Re-NEET Exam Checking Row: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा के पेपर लीक और धांधली के बाद आयोजित की गई ‘री-नीट’ (Re-NEET) परीक्षा का विवाद अभी थमा नहीं है। जहां एक तरफ पेपर लीक को लेकर जांच एजेंसियों के निशाने पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) है, वहीं दूसरी तरफ अब परीक्षा केंद्रों पर महिला उम्मीदवारों के साथ कथित रूप से हुए अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार का मामला सामने आया है।
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक फीमेल कैंडिडेट से परीक्षा केंद्र पर उसके पीरियड्स के दौरान पैंट उतारकर सैनिटरी पैड की जांच करवाई गई। इस घटना ने शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है और सवाल उठाए हैं कि क्या परीक्षा की सुरक्षा के नाम पर छात्राओं की गरिमा की अनदेखी की जा रही है? आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
इंस्टाग्राम पोस्ट ने खोली एनटीए की पोल
यह मामला पश्चिम बंगाल की रहने वाली और Re-NEET परीक्षा देने वाली अभ्यर्थी ऋषिका पाल का है। ऋषिका ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट ‘hrishikaapal’ के जरिए एक लंबी पोस्ट लिखकर अपने साथ हुई इस जघन्यता को बयां किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें मालदा स्थित विभूतिभूषण हाई स्कूल में परीक्षा केंद्र बनाया गया था। जब वह सुरक्षा जांच के लिए गईं, तो वहां मौजूद एक महिला स्टाफ सदस्य ने उनसे एक बेहद अश्लील और निजी सवाल पूछा—”क्या आपको पीरियड्स हो रहे हैं?”
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जब ऋषिका ने इस सवाल का ‘हां’ में जवाब दिया, तो उन्हें उस महिला स्टाफ ने अपनी पैंट नीचे करने का निर्देश दिया, ताकि वह उनके सैनिटरी पैड को देखकर यह पुष्टि कर सके कि उसमें कोई चीट या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट तो नहीं छिपा है।
लाखों के भविष्य से ब्लैकमेल करके की गई जांच
अपने पोस्ट में ऋषिका पाल ने साफ शब्दों में लिखा है कि यह कोई सामान्य सुरक्षा जांच नहीं थी। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य का फैसला करने वाली इस परीक्षा में बैठने के लिए मुझे अपने शरीर के सबसे निजी हिस्से को दिखाने के लिए मजबूर किया गया। ऋषिका ने बताया कि उस वक्त उन्हें गहरा सदमा लगा और बेहद शर्मिंदगी महसूस हुई। उन्होंने अपनी बेबसी को यूं बयां किया कि मैं डरी हुई थी कि अगर मैंने इनके इस अनुचित आदेश का विरोध किया, तो मुझे परीक्षा हॉल में एंट्री ही नहीं दी जाएगी। मेरी एक साल की मेहनत और मेरा करियर बर्बाद हो सकता था, इसलिए मुझे झुकना पड़ा।
क्या यह एनटीए की आधिकारिक गाइडलाइन है?
ऋषिका ने एनटीए और परीक्षा प्रबंधन पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या महिला उम्मीदवारों के पीरियड्स की स्थिति की जांच करना और उन्हें कपड़े उतारने के लिए मजबूर करना NTA की आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा है? उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा जांच बेहद जरूरी है, लेकिन सुरक्षा और अपमान के बीच एक पतली सी रेखा होती है, जिसे यहां पूरी तरह से पार किया गया है। उन्होंने मांग की है कि परीक्षा अधिकारियों को निष्पक्षता सुनिश्चित करने और व्यक्तिगत गरिमा के सम्मान के बीच के अंतर को समझने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने चाहिए।
मालदा में ही नहीं, यह एक ‘पैटर्न’ है?
ऋषिका की इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ऋषिका अकेली नहीं थीं, जिसके साथ ऐसा हुआ है। कई अन्य महिला उम्मीदवारों ने भी कमेंट सेक्शन में अपने दर्द को साझा किया।
एक यूजर ने बताया कि पिछले साल (2023) मालदा के ही साहपुर हाई स्कूल केंद्र पर NEET देते समय उसके साथ भी यही हुआ था। उसने लिखा कि मुझे भी पीरियड्स हो रहे थे। जब मैंने हां कहा, तो महिला गार्ड ने मेरी पैंट के ऊपर से हाथ फेरकर पैड को महसूस किया और सामने से पीछे तक जांच की। ऋषिका ने भी पुष्टि की कि उन्होंने कई अलग-अलग केंद्रों पर परीक्षा देने वाली लड़कियों से बात की, लेकिन किसी अन्य केंद्र पर ऐसी घटिया जांच नहीं हुई। इससे साफ जाहिर होता है कि मालदा जिले के कुछ विशेष परीक्षा केंद्रों पर महिलाओं के साथ बदसलूकी और अमानवीय जांच की एक परंपरा चल रही है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और न ही संबंधित स्कूल प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने आया है। पहले से ही पेपर लीक के कलंक से घिरी NTA के लिए यह एक नया सिरदर्द बन गया है।
























