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भारत के कुछ खास गांव जहां नहीं है बिजली का बिल, जानिए क्यों

देश का एक और गांव, जिसे अक्सर भारत के सबसे अमीर गांवों में शुमार किया जाता है, ने सिर्फ सोलर टेक्नोलॉजी पर निर्भर होने के बजाय प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर काम किया है। इस गांव की सफलता का मूल मंत्र 'कुशल जल प्रबंधन' है।

भारत के इन गांवों में नहीं आता बिजली का बिल, वजह जानकर रह जाएंगे दंग

HIGHLIGHTS

  • स्मार्ट ग्रिड और सोलर पावर से गांवों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता
  • गुजरात का मोढेरा: दुनिया का पहला 24/7 सोलर संचालित गांव
  • बैटरी स्टोरेज और स्मार्ट मीटर से ऊर्जा की पारदर्शिता
  • जल संरक्षण और ऊर्जा बचत: ग्रामीण भारत का नई दिशा में कदम
  • महाराष्ट्र का मान्याचीवाड़ी: पहला पूर्ण सोलर पावर गांव

Zero Electricity Bill Villages: जब देश के बड़े शहरों में बिजली के बढ़ते बिल और पावर कट की समस्या से लोग परेशान हैं, तब भारत के कुछ गांवों ने ऐसा कर दिखाया है जो हर किसी के लिए एक मिसाल बन सकता है। ये गांव अब बिजली विभाग के मासिक बिल के चक्कर में नहीं पड़ते। एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, स्मार्ट ग्रिड और सोलर पावर के इस्तेमाल से इन गांवों ने ऊर्जा के क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है।

आइए जानते हैं ऐसे ही चुनिंदा गांवों के बारे में, जहां ‘जीरो बिजली बिल’ की वजह से जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

गुजरात का मोढेरा: दुनिया का पहला 24 घंटे सोलर संचालित गांव

गुजरात का मोढेरा गांव (Modhera Village) आज दुनिया के मानचित्र पर उस वजह से भी चर्चित है, जहां यह देश का पहला ऐसा गांव है जो 24 घंटे सूर्य की ऊर्जा से चलता है। यहां ‘जीरो बिजली बिल’ मॉडल को सिर्फ छतों पर सोलर पैनल लगाकर हासिल नहीं किया गया, बल्कि इसके लिए एक बड़े और मजबूत तंत्र का निर्माण किया गया है।

तीन स्तरीय ऊर्जा व्यवस्था

मोढेरा से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित सुज्जनपुर में, 12 हेक्टेयर जमीन पर 6 मेगावाट क्षमता का एक विशाल ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्लांट लगाया गया है। यह प्लांट दिन के समय गांव की अधिकांश बिजली की जरूरतों को पूरा करता है। लेकिन असली खेल रात में देखने को मिलता है।

बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम

इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसमें 15 मेगावाट का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) शामिल है। यह दिन के दौरान पैदा हुई अतिरिक्त सोलर ऊर्जा को स्टोर कर लेता है। सूरज डूबने के बाद गांव की आपूर्ति इनी बैटरियों से होती है, जिससे बिजली की आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं आती और लोगों को बिल की चिंता भी नहीं रहती।

स्मार्ट मीटर और पारदर्शिता

गांव के 1,600 से अधिक घरों में पारंपरिक मीटरों की जगह डिजिटल स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। ये मीटर यह ट्रैक करते हैं कि किस घर ने कितनी बिजली खर्च की और छत पर लगे सोलर पैनलों से कितनी अतिरिक्त ऊर्जा वापस ग्रिड को भेजी गई। इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 65 करोड़ रुपये का खर्च आया, जिसे भारत सरकार और गुजरात सरकार ने 50:50 के अनुपात में साझा करके वित्त पोषित किया था।

जल संरक्षण और ऊर्जा बचत का अनूठा मॉडल

देश का एक और गांव, जिसे अक्सर भारत के सबसे अमीर गांवों में शुमार किया जाता है, ने सिर्फ सोलर टेक्नोलॉजी पर निर्भर होने के बजाय प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर काम किया है। इस गांव की सफलता का मूल मंत्र ‘कुशल जल प्रबंधन’ है।

यहां गन्ने जैसी ज्यादा पानी खपत करने वाली फसलों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई। इसका सीधा असर सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली की खपत पर पड़ा। कम पानी की वजह से सिंचाई पंपों का उपयोग कम हुआ, जिससे बिजली की बचत हुई और गांव ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया।

महाराष्ट्र का मान्याचीवाड़ी: पहला पूर्ण सोलर पावर गांव

गुजरात के बाद अब महाराष्ट्र भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सतारा जिले के मान्याचीवाड़ी गांव को महाराष्ट्र का पहला पूरी तरह से सोलर पावर से चलने वाला गांव बनाया गया है। यहां के किसानों और घरों को अब या तो बहुत कम बिजली बिल आता है या फिर बिल्कुल भी नहीं आता। सोलर ऊर्जा के इस सफल मॉडल ने यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है।

मोढेरा, मान्याचीवाड़ी और जल संरक्षण पर आधारित अन्य गांवों की सफलता ने साबित कर दिया है कि नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) ग्रामीण भारत के विकास का मुख्य स्तंभ बन सकती है। इन पहलों से प्रेरित होकर अब देश के कई अन्य राज्य भी अपने-अपने स्तर पर सोलर पावर गांव विकसित करने की योजना बना रहे हैं, ताकि बिजली की बढ़ती कीमतों से किसान और आम जनता को राहत मिल सके।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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