पंचायत चुनाव में मंत्री पुत्र के निर्दलीय उतरने से गरमाई सियासत

झाबर सिंह खर्रा के बेटे दुर्गा सिंह ने श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के वार्ड 19 से निर्दलीय नामांकन किया। मदन राठौड़ ने कहा—भाजपा में परिवारवाद नहीं चलता, लेकिन चुनाव लड़ना लोकतांत्रिक अधिकार है।

मंत्री पुत्र के निर्दलीय उतरते ही गरमाई राजस्थान की सियासत

HIGHLIGHTS

  • भाजपा में परिवारवाद नहीं, मंत्री पुत्र के चुनाव पर बोले राठौड़
  • पिता मंत्री, बेटा निर्दलीय: पंचायत चुनाव में नया सियासी मोड़
  • भाजपा टिकट छोड़ निर्दलीय मैदान में उतरे मंत्री के बेटे
  • मंत्री पुत्र के नामांकन से भाजपा में बढ़ी सियासी हलचल

राजस्थान के पंचायत चुनाव में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बेटे दुर्गा सिंह खर्रा के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरने से सियासी हलचल तेज हो गई है। उन्होंने सीकर जिले की श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के वार्ड 19 से नामांकन दाखिल किया है। इस फैसले के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि पार्टी में परिवारवाद नहीं चलता, लेकिन लोकतंत्र में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का मौलिक अधिकार है।

गुरुवार को भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान राठौड़ ने कहा कि दुर्गा सिंह का चुनाव लड़ने का निर्णय उनकी अपनी सोच है। उन्होंने इस कदम को सीधे तौर पर अनुशासनहीनता या बगावत नहीं बताया। राठौड़ के मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है और वे किसी के इस अधिकार का हनन नहीं कर सकते।

वार्ड 19 से निर्दलीय उम्मीदवार बने दुर्गा सिंह खर्रा

दुर्गा सिंह खर्रा ने श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के वार्ड 19 से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है। उन्होंने भाजपा से टिकट मांगने के बजाय स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। उनके इस कदम को लेकर स्थानीय राजनीति में चर्चा है, क्योंकि उनके पिता झाबर सिंह खर्रा राज्य सरकार में मंत्री हैं।

दुर्गा सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की वजह बताते हुए स्थानीय भाजपा नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं में नाराजगी का जिक्र किया था। उनका कहना है कि क्षेत्र में पिछले करीब ढाई साल से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष बना हुआ है। उनके अनुसार, कुछ कार्यकर्ताओं और मतदाताओं ने उनसे कहा कि भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की स्थिति में वे समर्थन नहीं कर पाएंगे, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उतरने पर साथ देने को तैयार हैं।

यह दावा दुर्गा सिंह का है। चुनावी माहौल में स्थानीय असंतोष और उम्मीदवारों के चयन को लेकर उठने वाले सवाल ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, उनके नामांकन का असर क्या होगा, यह चुनावी नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा।

भाजपा में परिवारवाद नहीं चलता

मदन राठौड़ ने अपने बयान में पार्टी की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा में परिवारवाद की परंपरा नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। इस तरह राठौड़ ने एक ओर पार्टी के परिवारवाद-विरोधी रुख को दोहराया, तो दूसरी ओर मंत्री के बेटे के चुनाव लड़ने पर सीधे कार्रवाई या अनुशासनात्मक कदम की घोषणा नहीं की।

उनकी प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब भाजपा पंचायत चुनावों में संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है। ग्रामीण निकाय चुनावों में स्थानीय नेतृत्व, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और कार्यकर्ताओं का समर्थन अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में मंत्री के बेटे का निर्दलीय चुनाव लड़ना पार्टी के लिए स्थानीय स्तर पर चर्चा और राजनीतिक चुनौती का विषय बन सकता है।

गहलोत के “चौथी बार सरकार” वाले नारे पर तंज

मीडिया से बातचीत में राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जुड़े “चौथी बार कांग्रेस सरकार” के नारे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को यह नारा पसंद नहीं है और दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद हैं।

राठौड़ ने पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने और बाद में वापस कांग्रेस में लौटने का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम गहलोत को अब भी चुभता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर चौथी बार सरकार बनाने के नारे लगाए जाएंगे तो डोटासरा नाराज होंगे, इसलिए गहलोत खुद ऐसे नारे लगवा रहे हैं।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के योगदान को किया याद

राठौड़ ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के योगदान को भी याद किया। उन्होंने पोखरण परमाणु परीक्षण और भारत की सामरिक क्षमता को मजबूत करने में कलाम की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश उनके योगदान को कभी नहीं भूलेगा।

अपने संबोधन में राठौड़ ने मुस्लिम समाज से अच्छे कार्यों की सराहना करने और किसी के प्रभाव में रहने के बजाय अपने विवेक से निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिम समाज को डराकर वोट हासिल करती है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर भय का माहौल बनाती है। राठौड़ ने यह भी कहा कि भाजपा ने मुस्लिम समाज से हमीद खान मेवाती को स्टार प्रचारक बनाया था। उनके मुताबिक, देश के हर नागरिक का विकास और देशभक्ति पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल है।

पंचायत चुनाव में स्थानीय समीकरणों पर नजर

दुर्गा सिंह खर्रा का निर्दलीय नामांकन अब श्रीमाधोपुर के वार्ड 19 में चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना सकता है। उनके समर्थन में स्थानीय कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की भूमिका अहम होगी, जबकि भाजपा संगठन की ताकत और आधिकारिक उम्मीदवार को मिलने वाला समर्थन भी चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल मदन राठौड़ ने इस मामले को लोकतांत्रिक अधिकार के दायरे में रखा है और इसे सीधे बगावत नहीं कहा। ऐसे में पंचायत चुनाव के दौरान पार्टी और उम्मीदवारों की अगली रणनीति पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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