ईपीएफओ (EPFO) से जुड़े सदस्यों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब अगर आपका प्रोविडेंट फंड (PF) क्लेम हर दृष्टि से सही और पूरा होने के बावजूद तय समय सीमा में सेटल नहीं होता, तो आप न सिर्फ शिकायत कर सकते हैं, बल्कि देरी की भरपाई के लिए अतिरिक्त ब्याज या मुआवजे का हकदार भी बन सकते हैं।
हाल ही में मुंबई कंज्यूमर कमीशन का एक ऐसा ही फैसला सामने आया है, जिसमें एक रिटायर्ड कर्मचारी के 14.06 लाख रुपये के PF क्लेम में हुई 35 दिन की देरी के लिए EPFO को ब्याज चुकाने का आदेश दिया गया है।
20 दिन का नियम क्या है?
सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत EPF से जुड़े नए नियम लागू हो चुके हैं। इन नियमों के मुताबिक, जब कोई सदस्य PF, पेंशन या डिपॉजिट-लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) का क्लेम सही दस्तावेजों और पूरी जानकारी के साथ दाखिल करता है, तो EPFO को उसे 20 दिन के भीतर निपटाना अनिवार्य होगा।
यानी अगर आपका क्लेम फॉर्म में कोई कमी नहीं है, दस्तावेज सही हैं और कोई विशेष जांच भी लंबित नहीं है, तो तीन हफ्ते के अंदर आपका पैसा आना चाहिए। वहीं, अगर आवेदन में अधूरी जानकारी, गलत विवरण या सत्यापन संबंधी दिक्कत हो, तो निपटान में सामान्य से ज्यादा समय लग सकता है।
देरी पर 12% सालाना पेनल इंटरेस्ट का प्रावधान
नए नियमों की सबसे खास बात जवाबदेही को लेकर है। अगर संबंधित EPFO अधिकारी किसी ठोस और पर्याप्त कारण के बिना क्लेम को तय समय में सेटल नहीं करता, तो उस पर 12 प्रतिशत सालाना की दर से पेनल इंटरेस्ट लगाया जा सकता है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह राशि किसी फंड से नहीं, बल्कि उस अधिकारी की अपनी सैलरी से वसूली जाएगी। इससे अधिकारियों पर समय रहते क्लेम निपटाने की जिम्मेदारी सीधे-सीधे तय हो गई है।
35 दिन की देरी, 6% ब्याज
मुंबई कंज्यूमर कमीशन के सामने एक रिटायर्ड कर्मचारी का मामला आया, जिसका PF क्लेम 14,06,272 रुपये का था। क्लेम फाइनल होने में 35 दिन का वक्त लगा, जो नवंबर के शुरू से लेकर दिसंबर मध्य तक की अवधि में फैली थी।
आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि जॉइंट डिक्लेरेशन आवेदन से जुड़ी समस्या के बारे में EPFO ने सदस्य को ठीक से अवगत नहीं कराया, जिसकी वजह से निपटान में इतनी बड़ी देरी हुई। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए EPFO को आदेश दिया कि वह क्लेम की राशि पर 35 दिन की देरी का 6 प्रतिशत सालाना ब्याज चुकाए। आदेश पर अमल के लिए EPFO को 45 दिन का समय दिया गया है।
यह फैसला उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए काफी अहम है, जिनकी दैनिक जरूरतें PF की रकम पर टिकी होती हैं। रिटायरमेंट के बाद कुछ हफ्तों की देरी भी परिवार के लिए भारी आर्थिक दिक्कत खड़ी कर सकती है।
हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि इसका मतलब यह नहीं कि हर लेट क्लेम पर अपने-आप 6% ब्याज मिलने लगेगा। मुआवजे का फैसला हर मामले की परिस्थितियों, देरी की वजह और संबंधित अधिकारी के आदेश पर निर्भर करता है।
PF क्लेम में देरी हो तो ऐसे करें शिकायत
अगर आपका पूरा क्लेम जमा होने के 20 दिन बाद भी सेटल नहीं हुआ है, तो निम्न विकल्प आजमा सकते हैं, सबसे पहले अपने इलाके के रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (RPFC) के सामने लिखित शिकायत दर्ज करें।
EPFO की ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था EPFiGMS के जरिए घर बैठे शिकायत दर्ज की जा सकती है।
EPFO का यह कार्यक्रम आमतौर पर हर महीने की 10 तारीख को विभिन्न राज्यों में आयोजित होता है, जहां आप सीधे अधिकारियों से अपनी समस्या रख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर कंज्यूमर कमीशन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है, जैसा मुंबई के मामले में हुआ।

























