आस्था, दृढ़ संकल्प और समाज को सकारात्मक संदेश देने की सोच के साथ छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ के दो युवाओं ने एक अनोखी यात्रा की शुरुआत की है। भगवान तिरुपति बालाजी के दर्शन के उद्देश्य से रामनारायण केवट और दुर्गेश गिरी करीब 2200 किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा पर निकल पड़े हैं। खास बात यह है कि दोनों युवा यह कठिन सफर नंगे पांव पूरा करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
यह यात्रा केवल धार्मिक भावना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से दोनों युवा लोगों को पर्यावरण संरक्षण, साइकिल के उपयोग, शारीरिक स्वास्थ्य और बेहतर जीवनशैली अपनाने का संदेश भी दे रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग साइकिल को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान दें।
पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुआ यात्रा अभियान
यात्रा शुरू करने से पहले दोनों युवाओं ने मनेन्द्रगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने सिद्धबाबा धाम, श्रीराम मंदिर और हनुमान मंदिर में माथा टेककर भगवान का आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत की।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। लोगों ने दोनों यात्रियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उनके सफल, सुरक्षित एवं मंगलमय सफर की कामना की। लोगों ने युवाओं के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में इस तरह का संकल्प दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
रामनारायण केवट पहले भी कर चुके हैं धार्मिक यात्राएं
साइकिल यात्री रामनारायण केवट के लिए यह पहली लंबी यात्रा नहीं है। इससे पहले भी वे कई धार्मिक और सामाजिक उद्देश्य वाली यात्राएं पूरी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि फरवरी 2024 में उन्होंने मनेन्द्रगढ़ से अयोध्या तक पैदल यात्रा की थी, जिसे उन्होंने 19 दिनों में पूरा किया था।
इसके बाद वर्ष 2025 में उन्होंने बाबाधाम की साइकिल यात्रा कर अपनी आस्था और आत्मविश्वास का परिचय दिया। अब वे अपने साथी दुर्गेश गिरी के साथ तीसरी बड़ी धार्मिक यात्रा पर निकले हैं।
रामनारायण के अनुसार, तिरुपति बालाजी की यह यात्रा लगभग 27 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान वे कई प्रमुख स्थानों से गुजरते हुए भगवान वेंकटेश्वर के दरबार तक पहुंचेंगे।
रायगढ़, पुरी और मल्लिकार्जुन होते हुए पहुंचेंगे तिरुपति
दोनों यात्रियों ने अपनी यात्रा का मार्ग भी तय किया है। सफर के दौरान वे रायगढ़, पुरी और मल्लिकार्जुन जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थानों से होकर गुजरेंगे। लंबी दूरी, मौसम की कठिन परिस्थितियों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद दोनों युवाओं का उत्साह बरकरार है।
रामनारायण केवट ने बताया कि इस यात्रा के पीछे उनका उद्देश्य केवल भगवान के दर्शन करना नहीं है, बल्कि समाज में एक अच्छा संदेश पहुंचाना भी है। उनका कहना है कि साइकिल चलाने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है और इससे प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति भी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने साइकिल यात्रा को जनजागरूकता अभियान का रूप दिया है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही यात्रा
मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र के लोगों में दोनों युवाओं की इस पहल को लेकर काफी उत्साह है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आज के दौर में जब अधिकांश लोग छोटी दूरी के लिए भी वाहनों पर निर्भर हो गए हैं, ऐसे समय में हजारों किलोमीटर की साइकिल यात्रा करना साहस और इच्छाशक्ति का उदाहरण है।
लोगों का मानना है कि रामनारायण और दुर्गेश की यह यात्रा युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी। इससे न केवल धार्मिक आस्था मजबूत होगी, बल्कि नशामुक्ति, स्वास्थ्य जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर भी लोगों का ध्यान जाएगा।
























