जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में प्रकृति का कहर इस समय अपने चरम पर है। पिछले सप्ताहांत यानी शनिवार और रविवार के दौरान लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने राजौरी और पुंछ जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। अब तक इस तबाही में 11 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि पांच अन्य अभी भी लापता हैं। बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है, और सरकारी मशीनरी राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई है।
सुरनकोट सबसे अधिक प्रभावित
राहत और बचाव विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सबसे ज्यादा कहर पुंछ जिले के सुरनकोट तहसील में देखने को मिला है। यहीं वह इलाका है जहां सबसे अधिक मौतें और जान-माल का नुकसान दर्ज किया गया है। लगातार हो रही बारिश और इसके कारण सड़कों के टूट जाने से राहत कार्य में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है। हालांकि, बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। वहीं, राजौरी जिले में भूस्खलन की घटना में एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हुई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 48 घंटों में इस क्षेत्र में जो बारिश हुई, उसने चेतावनी के स्तर को पार कर दिया। इसका सीधा असर यहां की नदियों पर दिखा। दरहाली, खंडली सुक्तोह और जमोला समेत सभी प्रमुख नदियां और नाले खतरे के निशान से ऊपर बहने लगे। राजौरी जिले में दरहाली नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि इसने तटबंधों को तोड़ दिया और सीधे शहर के निचले इलाकों तक पहुंच गया।
आर्थिक नुकसान और वाहनों की बर्बादी
इस अचानक आई बाढ़ ने लोगों को आर्थिक रूप से भी कमर तोड़ दी है। सबसे बड़ी घटना राजौरी बस स्टैंड की पार्किंग में घटी, जहां दरहाली नदी का पानी दीवार तोड़कर सीधे अंदर घुस गया। इस भयानक बहाव में दर्जनों गाड़ियां तेजी से बह गईं, जिससे वाहन मालिकों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा, कई आवासीय इमारतें और मकान भी पानी के दबाव और भूस्खलन की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तत्काल बचाव अभियान शुरू कर दिया है। अब्दुल्ला ब्रिज के निचले हिस्से में पानी भर जाने के कारण फंसे करीब 50 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और राहत शिविरों में भेजा गया। तारिक ब्रिज के आसपास के इलाकों से भी लोगों को निकालने का काम युद्धस्तर पर जारी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हर आपातकालीन कॉल (SOS) का तुरंत जवाब दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्राथमिकता केवल जानों की रक्षा करना है, संपत्ति के नुकसान का सटीक आकलन तब तक संभव नहीं होगा जब तक पानी पूरी तरह से उतर नहीं जाता।
मृतकों और लापता लोगों की पहचान
इस त्रासदी में जान गंवाने वालों में अधिकतर सुरनकोट के रहने वाले हैं। लोअर मुराह गांव में भूस्खलन के कारण एक मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गया, जिसमें 8 लोग फंस गए। बचाव टीम को अब तक 2 वर्षीय बच्चे समेत 5 लोगों के शव मिल चुके हैं, जबकि 3 अन्य की तलाश जारी है।
इसी तरह, संगला गांव में अचानक आई बाढ़ में एक ही परिवार के चार सदस्य—अब्दुल हमीद, उनकी पत्नी शरीफा बेगम, बेटी अरीबा और बहन मनीरा बेगम बह गए। नूनाबंदी में मकान गिरने से 28 वर्षीय नाजिया कौसर की मौत हुई, हालांकि उनके पति और तीन छोटे बच्चों को समय रहते बाहर निकाला गया। वहीं, संगलानी से 22 वर्षीय शाहजैब और मरहोट से एक नाबालिग लड़की इरम की नाले में डूबने से मौत हुई। राजौरी शहर में भी एक अज्ञात महिला समेत दो शव बरामद किए गए हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी और यात्राएं स्थगित
मौसम विभाग ने आम जनता के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार, 23 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में मध्यम से लेकर भारी बारिश जारी रहने की पूरी संभावना है। इस चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए माता वैष्णो देवी (कटरा) और बाबा अमरनाथ यात्रा को अगले आदेशों तक के लिए स्थगित कर दिया है।
हालांकि, इस बारिश ने कश्मीर घाटी के लोगों को पिछले कुछ दिनों से चल रही भयंकर गर्मी से थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन राजौरी और पुंछ जैसे सीमावर्ती इलाकों के लिए यह जानलेवा साबित हो रही है। प्रशासन ने नदियों और नालों के किनारे रहने वाले लोगों से घरों में ही रहने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। अगले 48 घंटे इस आपदा से निपटने के लिए काफी निर्णायक माने जा रहे हैं।
























