रहा है।

ट्रंप का सख्त संदेश

एयर फोर्स वन में मीडियां से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने दावा किया कि हर बार यदि ईरान अमेरिका पर हमला करेगा तो जवाब उससे कई गुना ज्यादा ताकतवर होगा।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सैन्य दृष्टि से मजबूत स्थिति में है और जरूरत पड़ने पर संघर्ष को बहुत कम समय में समाप्त कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान किसी संभावित समझौते का पूरी तरह पालन करेगा। उनके इस बयान ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईरान का पलटवार, कुवैत और बहरीन बने निशाना

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। लगातार दूसरे दिन हुई इन घटनाओं के बाद कुवैत में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।

कुवैती सेना ने बताया कि देश का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय है और कई इलाकों में लोगों को सतर्क करने के लिए सायरन बजाए गए। प्रशासन ने संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है।

ईरान के संसद अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिका को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब तक यह नहीं समझ पाया है कि दबाव की राजनीति और किए गए वादों से पीछे हटने की कीमत चुकानी पड़ती है। उनके बयान से साफ संकेत मिलता है कि तेहरान फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है।

भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार पोर्ट?

चाबहार पोर्ट केवल ईरान के लिए ही नहीं बल्कि भारत की विदेश नीति और व्यापारिक रणनीति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण परियोजना है। सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित यह ईरान का एकमात्र डीप-वॉटर पोर्ट है, जहां से सीधे हिंद महासागर तक पहुंच बनाई जा सकती है।

भारत ने इस बंदरगाह के विकास में लंबे समय से निवेश किया है क्योंकि इसके जरिए पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक सामान पहुंचाना संभव होता है। यही नहीं, चाबहार पोर्ट भारत को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से भी जोड़ता है, जिससे यूरेशियाई देशों के साथ व्यापार तेज और सस्ता हो सकता है।

रणनीतिक दृष्टि से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। चाबहार पोर्ट पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से करीब 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्वादर का विकास चीन कर रहा है और इसे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में चाबहार भारत के लिए क्षेत्रीय संतुलन बनाने वाली महत्वपूर्ण परियोजना बन जाती है।

Sandhya Samay News

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