Bihar News: बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। राजधानी पटना के गांधी मैदान में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार प्रस्तावित है। इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह में करीब 27 से 28 मंत्री शपथ लेंगे। इस कार्यक्रम को सिर्फ प्रशासनिक विस्तार नहीं, बल्कि एनडीए के विशाल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
कैसे अलग है इस बार का आयोजन?
बता दें कि 15 अप्रैल को जब सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब चुनावी व्यस्तता के चलते कार्यक्रम को काफी सीमित और लो-प्रोफाइल रखा गया था। लेकिन इस बार गांधी मैदान में युद्धस्तर पर तैयारियां की गई हैं। विशाल मंच, सुरक्षा के कड़े इंतजाम और लाखों की भीड़ के साथ यह आयोजन एनडीए की पूरी ताकत का एलान है।
किस पार्टी के कोटे से कौन लेगा शपथ?
सूत्रों के अनुसार, गठबंधन के सभी दलों के बीच सीटों का संतुलन बैठाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक दिन पहले ही पटना पहुंचकर मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप दे रहे हैं।
- भाजपा (12 सीटें): विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल, श्रेयसी सिंह, राम कृपाल यादव और संजय सिंह समेत 12 नेता शपथ लेंगे।
- जदयू (12 सीटें): श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेसी सिंह, मदन सहनी, जमा खां, सुनील कुमार, शीला मंडल, रत्नेश सदा, बुलो मंडल, भगवान सिंह कुशवाहा और दामोदर रावत के साथ निशांत कुमार भी शामिल हैं।
- एलजेपीआर (2 सीटें): चिराग पासवान की पार्टी ने अपने दोनों नाम सीएम सम्राट चौधरी को भेज दिए हैं। इसमें संजय सिंह और संजय पासवान (पिछली सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं) शामिल हैं।
- हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और रालोद: दोनों दलों को एक-एक मंत्री पद दिए जाने की संभावना है।
सियासी गलियारों में ‘निशांत कुमार’ की चर्चा
इस पूरे मंत्रिमंडल विस्तार की सबसे चर्चित और चुनौतीपूर्ण बात नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम है। जदयू कोटे से उनके मंत्री बनने की खबर से राज्य की सियासत में हलचल मची हुई है। निशांत की एंट्री को नीतीश कुमार के राजनीतिक वंशवाद को लेकर भविष्य की रणनीति के तौर पर पढ़ा जा रहा है।
दिल्ली से पटना तक… NDA का मेगा शो
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा जैसे शीर्ष नेता मौजूद रहेंगे। इस मौजूदगी को इस नजरिए से देखा जा रहा है कि केंद्र सरकार बिहार में एनडीए की सरकार को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है और आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा को एनडीए ही तय करेगा। कुल मिलाकर, पटना का गांधी मैदान आज एक बार फिर सत्ता, रणनीति और जनादेश के भव्य संगम का गवाह बनने जा रहा है।

























