UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगि आदित्यनाथ का एक बयान गोरखपुर की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में गर्ल्स हॉस्टल की आधारशिला रखते समय एक ऐसा संकेत दिया, जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में हलचल मची हुई है। सीएम योगी ने कार्यक्रम के दौरान मौजूद सांसद रवि किशन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में गोरखपुर सीट से कोई महिला उम्मीदवार हो सकती है।
क्या कहा CM योगी ने?
बता दें कि अपने इस बयान के जरिए सीएम योगी ने संकेत दिया कि अगर गोरखपुर सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई, तो मौजूदा सांसद रवि किशन को छुट्टी मिल सकती है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि लोग अब रवि किशन से छुटकारा चाहते हैं। हालांकि, योगी और रवि किशन के बीच अक्सर मंच पर हंसी-मजाक देखने को मिलता है, लेकिन इस बार दिए गए इस ‘मजाक’ को सियासी घटाकों गंभीरता से ले रहे हैं।
संकेत है या सिर्फ मजाक?
सियासत के जानकार मानते हैं कि राजनीति में ऐसे बयान अक्सर बड़े संदेश देते हैं। रवि किशन लगातार दो बार से बीजेपी को गोरखपुर से जिता चुके हैं, लेकिन 2024 के चुनाव में उनके जीत के मार्जिन में काफी कमी आई है। 2019 में जहां उन्होंने करीब 3 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी, वहीं 2024 में यह अंतर घटकर सिर्फ एक लाख रह गया। गोरखपुर को सीएम योगी का गढ़ माना जाता है और विधानसभा की सभी सीटों पर भी बीजेपी का कब्जा है। ऐसे में मार्जिन कम होना और सीएम का यह बयान रवि किशन के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
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महिला आरक्षण का मुद्दा
सीएम योगी ने अपने भाषण में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का भी जिक्र किया। केंद्र सरकार की योजना 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिला आरक्षण लागू करने की है। अगर सीटों की संख्या बढ़ाई गई और आरक्षण लागू हुआ, तो उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटों के बदले 120 सीटें हो सकती हैं, जिसमें करीब 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। ऐसे में गोरखपुर सीट भी आरक्षित होने की संभावना बन रही है, जिसके चलते रवि किशन को 2029 में टिकट न मिलने की आशंका जताई जा रही है।

क्या है रवि किशन का राजनीतिक गणित?
रवि किशन ने 2017 में उपचुनाव में सपा को जिताने के बाद 2019 में बीजेपी के लिए गोरखपुर सीट वापस जीती थी। हालांकि, 2024 के परिणामों ने दिखाया कि उनकी स्थानीय लोकप्रियता में गिरावट आई है। सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री की इच्छा 2029 तक आरक्षण लागू करने की है। अगर ऐसा होता है और गोरखपुर महिला आरक्षित सीट घोषित हो गई, तो योगी को अपनी कर्मभूमि से नए चेहरे की तलाश करनी पड़ सकती है, और रवि किशन का रास्ता यहां से अलग हो सकता है।






















