Punjab News: पंजाब की राजनीति में मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अकाल तख्त द्वारा हाल ही में दिए गए निर्देशों और मुख्यमंत्री पर लगे बेअदबी तथा पंथ विरोधी आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गर्माता नजर आ रहा है। पंजाब भाजपा ने दावा किया है कि केंद्र सरकार में शामिल सिख मंत्रियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का बहिष्कार करने का फैसला किया है और कहा है कि वे तब तक उनसे मुलाकात नहीं करेंगे, जब तक मुख्यमंत्री अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होकर माफी नहीं मांग लेते।
पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को सलाह दी है कि वे श्री अकाल तख्त साहिब के फैसलों का सम्मान करें और टकराव का रास्ता छोड़कर धार्मिक मर्यादाओं का पालन करें। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और उसके निर्देशों का सम्मान करना प्रत्येक सिख का कर्तव्य है।
मुख्यमंत्री को इस्तीफा देने और माफी मांगने की सलाह
मीडिया से बातचीत के दौरान केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को अपने पद से इस्तीफा देकर श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष उपस्थित होना चाहिए और अपनी गलती स्वीकार करते हुए पंथ से क्षमा मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जिन लोगों ने अकाल तख्त साहिब के साथ टकराव का रास्ता अपनाया, उन्हें राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नुकसान उठाना पड़ा।
ढिल्लों ने कहा कि एक सच्चे सिख के रूप में मुख्यमंत्री को धार्मिक संस्थाओं के सम्मान को सर्वोपरि रखना चाहिए। उनके अनुसार, अकाल तख्त के आदेशों के खिलाफ बयानबाजी या टकरावपूर्ण रवैया अपनाने से स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
सिख मंत्रियों के बहिष्कार का दावा
भाजपा नेता ने दावा किया कि केंद्र सरकार में शामिल सिख समुदाय के मंत्री मुख्यमंत्री भगवंत मान से दूरी बनाए रखने के पक्ष में हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार में सिख समुदाय से हरदीप सिंह पुरी और रवनीत सिंह बिट्टू मंत्री पद पर हैं। हालांकि इस संबंध में मंत्रियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन भाजपा का कहना है कि अकाल तख्त के सम्मान को देखते हुए मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात नहीं की जाएगी।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर बहस तेज हो रही है और विपक्षी दल लगातार मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे हैं।
IAS अधिकारियों और मंत्रियों से भी की अपील
केवल सिंह ढिल्लों ने केवल राजनीतिक बयान तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने पंजाब सरकार के मंत्रियों, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों से भी अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक भगवंत मान को श्री अकाल तख्त साहिब से क्षमा प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक सभी को अकाल तख्त के निर्देशों का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से मुख्यमंत्री के साथ किसी भी प्रकार की बैठक, बातचीत या अन्य संपर्क से परहेज करने की अपील की। भाजपा का यह बयान राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे रहा है, क्योंकि प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर इस तरह की अपील असामान्य मानी जा रही है।

वीडियो विवाद पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा संबंधित वीडियो को अपना न मानने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ढिल्लों ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “क्या कोई आरोपी कभी स्वीकार करता है कि उसने कोई गैरकानूनी काम किया है?” भाजपा नेता का आरोप है कि मुख्यमंत्री इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहे हैं और जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री निर्दोष हैं तो उन्हें अकाल तख्त के सामने जाकर अपनी बात रखनी चाहिए और धार्मिक संस्था के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
आप पार्टी ने भाजपा की मंशा पर उठाए सवाल
दूसरी ओर आप पार्टी ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस पूरे मुद्दे को धार्मिक जवाबदेही और राजनीतिक आचरण की बड़ी बहस में बदलने का प्रयास कर रही है।
आप पार्टी नेताओं का आरोप है कि शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन समाप्त होने के बाद भाजपा पंजाब में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का कहना है कि यह विवाद उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए भाजपा राज्य में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना चाहती है।
कई नेताओं ने थामा भाजपा का दामन
इस बीच चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और चार बार पार्षद रह चुके सुखविंदर पाल सिंह मिंटा अपनी पत्नी हरप्रीत कौर के साथ भाजपा में शामिल हुए। मिंटा वर्तमान में अकाली दल की राज्य पीएसी के सदस्य भी हैं।
इसके अलावा वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुरबिंदर सिंह अटवाल के पुत्र राजपाल अटवाल ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने दावा किया कि विभिन्न दलों के नेताओं का भाजपा में शामिल होना पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता और जनस्वीकार्यता का संकेत है।






















