International Yoga Day 2026: भारत की प्राचीन और अनमोल धरोहर ‘योग’ को विश्व-मंच पर नई ऊंचाई देते हुए, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 21 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक विशाल सामूहिक योग कार्यक्रम में शिरकत की। नर्मदा नदी के तट पर स्थित इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में योग के बढ़ते प्रभाव को दर्शाया।
विश्व-कल्याण का अमूल्य उपहार है योग
इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने पूरे विश्व के योग साधकों, आचार्यों और योग प्रेमियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज हम केवल किसी व्यायाम का उत्सव नहीं मना रहे हैं, बल्कि भारत की उस महान परंपरा का गौरवशाली उत्सव मना रहे हैं, जिसने कालांतर में मानवता को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन जीने का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने योग को विश्व-समुदाय को भारत की सांस्कृतिक धरोहर की ओर से प्राप्त एक अमूल्य उपहार बताया।
राष्ट्रपति ने योग के दार्शनिक और व्यावहारिक पक्ष को समझाते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं है। यह एक ऐसा सशक्त माध्यम है जो व्यक्ति को उसके स्वयं के आंतरिक चेतना से जोड़ता है, समाज को प्रकृति से और सम्पूर्ण मानवता को एक व्यापक विश्व-चेतना से जोड़ता है। आज जब पूरा विश्व मानसिक तनाव, पर्यावरणीय संकट और अन्य अनेक जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब योग मानवता को शांति, सामंजस्य, समरसता और सामूहिक कल्याण का रास्ता दिखाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
2014 से लेकर 2026 तक की वैश्विक यात्रा
राष्ट्रपति ने योग के अंतरराष्ट्रीयकरण की यात्रा को याद करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में भारत की ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रतिवर्ष 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि उस ऐतिहासिक घोषणा के बाद से विश्व-कल्याण के एक सशक्त माध्यम के रूप में योग पद्धति की पहचान और भी मजबूत हुई है। आज करीब एक दशक से अधिक के समय में यह परंपरा इतनी व्यापक हो चुकी है कि विश्व के तमाम देशों में करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बना चुके हैं।
स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग
इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘Yoga for Healthy Ageing’ (स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग) पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने इसे बेहद प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि यह थीम समाज के वरिष्ठ नागरिकों के स्वस्थ, सक्रिय, आत्मनिर्भर एवं गरिमापूर्ण जीवन के लिए योग की उपयोगिता को स्पष्ट करती है।
आधुनिक जीवनशैली के कारण बढ़ती उम्र में कई शारीरिक और मानसिक बीमारियां लोगों को घेर लेती हैं। राष्ट्रपति ने कहा, “आज हम जो जीवनशैली अपनाते हैं, वही हमारे आने वाले समय के स्वास्थ्य और सुख का आधार बनती है।” उन्होंने बताया कि नियमित योग अभ्यास बढ़ती आयु में भी व्यक्ति को सक्रिय और आत्मनिर्भर बने रहने में सहायक होता है। साथ ही, यह बुजुर्गों में अक्सर देखे जाने वाले अकेलेपन, अवसाद और चिंता जैसी समस्याओं से लड़ने के लिए मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है। योगासन और प्राणायाम के माध्यम से उम्र से जुड़ी शारीरिक अकड़न दूर होती है और जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
सरकार की पहल और संस्थाओं की भूमिका
योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए भारत सरकार के निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि योग शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा जन-जागरूकता के क्षेत्र में सरकार द्वारा अभूतपूर्व कार्य किया जा रहा है। उन्हें यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि अनेक स्वयंसेवी संस्थाएं और योग गुरु विश्व-स्तर पर लोगों को योग पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करने में जुटे हुए हैं।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इन संस्थाओं और योग शिक्षकों के निष्ठापूर्ण प्रयासों के बल पर योग सच में जन-जन तक पहुंचेगा और समस्त मानवता के कल्याण का एक मजबूत आधार-स्तम्भ बनेगा।
स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ विश्व का निर्माण
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों और विश्व के नागरिकों से एक विशेष आग्रह किया। उन्होंने कहा कि योग को केवल एक दिन का उत्सव नहीं बनाकर छोड़ना चाहिए, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा करके व्यक्ति स्वयं तो स्वस्थ रहेगा ही, साथ ही ‘स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज, स्वस्थ राष्ट्र और स्वस्थ विश्व’ के निर्माण के इस महान लक्ष्य में अपना अनमोल योगदान देगा।
जबलपुर में आयोजित इस सामूहिक योग कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि योग किसी एक देश या धर्म की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह समग्र मानवजाति के उत्थान के लिए भारत की ओर से दुनिया को दिया गया एक ऐसा मंत्र है, जो सदियों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा।
























