Shiv Sena (UBT) MP Arvind Sawant: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही यहां के चढ़ावा (दान) को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। अब इस मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है और देशभर में जबरदस्त सियासत देखने को मिल रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद से मामला और गरमा गया है। इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने जांच एजेंसियों और न्यायपालिका पर तीखा हमला बोलते हुए विवादित बयान दिया है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
न्यायपालिका पर सावंत का बड़ा हमला
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद अरविंद सावंत ने इस मामले में केंद्र सरकार और जांच व्यवस्था पर निशाना साधा है। मीडिया से बातचीत के दौरान सावंत ने सीधे सुप्रीम कोर्ट पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस न्यायपालिका से संविधान की रक्षा की उम्मीद की जाती है, वह अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही है। देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि मौजूदा सरकार में न्यायपालिका गुलाम बनी हुई है।
सावंत ने आगे कहा कि संविधान की रक्षा कौन कर सकता है? न्यायपालिका, लेकिन क्या वह अपना काम करती है? वे जज गुलामों की तरह बैठे हैं। उनके इस बयान से सियासी गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि न्यायपालिका पर इस तरह का सीधा आरोप लगाना आमतौर पर अनुच्छेद 2 (c) के दायरे में माना जाता है।
एसआईटी की जांच पर उठाया सवाल
यूपी सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) की विश्वसनीयता पर भी अरविंद सावंत ने सवालिया निशान लगाए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि क्या आपको इन SIT पर भरोसा है? SIT वही तय करेगी जो उन्हें इशारा किया जाएगा और बताया जाएगा।
भाजपा पर निशाना साधते हुए सावंत ने बेहद चुभावनी बयान दिया। उन्होंने कहा कि अच्छा हुआ कि रामलला ने न्याय किया। वे ‘जय श्री राम’ कहते हैं और भ्रष्टाचार करते हैं, लेकिन उन्होंने रामलला ने उनके मुंह पर तमाचा मारा है। सावंत का इशारा साफ था कि जिन लोगों ने राम नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया, उन्हें चोरी के मामले में बेनकाब होना पड़ रहा है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा
बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम ने तब तूल पकड़ा, जब शुक्रवार (26 जून) को श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राम मंदिर के लिए आए भक्तों के दान में कथित गड़बड़ी और हेराफेरी की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह कदम उठाया। ट्रस्ट के दो सबसे शक्तिशाली लोगों के इस्तीफे ने योगी सरकार को भी एक्शन लेने के लिए मजबूर कर दिया।
एफआईआर में शामिल नाम और लगे गंभीर धाराएं
इस्तीफे के बाद अयोध्या पुलिस ने तेजी दिखाई और राम मंदिर को मिले दान में कथित हेराफेरी के मामले में एफआईआर दर्ज की गई। यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के निर्देश पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
दरअसल, यह सब कुछ तब सामने आया जब अयोध्या से समाजवादी पार्टी (SP) के पूर्व विधायक पवन पांडे ने ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए। पवन पांडे ने दावा किया कि राम मंदिर के दान में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है और चढ़ावे की चोरी हुई है। उनके आरोपों के बाद मामला तूल पकड़ता गया।

विपक्ष के लगातार हमलों के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 14 जून को योगी सरकार से इस कथित गड़बड़ी की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी के गठन का आग्रह किया था, जिसे सरकार ने मंजूर कर लिया था।






















