ईरान-यूएस के बीच जारी तनाव ने फिर से युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। हाल के घटनाक्रम में ईरान ने अपने सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमला किया है, तो वहीं अमेरिका ने भी प्रतिक्रिया देते हुए अपने कई ठिकानों को निशाना बनाया है। इस संघर्ष का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य रहा, जहां पहले ही जहाज पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने हमला किया था। इस हमले के बाद से ही क्षेत्र में युद्ध का खतरा मंडरा रहा है, जो पूरे खाड़ी क्षेत्र के देशों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
ईरान का हमला और उसकी प्रतिक्रिया
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया। आरोप है कि IRGC ने साइप्रस के झंडे वाले इस जहाज पर मिसाइलें दागीं, जिससे जहाज में आग लग गई और इंजन रूम बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना के कारण जहाज समुद्र में फंस गया और क्रू मेंबर लापता हो गए। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने बाद में बताया कि जहाज को समुद्र में छोड़ दिया गया है, जबकि सभी बचे क्रू को सुरक्षित निकाल लिया गया है। अमेरिका का आरोप है कि IRGC ने इस हमले का मकसद समुद्री मार्ग को खतरे में डालना था और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को खतरे में डालना था।

इसके तुरंत बाद, ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। IRGC ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस सहित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह हमला मुख्य रूप से कमांड और कंट्रोल सेंटर, MQ-9 ड्रोन हैंगर, और अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किया गया। इस हमले का उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को कमजोर करना था। इसके अलावा, ईरान ने UAE, कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान जैसे देशों को भी निशाना बनाया है। इन देशों में एयर डिफेंस सिस्टम ने मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट किया, और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए।
क्षेत्र में फैलता युद्ध का खतरा
यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच ही सीमित नहीं रहा। इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव फैल गया है। UAE, कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान ने अपने सुरक्षा स्तर को बढ़ा दिया है। बहरीन में हवाई सायरन बजाए गए और नागरिकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। कतर ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। इन घटनाओं ने क्षेत्र के देशों में युद्ध का खतरा बढ़ा दिया है, और सभी देश अपने-अपने सैन्य बलों को सतर्क कर चुके हैं।
अमेरिकी सेना का कहना है कि पिछले तीन दिनों में, ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इनमें मिसाइल और ड्रोन बेस, नौसैनिक अड्डे, हथियार भंडार और संचार नेटवर्क शामिल हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि इस कार्रवाई का मकसद ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना और क्षेत्र में अस्थिरता को कम करना है। इस अभियान के तहत, 140 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में ईरान के जास्क शहर, बुशेहर प्रांत के बंदर-ए-देयर, असालुयेह और कंगान जैसे इलाकों में विस्फोट हुए हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, इन घटनाओं में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।





















