Noida News: नोएडा सेक्टर-66, मामूरा गांव में एक दुखद और दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को शोक में डूबो दिया है। यह हादसा एक पांच मंजिला अवैध पीजी और एनसीआर पीजी की इमारत में हुआ, जिसमें 250 से अधिक गरीब मजदूर, छात्र और कर्मचारी रहते थे। इस घटना ने साफ कर दिया है कि प्रशासनिक लापरवाही और अवैध माफिया की मिलीभगत ने कितनी बड़ी त्रासदी को जन्म दिया है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
हादसे का विवरण और कारण
नोएडा सेक्टर-66, मामूरा गांव में स्थित इस अवैध इमारत का निर्माण बिना किसी अनुमति और मानकों का पालन किए गया था। यह पांच मंजिला इमारत पूरी तरह से गैरकानूनी थी, जिसमें न तो फायर सेफ्टी का इंतजाम था, न ही निकास मार्ग थे। इमारत के बेसमेंट में बैटरी चार्जिंग की सुविधा बनाई गई थी, जहां ई-बाइक की बैटरियों को चार्ज किया जाता था।
इसी प्रक्रिया में बैटरी फटने से भीषण आग लगी, जिसने देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि 16 अन्य वाहनों भी जल गए। इस आगजनी में बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी 24 वर्षीय स्नेहा श्रीवास्तव और मध्य प्रदेश के बालाघाट निवासी 30 वर्षीय ऋषभ कुमार की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों ही निजी कंपनी के कर्मचारी थे और सीढ़ियों की तरफ भाग रहे थे, लेकिन लपटों ने उन्हें घेर लिया।
यह इमारत 300 गज में बनी थी, जिसमें 65 कमरे थे। इनमें से अधिकतर कमरे छोटे-छोटे थे, जहां 3-4 लोग रहते थे। किराया भी सस्ते में, 8000 से 10000 रुपये के बीच, तय किया गया था ताकि गरीब मजदूर और छात्र आसानी से अपना जीवन यापन कर सकें।
परंतु, इन सस्ते किराये के पीछे उनकी जान कितनी सस्ती कर दी गई है, यह इस हादसे ने स्पष्ट कर दिया है। वहां न तो अग्निशमन यंत्र थे, न ही उचित निकास व्यवस्था, और न ही कोई एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट)। तंग गलियों के कारण दमकल की गाड़ियां 150 मीटर दूर ही रुक गईं, जिससे बचाव कार्य प्रभावित हुआ।
मददगार नागरिकों और स्थानीय लोगों का प्रयास
बता दें कि इस भीषण त्रासदी में स्थानीय नागरिकों ने अपनी जान की परवाह किए बिना जोखिम उठाया। अमन नामक दुकानदार और आसपास की निर्माणाधीन इमारत के युवा बांस की सीढ़ी और रस्सी का प्रयोग कर 50 से अधिक लोगों की जान बचाने में मदद की।
वहीं, अग्निशमन विभाग ने भी 15 लोगों को सुरक्षित निकाला। यह साहसिक प्रयास इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय लोग कितने जागरूक और मदद के लिए तत्पर हैं, लेकिन प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही इस तरह की घटनाओं को बार-बार जन्म देती है।
यह हादसा नहीं, बल्कि एक सामूहिक नरसंहार है, जो प्रशासनिक लापरवाही और पीजी माफिया की मिलीभगत का परिणाम है। नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से गांवों में 4-5 मंजिला अवैध इमारतें बिना नक्शा पास, बिना फायर सेफ्टी मानकों के धड़ल्ले से चल रही हैं।
इन इमारतों का निर्माण नियमों का उल्लंघन कर किया गया है, और इन्हें संरक्षण भी दिया जा रहा है। 10×10 के छोटे-छोटे कमरों में 3-4 लोग मजबूरी में रह रहे हैं, और बेहद कम किराये पर जीवन यापन कर रहे हैं। यह सब सस्ते किराये के नाम पर मजदूरों की जिंदगी से खेलवाड़ है।
सीटू की मांगें और कार्रवाइयां
सीटू इस हादसे के पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता है और उनकी मदद के लिए अनेक मांगें उठाता है।
- मुआवजा: मृतक युवती स्नेहा और युवक ऋषभ के परिवारों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा और घायलों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा, साथ ही निशुल्क इलाज।
- गैरकानूनी निर्माण और दोषियों पर कार्रवाई: इस अवैध इमारत के मालिक, जिसने बेसमेंट में चार्जिंग स्टेशन बनाया और उसे संरक्षण देने वाले संबंधित अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
- फायर और सुरक्षा ऑडिट: नोएडा के सभी गांवों – मामूरा, छलेरा, बरौला, भंगेल, सलारपुर आदि में चल रहे सभी पीजी, गेस्ट हाउस का फायर और सुरक्षा ऑडिट किया जाए।
- पीड़ितों की पुनर्वास व्यवस्था: जल चुके दस्तावेज, रहने और खाने की व्यवस्था, और जीवन यापन की सुविधाएं प्रशासन सुनिश्चित करे।
- सुरक्षा उपाय: मजदूर बस्तियों में चार्जिंग स्टेशन बैकअप के स्थान पर खुले और सुरक्षित स्थान पर स्थापित करने का आदेश जारी हो।
सीटू इस हादसे के पीड़ितों के साथ खड़ा है और चेतावनी देता है कि यदि 7 दिनों के भीतर इन अवैध और असुरक्षित इमारतों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वह मजदूरों के समर्थन में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करेगा। यह कदम प्रशासन और माफियाओं की मिलीभगत को उजागर करने के लिए जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

























