इंदौर के एक ग्राफिक डिजाइनर पर आरोप है कि उसने साइबर ठगों के लिए ऐसी APK फाइलें और सॉफ्टवेयर तैयार किए, जिनकी मदद से देशभर में हजारों लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बनाई गई। मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने 36 वर्षीय पंकज गुप्ता को इंदौर से गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि उससे जुड़ी APK फाइलों का इस्तेमाल कर ठगों ने 9,600 से अधिक लोगों को निशाना बनाया और करीब 150 करोड़ रुपये की ठगी की।
पुलिस के मुताबिक, गुप्ता ने ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाली 2,805 से ज्यादा APK फाइलें तैयार कर अलग-अलग गिरोहों को दी थीं। इन आरोपों की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
डिजिटल अरेस्ट की कोशिश से शुरू हुई कहानी
मुंबई क्राइम ब्रांच के अनुसार, करीब पांच साल पहले पंकज गुप्ता खुद डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी एक धोखाधड़ी की कोशिश का शिकार होते-होते बचा था। पुलिस का आरोप है कि इस अनुभव के बाद उसने साइबर ठगी के तौर-तरीकों को समझा और बाद में उसी जानकारी का इस्तेमाल अपराधियों की मदद के लिए किया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, गुप्ता ने साइबर अपराधियों और ठगी करने वाले गिरोहों से संपर्क बनाया। इसके बाद उसने उनके लिए खास तौर पर तैयार की गई APK फाइलें और सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराना शुरू किया। पुलिस का आरोप है कि इन फाइलों के जरिए ठग पीड़ितों के मोबाइल फोन को दूर से नियंत्रित कर सकते थे और निजी जानकारी तक पहुंच बना सकते थे।
APK लिंक से कैसे हो सकती है ठगी?
APK, यानी Android Package Kit, एंड्रॉयड फोन पर ऐप इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है। किसी अनजान व्यक्ति की भेजी APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल करने पर फोन में हानिकारक सॉफ्टवेयर आ सकता है। ऐसा सॉफ्टवेयर, उसकी अनुमति और काम करने के तरीके के आधार पर, फोन की जानकारी या ऐप्स तक पहुंच हासिल करने की कोशिश कर सकता है।
इस मामले में पुलिस का दावा है कि आरोपी की बनाई गई कुछ APK फाइलें ठगों को पीड़ितों के फोन और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी तक पहुंचने में मदद करती थीं। हालांकि, किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से अपने-आप बैंक खाते का पूरा नियंत्रण किसी और को नहीं मिल जाता। जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि फाइल इंस्टॉल हुई या नहीं, कौन-सी अनुमतियां दी गईं और फोन में क्या जानकारी मौजूद थी।
वरिष्ठ नागरिक की शिकायत से जांच शुरू
मुंबई क्राइम ब्रांच के अनुसार, मामला भायखला के एक वरिष्ठ नागरिक की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन आया था। कॉल करने वाले ने खुद को एक राष्ट्रीयकृत बैंक का प्रतिनिधि बताया और सीनियर सिटीजन कार्ड योजना के तहत सहायता देने की बात कही।
बातचीत के दौरान बुजुर्ग के मोबाइल पर एक संदेश भेजा गया, जिसमें APK लिंक था। शिकायत के मुताबिक, लिंक पर कार्रवाई के बाद उनके बैंक खाते से 5 लाख 62 हजार रुपये निकल गए। इस घटना के बाद उन्होंने साइबर पुलिस से संपर्क किया।
डिजिटल सुरागों से इंदौर तक पहुंची पुलिस
शिकायत मिलने के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच की तकनीकी टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट और सर्वर से जुड़े सुरागों की जांच की। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान कड़ी इंदौर तक पहुंची। टीम ने वहां कार्रवाई कर पंकज गुप्ता को गिरफ्तार किया।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण में गुप्ता द्वारा तैयार किए गए सॉफ्टवेयर और APK फाइलों के इस्तेमाल का पता चला। जांच एजेंसी के अनुसार, इन टूल्स से जुड़े गिरोहों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को निशाना बनाया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फाइलें किन लोगों को दी गईं, उनसे कितनी ठगी हुई और नेटवर्क में अन्य डेवलपर या सहयोगी कौन थे।
मोबाइल पर अनजान APK आए तो क्या करें?
साइबर ठगी से बचने के लिए बैंक, सरकारी विभाग या किसी योजना के नाम पर भेजे गए अनजान लिंक पर भरोसा न करें। किसी मैसेज में APK फाइल आए तो उसे डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। ऐप केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से लें और इंस्टॉल करते समय मांगी जा रही अनुमतियों को ध्यान से देखें।
अगर किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर दिया है या APK इंस्टॉल की है, तो फोन को इंटरनेट से अलग करें, बैंक से तुरंत संपर्क कर खाते और कार्ड को सुरक्षित करवाएं और अपने पासवर्ड किसी सुरक्षित डिवाइस से बदलें। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत 1930 हेल्पलाइन पर या National Cyber Crime Reporting Portal पर दर्ज की जा सकती है। जल्दी शिकायत करने से लेन-देन रोकने की संभावना बढ़ सकती है।



























