Greater Noida News: देश में बढ़ती महंगाई, बेकाबू बेरोजगारी और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ आम जनता का गुस्सा सड़कों पर उतरता दिख रहा है। इसी क्रम में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के गौतमबुद्ध नगर जिला कमेटी के नेतृत्व में आज सूरजपुर स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पर एक जोरदार धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस धरने में सैकड़ों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, महिलाएं, किसान और युवा शामिल हुए, जिन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
महंगाई अब गहरा सामाजिक संकट बन चुकी है
धरने को संबोधित करते हुए सीपीआई (एम) दिल्ली एनसीआर राज्य सचिव कॉमरेड अनुराग सक्सैना ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि पिछले 15 दिनों के दौरान पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में जिस तरह की बेतहाशा वृद्धि हुई है, उसने आम आदमी का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। ईंधन की महंगाई का सीधा असर दूध, सब्जी, दाल, जीवनरक्षक दवाइयों और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों पर पड़ रहा है। अब महंगाई सिर्फ एक आर्थिक समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह एक गहरा सामाजिक संकट बन चुकी है, जो परिवारों की चार पीढ़ियों को निगल रही है।
कॉरपोरेटों को लूट और जनता को भटकाने की राजनीति
पार्टी के सचिव मंडल सदस्य कॉमरेड बृजेश कुमार और राज्य कमेटी सदस्य कॉमरेड गंगेश्वर दत्त शर्मा ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए और उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया कि मौजूदा सरकारें देश की सार्वजनिक संपत्तियों—जैसे रेलवे, बैंक, बिजली, पानी और खनिजों को मोटी रकम कमाने के लिए चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों की जेब में डाल रही हैं। इस लूट को छिपाने के लिए जनता को सांप्रदायिकता, जातिवाद और ध्रुवीकरण के नाम पर भटकाया जा रहा है।
एनसीआर में मजदूरों के साथ अन्याय
गौतमबुद्ध नगर पार्टी सचिव कॉमरेड रामसागर ने एनसीआर के आर्थिक परिदृश्य पर प्रकाश डाला और उन्होंने कहा कि गौतमबुद्ध नगर जैसे औद्योगिक जिले में अकुशल मजदूर को मात्र 13,690 रुपये मिलते हैं, जबकि सटे दिल्ली में यह राशि 18,456 रुपये है। उन्होंने कहा कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों में जहां किराया और रहन-सहन दिल्ली से भी ज्यादा महंगा है, वहां इतनी कम मजदूरी से परिवार का पेट नहीं भर सकता। पार्टी ने एनसीआर में न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने की पुख्ता मांग उठाई।
ज्ञापन की प्रमुख 11 सूत्रीय मांगें
जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित मुख्य मांगें शामिल थीं:
- ईंधन पर कर में कटौती: पेट्रोल, डीजल और सीएनजी पर लगे अत्यधिक करों (एक्साइज ड्यूटी और वैट) में तत्काल भारी कटौती की जाए।
- जरूरी वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित करें: दाल, खाद्य तेल, रसोई गैस और जीवनरक्षक दवाइयों सहित सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर सख्ती से नियंत्रण किया जाए।
- सार्वभौमिक PDS: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को सार्वभौमिक बनाया जाए और राशन में सिर्फ अनाज नहीं, बल्कि दाल, चीनी और खाद्य तेल को भी शामिल किया जाए।
- रोजगार की गारंटी: सभी सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। मनरेगा का दायरा बढ़ाया जाए और शहरी गरीबों के लिए ‘शहरी रोजगार गारंटी योजना’ लागू की जाए।
- न्यूनतम मजदूरी 26,000: पूरे एनसीआर (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना नगर) में न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित की जाए।
- आवास का अधिकार: मजदूरों और गरीबों के लिए सम्मानजनक आवास की व्यवस्था की जाए और बिना वैकल्पिक पुनर्वास के किसी भी बस्ती को उजाड़ने की कार्रवाई तुरंत बंद की जाए।
- किसानों का हक: भूमि अधिग्रहण में किसानों को 10% विकसित भूखंड दिया जाए और नए कानून के तहत चार गुना मुआवजा देना सुनिश्चित किया जाए।
- नगर निगम का गठन: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जनता के चुनावित प्रतिनिधियों वाले नगर निगम का गठन कर स्थानीय स्वशासन को मजबूत किया जाए।
- सार्वजनिक निवेश बढ़ाएं: कृषि और सार्वजनिक उद्योगों में सरकारी निवेश बढ़ाकर आम जनता की क्रय शक्ति को बढ़ाया जाए।
देश का युवा और श्रमिक वर्ग शांत नहीं बैठेगा
धरना स्थल पर नेताओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी और कहा कि सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि केवल नारों से महंगाई और बेरोजगारी खत्म नहीं होने वाली। जब तक आम जनता की आय नहीं बढ़ेगी और रोजगार का सृजन नहीं होगा, तब तक इस देश का युवा और श्रमिक वर्ग शांत नहीं बैठेगा।”
नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस 11 सूत्रीय ज्ञापन पर जल्द से जल्द और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो CPI(M) और उसके अनुसारी संगठन जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक चरणबद्ध और तेज आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार पर होगी। धरना पूरे शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और बाद में ज्ञापन आधिकारिक रूप से जिला प्रशासन को हस्तांतरित कर दिया गया।






















