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सत्ताधारी महायुति ने महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव में जीती सोलह सीटें

Maharashtra News: चुनावों में मतदाता जनप्रतिनिधि (सांसद, विधायक) नहीं, बल्कि जिला परिषद, पंचायत समिति और नगरपालिका निकायों के जनप्रतिनिधि होते हैं। इस जीत से साबित हुआ कि महाराष्ट्र के ग्रामीण और अर्ध-शहरी स्तर पर महायुति का संगठनात्मक ढांचा विपक्ष से कहीं अधिक मजबूत है।

महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव में विपक्ष को मिली सिर्फ एक सीट

HIGHLIGHTS

  • उद्धव गुट की शिवसेना को चुनावों में मिली शर्मनाक हार
  • शरद पवार गुट के एनसीपी उम्मीदवारों को भाजपा ने हराया
  • नासिक सीट पर बागी प्रत्याशी ने बिगाड़ा सत्तापक्ष का खेल
  • गोकुल गिते ने निर्दलीय बनकर जीती नासिक की एमएलसी सीट
  • भाजपा नेता गोकुल गिते को टिकट न मिलने पर बगावत

Maharashtra MLC Election Results 2026: महाराष्ट्र की सियासत में स्थानीय निकायों के माध्यम से होने वाले विधान परिषद (MLC) चुनावों के नतीजे आ चुके हैं और इन नतीजों ने राज्य के सियासी समीकरणों को एक बार फिर से साफ कर दिया है। कुल 17 सीटों वाले इस चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन ‘महायुति’ (भाजपा, शिवसेना-एकनाथ शिंदे गुट और एनसीपी-अजित पवार गुट) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 16 सीटों पर अपना कब्जा जमा लिया है।

वहीं, विपक्षी गठबंधन ‘महाविकास अघाड़ी’ (MVA) को सिर्फ एक सीट पर संतोष करना पड़ा है। हालांकि, महायुति की इस ऐतिहासिक जीत में नासिक सीट पर भाजपा के एक बागी नेता ने ऐसा खेल खेला, जिसने एकनाथ शिंदे गुट की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

महायुति का विजय रथ

इन चुनावों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि 17 में से 6 सीटों पर प्रत्याशियों को निर्विरोध चुन लिया गया। निर्विरोध चुनाव जीतने का मतलब साफ है कि विपक्षी दलों के पास उम्मीदवार खड़ा करने लायक वोटों की कमी थी और सत्तापक्ष की जमीनी स्थिति कितनी मजबूत थी। शेष 11 सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें से महायुति ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की।

यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन चुनावों में मतदाता जनप्रतिनिधि (सांसद, विधायक) नहीं, बल्कि जिला परिषद, पंचायत समिति और नगरपालिका निकायों के जनप्रतिनिधि होते हैं। इस जीत से साबित हुआ कि महाराष्ट्र के ग्रामीण और अर्ध-शहरी स्तर पर महायुति का संगठनात्मक ढांचा विपक्ष से कहीं अधिक मजबूत है।

सीट-वार विस्तृत जीत-हार का लेखाजोखा

बची हुई 10 सीटों पर महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच कांटे की टक्कर थी, लेकिन तयनाका कुछ और ही रहा। भाजपा ने अपनी पकड़ सबसे मजबूत दिखाई।

  • भाजपा का डमाडोल: भाजपा ने नांदेड़ में अमरनाथ राजुरकर के रूप में कांग्रेस के रामदास पाटिल को करारी शिकस्त दी। नागपुर उपचुनाव में डॉ. राजीव पोतदार ने कांग्रेस के अतुल लोंढे को पराजित किया। भंडारा-गोंदिया से अविनाश ब्राह्मणकर ने कांग्रेस समर्थित नरेश ईश्वरकर को हराया। इसके अलावा छत्रपति संभाजीनगर-जालना से सुहास शिरसाट, जलगांव से नंदकिशोर महाजन, सांगली-सतारा से धैर्यशील कदम, सोलापुर से राजेंद्र राउत, धाराशिव-लातूर-बीड से बसवराज पाटिल और अमरावती से प्रवीण पोटे ने भाजपा की झोली जीत भरी।
  • शिवसेना (शिंदे गुट) की पारी: परभणी-हिंगोली सीट से शिवसेना के सईद खान ने उद्धव गुट के डॉ. विवेक नावंदर को मात दी।
  • विपक्ष का बुरा हाल: इन चुनावों में कांग्रेस और शरद पवार गुट के एनसीपी को लगातार निराशा हाथ लगी। एनसीपी (शरद गुट) के अभयसिंह जगताप (सांगली) और वसंतराव देशमुख (सोलापुर) जैसे बड़े चेहरे भाजपा के सामने धराशायी हो गए। उद्धव गुट की शिवसेना भी अपना पुराना किला बचाने में नाकाम रही।

नासिक में भाजपा के बागी ने बिगाड़ा शिंदे का खेल

महायुति की इस शानदार जीत के बीच एकमात्र ऐसी सीट रही जहां सत्तापक्ष को करारी हार का सामना करना पड़ा— और वह थी नासिक। यहां की हार सिर्फ विपक्ष की जीत नहीं है, बल्कि यह महायुति के अंदरूनी घमासान और टिकट वितरण की खामियों को उजागर करती है।

नासिक सीट पर शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने अपने प्रत्याशी नरेंद्र दराडे को उतारा था। लेकिन, भाजपा के बागी नेता गोकुल गिते ने मैदान में कूदकर पूरा गणित बिगाड़ दिया। दरअसल, गोकुल गिते भाजपा के ही एक प्रभावशाली नेता हैं, लेकिन सीट शेयरिंग के तहत इस सीट पर भाजपा का टिकट शिवसेना (शिंदे) के खाते में गया। टिकट कटने से नाराज गोकुल गिते निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में उतर आए और अंततः जीत दर्ज करके सबको चौंका दिया।

ठाणे के होटल वाली रणनीति फेल

नासिक में हार को लेकर महायुति के लिए सबसे बड़ी शर्मनाक बात यह रही कि उसने अपने ही घरवालों पर भरोसा नहीं किया। चुनाव से पहले भाजपा और शिवसेना ने मिलकर एक अनोखी रणनीति बनाई। उन्हें डर था कि बागी उम्मीदवार गोकुल गिते उनके नगर सेवकों को खरीद या प्रभावित कर सकते हैं।

मतदान के दौरान जब ईवीएम में बटन दबने थे, तब तय हो गया था कि कई नगर सेवकों ने पार्टी लाइन से हटकर बागी प्रत्याशी गोकुल गिते के पक्ष में मतदान किया है। इस हार ने एकनाथ शिंदे कैंप को न सिर्फ झटका दिया है, बल्कि गठबंधन में टिकट वितरण को लेकर अंदरूनी कलह की आंच भी फैला दी है।

Sandhya Samay News

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