स्कूली हिजाब विवाद पर मायावती का बड़ा बयान

हिजाब विवाद पर बसपा मुखिया ने किसी भी तरह के उग्र रुख को अपनाने के बजाय एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि स्कूलों में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर या हिजाब जैसे जटिल मुद्दों को ज्यादा तूल देकर अदालतों तक ले जाने की जरूरत नहीं है।

महिलाओं की अस्मिता से खिलवाड़ बंद, हिजाब पर बोलीं मायावती

HIGHLIGHTS

  • हिजाब पर बाबा साहेब के संविधान का रास्ता दिखाएंगी मायावती
  • हाईकोर्ट के हिजाब फैसले के बाद अब मायावती ने उठाई आवाज
  • धर्म और हिजाब पर टिप्पणी बंद करें, चेतावनी दी मायावती
  • बदायूं प्रतिमा विवाद और हिजाब पर बसपा सुप्रीमो ने दी चुनौती

देशभर में शैक्षणिक संस्थानों में यूनिफॉर्म और हिजाब को लेकर जारी गतिरोध के बीच, इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा एक मुस्लिम छात्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया गया है, जिसमें उसने स्कूल की ड्रेस के साथ हिजाब पहनने की छूट मांगी थी। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में मतभेद तेज हो गए हैं। कुछ लोग इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, तो वहीं कुछ विपक्षी आवाजें इसे संवैधानिक अधिकारों पर हमला बता रही हैं। इसी बीच, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस मसले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

स्कूल और प्रशासन पर दिया जिम्मा

हिजाब विवाद पर बसपा मुखिया ने किसी भी तरह के उग्र रुख को अपनाने के बजाय एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि स्कूलों में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर या हिजाब जैसे जटिल मुद्दों को ज्यादा तूल देकर अदालतों तक ले जाने की जरूरत नहीं है। इसका समाधान स्थानीय स्तर पर ही निकाला जाना चाहिए। मायावती ने स्कूल प्रबंधन और जिले के शासन-प्रशासन से आग्रह किया है कि वे आपसी समझौते और सूझबूझ का परिचय देते हुए इस मामले को सुलझाएं।

उनका मानना है कि जब तक ऐसे मुद्दों को कानूनी विवाद का रूप नहीं दिया जाएगा, तब तक उनका राजनीतिकरण होना मुश्किल है। मायावती ने एक बार फिर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह के मामलों की आड़ लेकर संकीर्ण राजनीति करने वाले तत्वों को मौका नहीं मिलना चाहिए।

बाबा साहेब के संविधान का दिया हवाला

अपने बयान में मायावती ने संवैधानिक तवज्जों को आधार बनाया। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश को एक ऐसा धर्मनिरपेक्ष और समतामूलक संविधान दिया था, जो हर जाति और धर्म के व्यक्ति को समान अधिकार प्रदान करता है। इस संविधान के दायरे में हर नागरिक को अपनी धार्मिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों के अनुसार शांतिपूर्ण जीवन जीने की पूरी छूट है। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों से एक-दूसरे की आस्था और धार्मिक भावनाओं की पवित्रता का आपसी सम्मान करने की अपील की है।

महिलाओं की अस्मिता और टीका-टिप्पणी पर रोक

हिजाब मुद्दे पर बोलते हुए बसपा प्रमुख ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह मामला सीधे तौर पर महिलाओं की अस्मिता, सम्मान और आत्म-सम्मान से जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों में किसी भी तरह की असंवेदनशीलता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, नेताओं और आम जनमानस से स्पष्ट शब्दों में अपील की है कि किसी भी धर्म, धार्मिक ग्रंथ या प्रचलन से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बेवजह टीका-टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसी टिप्पणियां सामाजिक सद्भाव को खतरे में डालती हैं, जबकि इससे बचना देश और जनहित में है।

बदायूं में अंबेडकर प्रतिमा विवाद पर भी सक्रिम हुईं मायावती

हिजाब विवाद के साथ ही मायावती ने उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में उत्पन्न हुए एक अन्य संवेदनशील मामले पर भी अपनी चिंता व्यक्त की है। हाल ही में बदायूं में भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ और माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बसपा सुप्रीमो ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि इस तनाव को शांतिपूर्ण तरीके से और उचित माध्यम से निपटाया जाना चाहिए, ताकि कोई अनहोनी न हो।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now