Uncover the secret behind counterfeit liquor: बाजार में आज हर चीज की नकल हो रही है, और शराब इससे अछूती नहीं है। देश के कई हिस्सों में समय-समय पर होने वाली हूटच ट्रेजेडी (जहरीली शराब कांड) इस बात की गवाह हैं कि मिलावटी शराब कितनी जानलेवा साबित हो सकती है। फर्जी शराब में मेथनॉल और इंडस्ट्रियल सॉल्वेंट जैसे घातक केमिकल मिलाए जाते हैं, जो सिर्फ स्वास्थ्य को नुकसान ही नहीं पहुंचाते, बल्कि किसी की जान भी ले सकते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि असली और नकली शराब में फर्क कैसे पहचाना जाए।
नकली शराब क्यों है इतनी खतरनाक?
बेईमान विक्रेता कई तरीकों से ग्राहकों को चूना लगाते हैं। कोई असली बोतल में मिलावटी शराब भर देता है, कोई पानी या घटिया लिक्विड मिलाकर शराब पतली कर देता है, तो कई लोग मेथनॉल जैसा जहरीला पदार्थ तक इस्तेमाल कर देते हैं। मेथनॉल सेवन करने से अंधापन, किडनी फेल और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। इसलिए खरीदने से पहले ही बोतल की हर बात की जांच कर लेना समझदारी है।
क्यूआर कोड और एक्साइज स्टैंप से करें वेरिफाई
अब बड़े ब्रांड्स की शराब की बोतलों पर एक्साइज क्यूआर कोड या बारकोड लगाया जा रहा है। इस कोड को स्कैन करने से बोतल की कीमत (एमआरपी), डिस्टिलरी का नाम और स्टॉक से जुड़ी जानकारी मिलती है। इसे संबंधित राज्य की सरकारी एप्लीकेशन से स्कैन करें। अगर कोड काम नहीं कर रहा है या स्क्रीन पर दिख रही जानकारी बोतल से मेल नहीं खाती, तो समझ जाएं कि कुछ गड़बड़ है।
बुलबुलों और रंग से पहचानें असली शराब
सीलबंद बोतल को अच्छे से हिलाएं और उसमें बनने वाले बुलबुलों पर नजर रखें। असली शराब में छोटे-छोटे बुलबुले बनते हैं, जो कुछ ही सेकंड में गायब हो जाते हैं। वहीं, अगर बोतल में बहुत ज्यादा झाग बन रहा है या लिक्विड में धुंधलापन नजर आ रहा है, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है।
इसी तरह बोतल को साफ रोशनी के सामने रखकर लिक्विड को ध्यान से देखें। साफ शराब पारदर्शी होनी चाहिए। अगर तलछट बैठी दिखे, कोई कण तैर रहा हो या रंग असामान्य लगे, तो बोतल के साथ छेड़छाड़ हो सकती है।
सील, ढक्कन और पैकेजिंग का बारीकी से निरीक्षण करें
फैक्ट्री से निकली हर बोतल का ढक्कन और सील बिल्कुल सही और मजबूत होता है। ढीली सील, टेढ़ा-मेढ़ा ढक्कन, गोंद के निशान या बोतल पहले खोले जाने के किसी भी सबूत को हल्के में न लें। यह सीधे छेड़छाड़ के संकेत होते हैं।
साथ ही दुकान पर मौजूद उसी ब्रांड और साइज की दूसरी बोतल से तुलना भी कर लें। अगर दोनों बोतलों में लिक्विड का लेवल काफी अलग है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि बोतल पहले खोली गई थी और दोबारा भरकर सील कर दी गई।
लेबल और प्रिंटिंग में छिपा होता है बड़ा संकेत
असली ब्रांड हमेशा प्रीमियम क्वालिटी की प्रिंटिंग और एक जैसी पैकेजिंग का इस्तेमाल करते हैं। अगर लेबल पर स्पेलिंग की गलती दिखे, अक्षर धुंधले हों, फोंट अजीब लगे, लेबल टेढ़ा चिपका हो या प्रिंटिंग की क्वालिटी खराब हो, तो यह नकली पैकेजिंग की चेतावनी है। बैच नंबर और मैन्युफैक्चरिंग डेट भी जरूर चेक करें।
स्वाद और गंध पर भरोसा न करें
कई लोग यह मानते हैं कि स्वाद या गंध से नकली शराब पहचान ली जाएगी, लेकिन यह गलतफहमी जानलेवा साबित हो सकती है। मेथनॉल पानी की तरह रंगहीन और गंधहीन होता है, इसलिए स्वाद या सूंघकर उसे पहचानना लगभग असंभव है। इसलिए शराब को टेस्ट करने के बजाय बोतल की जांच-पड़ताल पर भरोसा करें।
सस्ती कीमत से सावधान
अगर कोई महंगे ब्रांड की शराब बहुत कम कीमत पर या अविश्वसनीय छूट के साथ दे रहा है, तो तुरंत शक करना ही ठीक है। नकली शराब बेचने वाले ग्राहक को आकर्षित करने के लिए यही लुभावनी ऑफर देते हैं, ताकि वह पैकेजिंग या क्वालिटी में अंतर को नजरअंदाज कर दे। याद रखें, सही दाम से बहुत कम कीमत पर मिलने वाली शराब हमेशा संदिग्ध होती है।
सही जगह से ही करें खरीदारी
शराब हमेशा लाइसेंसी और सरकारी दुकान से ही खरीदें। सड़क किनारे या बिना लाइसेंस वाली दुकानों से खरीदी गई शराब की क्वालिटी की कोई गारंटी नहीं होती। बिल लेना न भूलें, क्योंकि बिल ही आपको शिकायत दर्ज कराने का हक देता है।
नकली शराब पीने के बाद दिखने वाले लक्षण
अगर शराब पीने के बाद उल्टी, सिरदर्द, चक्कर आना, पेट दर्द, धुंधला दिखना या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण महसूस हों, तो इन्हें सामान्य नशा समझकर नजरअंदाज न करें। यह मेथनॉल जहर के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और नजदीकी अस्पताल जाएं। समय रहते इलाज मिलने से जान बचाई जा सकती है।

























