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दिल्लीवासियों को झटका: बिजली दरों में बढ़ोतरी, जानिए किस पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

Delhi News: दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने राजधानी की बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) को उपभोक्ताओं से अधिक ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार (FPPAS) वसूलने की अनुमति दे दी है। आयोग ने अप्रैल 2026 के लिए मासिक PPAC शुल्क 16% से 18% तक लगाने की मंजूरी दी है।

बिजली दरों में बढ़ोतरी का ऐलान, किन उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत और किसे लगेगा झटका

HIGHLIGHTS

  • दिल्ली में बिजली महंगी
  • बिजली बिल पर बड़ा झटका
  • DERC ने बढ़ाईं बिजली दरें
  • 500 यूनिट वालों पर बढ़ा बोझ
  • दिल्ली में बढ़ेगा बिजली बिल

Delhi Electricity News: दिल्ली की राजधानी में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। अगर आप दिल्ली में रहते हैं और आपका बिजली का बिल अक्सर 500 यूनिट से ऊपर चला जाता है, तो अब आपको अपनी जेब ढीली करनी होगी। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने बिजली कंपनियों की मांग को मंजूरी देते हुए बिजली दरों में इजाफा कर दिया है। यह वृद्धि सीधे तौर पर ‘फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज’ (FPPAS) यानी ईंधन और बिजली खरीद समायोजन शुल्क में की गई है।

इस फैसले के बाद दिल्ली में बिजली की दरों में 1% से लेकर 3.30% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ने वाला है जो बिजली सब्सिडी का लाभ नहीं लेते हैं या फिर जिनकी खपत बहुत अधिक है। आइए, विस्तार से समझते हैं कि यह फैसला आम आदमी पर क्या असर डालेगा और आखिर ऐसा क्यों किया गया है।

FPPAS में बढ़ोतरी का क्या मतलब है?

दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने राजधानी की बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) को उपभोक्ताओं से अधिक ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार (FPPAS) वसूलने की अनुमति दे दी है। आयोग ने अप्रैल 2026 के लिए मासिक PPAC शुल्क 16% से 18% तक लगाने की मंजूरी दी है। यह शुल्क बिजली कंपनियों द्वारा बिजली उत्पादन के लिए खरीदे जाने वाले कोयले, गैस या बिजली की बदलती कीमतों को कवर करने के लिए लगाया जाता है।

जब कोयला या अन्य ईंधन महंगा हो जाता है, तो बिजली पैदा करने की लागत बढ़ जाती है। इस बढ़ी हुई लागत का बोझ बिजली कंपनियां सीधे उपभोक्ताओं पर FPPAS के जरिए डालती हैं। इस बार यह शुल्क इतना अधिक है कि इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के बिल पर 1% से 3.30% तक की वृद्धि के रूप में दिखाई देगा।

किन्हें मिलेगी राहत और किस पर पड़ेगा बोझ?

DERC के इस आदेश का सबसे अच्छा पहलू यह है कि दिल्ली की आम जनता, खासकर जो सीमित बिजली का उपयोग करती है, उन पर इसका कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा।

  1. सब्सिडी वाले उपभोक्ता: दिल्ली सरकार द्वारा चलाई जा रही सब्सिडी योजनाओं के तहत 0 से 200 यूनिट और 200 से 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले अधिकांश उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का कोई प्रभाव नहीं होगा। जो लोग पूरी सब्सिडी या 50% सब्सिडी का लाभ उठा रहे हैं, उनके बिल में कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा। सरकार उन्हें यह राहत पहले की तरह ही देती रहेगी।
  2. बड़े उपभोक्ता (500 यूनिट से अधिक): यह वृद्धि मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करेगी जो महीने में 500 यूनिट से ज्यादा बिजली का उपयोग करते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को अब अपने बिजली बिल में 1% से 3.30% तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
  3. गैर-सब्सिडी वाले और व्यावसायिक उपयोगकर्ता: इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर कमर्शियल, औद्योगिक और गैर-सब्सिडी वाले घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इन श्रेणियों को पहले से ही सब्सिडी का लाभ नहीं मिलता है और अब FPPAS में बढ़ोतरी के चलते उनके बिल में काफी इजाफा हो सकता है।

वैश्विक ऊर्जा संकट और महंगाई की मार

इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर बिगड़ते हालात हैं। पिछले कुछ समय से दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। कोयले और अन्य ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। बिजली कंपनियों के लिए बिजली खरीदना महंगा हो गया है, जिसका असर सीधे उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।

DERC ने अपने आदेश में कहा है कि वैश्विक तनाव के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट और बिजली खरीद लागत में वृद्धि के मद्देनजर यह कदम उठाना पड़ा है। बिजली कंपनियों को वितरण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए पर्याप्त फंड की जरूरत है, ताकि वे बाजार से महंगी बिजली खरीदकर आपूर्ति जारी रख सकें।

10% की सीमा (कैप) हटाने का असर

एक और महत्वपूर्ण कारण जो बिलों को और भारी कर सकता है, वह है बिजली कंपनियों पर लगे 10% सरचार्ज की सीमा (कैप) को हटा दिया गया है। पहले यह नियम था कि FPPAC या सरचार्ज एक निश्चित सीमा (10%) से ज्यादा नहीं बढ़ सकता है। लेकिन अब इस कैप को हटा दिया गया है।

इसका मतलब है कि अगर भविष्य में बिजली खरीदने की लागत और भी बढ़ती है, तो कंपनियां बिना किसी रुकावट के उस पूरी लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं। यह फैसला गैर-सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि अब उनके बिल में अचानक बड़ी वृद्धि होने की संभावना बनी रहेगी।

उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला उन उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा जो बिजली सब्सिडी योजना के दायरे में नहीं आते हैं। जिन लोगों ने सब्सिडी लेने के लिए आवेदन नहीं किया है या जो स्वेच्छा से सब्सिडी नहीं ले रहे हैं, उन्हें अपने बजट के अनुसार बिजली का उपयोग करने की जरूरत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा संरक्षण का समय आ गया है। दिल्ली के निवासियों को ऊर्जा कुशल उपकरणों का उपयोग करना चाहिए और बिजली की बर्बादी से बचना चाहिए। सरकार ने भले ही आम उपभोक्ताओं को राहत दी है, लेकिन बढ़ती महंगाई और ऊर्जा संकट को देखते हुए अगले कुछ महीनों में बिजली की दरों में और इजाफा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अंत में, जबकि सब्सिडी वाले वर्ग के लिए स्थिति स्थिर है, उच्च खपत वाले और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं को अपने आगामी बिजली बिलों में उछाल के लिए तैयार रहना होगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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