कॉकरोच जनता पार्टी चींटी जनता पार्टी
---Advertisement---

जमुई सदर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था ने खोली बिहार स्वास्थ्य सिस्टम की पोल

Bihar : जमुई सदर अस्पताल पहुंची मीडिया ने जब मरीजों का हाल देखा, तो व्यवस्था के नाम पर मूक बधिर दिखती प्रशासनिक मशीनरी की पोल खुल गई। लंबी लाइनों में खड़ी बुजुर्ग महिला बनारसी देवी दर्द से बेहाल नजर आईं। खैरा क्षेत्र से आईं बनारसी देवी का कहना था कि उन्हें पिछले चार दिनों से भयंकर पेट दर्द है।

जमुई सदर अस्पताल: दर्द, बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी

HIGHLIGHTS

  • 46 डिग्री की गर्मी में जमीन पर तड़पते मरीज, डॉक्टर गायब
  • रेड अलर्ट के बीच जमुई अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़
  • सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं, सिर्फ इंतजार और लाचारी
  • डॉक्टर नदारद, मरीज बेहाल — जमुई अस्पताल की शर्मनाक तस्वीर
  • बिहार के स्वास्थ्य दावों की हकीकत दिखाता जमुई सदर अस्पताल

Bihar—Jamui Sadar Hospital News: बिहार के स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती जमुई सदर अस्पताल की यह ग्राउंड रिपोर्ट किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। जहां एक ओर प्रशासन भीषण लू और गर्मी से बचाव के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी कर मीटिंग्स कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल के आधारभूत ढांचे और चिकित्सा व्यवस्था का बुरा हाल है। तापमान 46 डिग्री के पार पहुंचने की आशंका के बीच, जिले के सबसे बड़े अस्पताल में मरीज छत के नीचे और फर्श पर बैठकर दर्द से कराह रहे हैं।

दर्द और निराशा की तस्वीरें

जमुई सदर अस्पताल पहुंची मीडिया ने जब मरीजों का हाल देखा, तो व्यवस्था के नाम पर मूक बधिर दिखती प्रशासनिक मशीनरी की पोल खुल गई। लंबी लाइनों में खड़ी बुजुर्ग महिला बनारसी देवी दर्द से बेहाल नजर आईं। खैरा क्षेत्र से आईं बनारसी देवी का कहना था कि उन्हें पिछले चार दिनों से भयंकर पेट दर्द है। वे रोज अस्पताल का चक्कर लगा रही हैं, लेकिन डॉक्टर का कोई अता-पता नहीं है। उनकी बेटी अनिता ने बताया कि परिवार इतना गरीब है कि उन्हें प्राइवेट अस्पताल का खर्च उठाना भारी पड़ेगा। ऐसे में सरकारी अस्पताल में डॉक्टर के मिलने की आस में वे रोज घर से निकलते हैं, लेकिन हर दिन निराशा हाथ लगती है।

व्यवस्था की लापरवाही: एक्सरे से लेकर बाथरूम तक

मलयपुर फुलबडिया की रहने वाली सरिता देवी का कहना है कि उन्हें पहले मलयपुर से यहां रेफर किया गया था। एक्सरे कराने के लिए वे डेढ़ घंटे से इधर-उधर भटक रही हैं। कोई ठीक से यह नहीं बता पा रहा कि एक्सरे की व्यवस्था कहां है। गर्मी में पसीने से तर-बतर मरीजों को अस्पताल के कर्मचारी एक दूसरे के पास भेजते रहे। अस्पताल के बाथरूम की हालत और भी भयावह है। शौचालयों में पानी नहीं, दरवाजे-खिड़कियां टूटी और फ्लश टूटा हुआ है। यहीं नहीं, बाथरूम और सीढ़ियों के आसपास सिरिंज व अन्य सर्जिकल वेस्ट फेंके हुए मिले, जो संक्रमण का खतरा पैदा कर रहे हैं।

भीषण गर्मी में खुले आसमान तले इंतजार

सबसे दर्दनाक नजारा था पर्ची कटाने वाले काउंटर का। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में वहां न तो कोई शेड था और न ही बैठने की व्यवस्था। मरीज लंबी लाइनों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। थकान के मारे वे जमीन पर बैठ जाते और फिर थोड़ी देर बाद खड़े हो जाते। डॉक्टर चैम्बर और ओपीडी के बाहर का नजारा भी कुछ अलग नहीं था। जोड़वाहा धर्मपुर निवासी मो. तस्लीम ने बताया कि उन्हें दो दिन पहले चोट लगी थी। सुबह 10 बजे पर्ची कटवाई, लेकिन दोपहर 12 बज गए और डॉक्टर नहीं पहुंचे। इमरजेंसी में भी स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी। लक्ष्मीपुर की मीना देवी अपनी बेटी का इलाज कराने आई थीं। इमरजेंसी पर्ची कटवाने के बाद भी उन्हें चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन डॉक्टर नहीं मिले।

सिविल सर्जन के दावे और जमीनी हकीकत

जब इस मामले में जमुई के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह से बात की गई, तो उन्होंने हवाई किले बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने दावा किया कि लू से बचाव के लिए एसी और कूलर वाले स्पेशल वार्ड बनाए गए हैं। शीतल पेयजल की व्यवस्था, 29 प्रकार की दवाइयां, जेनरेटर और एंबुलेंस सब कुछ मुहैया है। लेकिन सवाल यह है कि जब मरीज ओपीडी में ही डॉक्टर को नहीं देख पा रहे, तो वे स्पेशल वार्ड तक कैसे पहुंचेंगे? कागजों पर तैयार एसओपी (SOP) और जमीन पर बिखरी व्यवस्था में एक बड़ा अंतर साफ दिख रहा है।

जर्जर इमारतें और नशे के आदी युवक

अस्पताल की लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती। सदर अस्पताल परिसर में एक विशाल जर्जर जलमीनार खड़ा है, जो किसी भी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। यह जलमीनार सीटी स्कैन सेंटर के पास है। सीटी स्कैन संचालक ने बताया कि जलमीनार तोड़ने के दौरान मलबे गिरने से सेंटर के एसी खराब हो गया है, जिससे काम ठप पड़ा है। मजबूरन मरीजों को बाहर प्राइवेट सेंटर जाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, एक खड़ी हुई एम्बुलेंस के बैटरी बॉक्स में शराब की खाली बोतलें मिलीं। अस्पताल के ही एक संविदा कर्मी ने बताया कि देर रात तक अस्पताल परिसर में नशेड़ी टोलियां जमा हो जाती हैं और मौज-मस्ती करती हैं। सुरक्षा गार्ड केवल मुख्य गेट पर दिखते हैं, परिसर के अंदर कोई सुरक्षा नहीं है।

आश्वासन ही काफी?

मीडिया के सवाल उठने पर सिविल सर्जन ने जर्जर एंबुलेंस हटाने और जलमीनार तोड़ने की प्रक्रिया चलने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मीडिया द्वारा दुष्प्रचार के कारण काम में देरी हुई है और जल्द ही इन सब समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक केवल जांच और आश्वासन का दौर चलेगा? जब तक जमीन पर बैठे मरीजों को राहत नहीं मिलती और डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर नहीं आते, तब तक सरकार के सभी दावे खोखले साबित होते रहेंगे। यह कहानी सिर्फ जमुई की नहीं, बल्कि पूरे बिहार के स्वास्थ्य सेवा के ढांचे को दर्शाती है, जहां गरीब की जिंदगी से बड़ी लापरवाही कोई नहीं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now