दिल्ली में आज गुरुवार को एक ऐसा कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तहलका मचा दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देवतुल्य का दर्जा देते हुए उनकी विधिवत पूजा-अर्चना की गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली के प्रतिष्ठित ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ (PCI) में किया गया, जहां सामान्यतः पत्रकारिता और राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर चर्चा होती है।
क्या हुआ था दिल्ली के कार्यक्रम में?
‘नमह भारत’ नामक एक संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस इवेंट में ‘भगवान नरेंद्र मोदी चालीसा’ का पाठ किया गया। मंच पर जो नजारा देखने को मिला, वह काफी अनोखा था। भगवान श्रीराम की एक तस्वीर पर प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे को समाकलित (मर्ज) करके एक नई तस्वीर बनाई गई थी, जिसे मंच पर स्थापित कर देवताओं की तरह उसकी पूजा की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से बिहार सरकार के ‘राज्य किन्नर समाज कल्याण बोर्ड’ के उपाध्यक्ष डॉक्टर राजन सिंह शामिल हुए।
डॉक्टर राजन सिंह और पटना में बनने वाला ‘मोदी मंदिर’
डॉक्टर राजन सिंह कोई आम शख्सियत नहीं हैं। वह उसी व्यक्ति के रूप में चर्चा में आए हैं, जिन्होंने हाल ही में बिहार की राजधानी पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर एक भव्य मंदिर बनाने की घोषणा की थी। राजन सिंह का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी भगवान श्रीराम के अवतार हैं और दोनों के स्तर एक बराबर हैं।
पटना में मंदिर निर्माण की घोषणा करते हुए राजन सिंह ने अपने तर्कों को पेश किया था। उन्होंने कहा था कि आजादी के बाद से किन्नर समाज को जो सम्मान और अधिकार मिल रहे हैं, वह सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से जुड़ा है। उन्होंने साल 2019 में संसद द्वारा पारित ‘ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन एक्ट’ को इसका मुख्य कारण बताया। उनका कहना है कि इस कानून के चलते आज बिहार में किन्नर समाज के लोग दरोगा, सिपाही, होमगार्ड, डॉक्टर और इंजीनियर जैसे पदों पर काम कर रहे हैं।
112 करोड़ रुपये के इस मंदिर की क्या है योजना?
बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड द्वारा 29 जुलाई को पटना में एक बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें इस मंदिर के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया। योजना के अनुसार, इस मंदिर को लगभग 112 से 120 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाना है। इसके लिए पटना में करीब 5 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। बोर्ड की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव बिहार सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय को भेज दिया गया है, क्योंकि भूमि का आवंटन राज्य सरकार ही करेगी।
राजन सिंह का कहना है कि जैसे ही जमीन मिलेगी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस मंदिर का शिलान्यास करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि अगर इस विशाल प्रोजेक्ट में धन की कमी होती है, तो किन्नर समाज के लोग अपने सोने और चांदी के आभूषणों का दान करके इसे पूरा करेंगे।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने क्यों उठाई अपनी जिम्मेदारी?
जब यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा और इसे लेकर लोगों ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया को घेरना शुरू किया, तो PCI प्रबंधन सक्रिय हो गया। प्रेस क्लब ने तुरंत इस मामले में अपनी सफाई पेश की और स्पष्ट किया कि इस धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रम से उनका कोई संबंध नहीं है।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने बताया कि ‘नमह भारत’ नामक संगठन ने चालाकी से केवल एक ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस’ (संवाददाता सम्मेलन) करने के नाम पर उनका हॉल किराए पर लिया था। किसी को भी शक न हो, इसके लिए संगठन ने मूल उद्देश्य छुपाकर जगह बुक की थी।
हालांकि, जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ और ‘भगवान नरेंद्र मोदी चालीसा’ का पाठ शुरू होने लगा, तो प्रेस क्लब के कर्मचारियों और अधिकारियों को इसकी भनक लग गई। PCI के नियमों के अनुसार, किराए पर ली गई जगह पर किसी भी तरह की धार्मिक या ऐसी गतिविधि जो संस्था की प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचाए, पूरी तरह वर्जित है। तत्काल हस्तक्षेप करते हुए प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कार्यक्रम को बीच में ही रुकवा दिया।


























