सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से सियासी घमासान

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की SIR याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। 12 अक्टूबर के मार्च और मतदाता सूची विवाद से जुड़ा पूरा मामला जानें।

राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से नोटिस, SIR पर चुनाव आयोग से जवाब तलब?

HIGHLIGHTS

  • राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से झटका!
  • SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन
  • राहुल गांधी पर सुप्रीम कोर्ट क्यों सख्त?
  • INDIA गठबंधन को सुप्रीम कोर्ट से राहत?

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं से जुड़े मतदाता सूची विवाद में सुप्रीम कोर्ट में आज गुरुवार, 15 अक्टूबर को अहम घटनाक्रम सामने आया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है।

वहीं, 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विपक्षी नेताओं के मार्च को लेकर भी अदालत ने सख्त रुख अपनाया। इस घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाताओं के अधिकार और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स।

जाने सुप्रीम कोर्ट में SIR के बारे में

राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी INDIA गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने में अनियमितताएं हुई हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्रवाई और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की जांच की मांग भी उठाई है।

राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता याचिका में शामिल

बता दें कि SIR विवाद को लेकर दायर याचिका में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के अलावा कई प्रमुख विपक्षी नेताओं के नाम शामिल हैं। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी. राजा शामिल हैं।

विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है। किसी पात्र नागरिक का नाम सूची से हटने पर उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर विपक्षी दलों ने SIR की प्रक्रिया, नाम हटाने के मानकों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की मांग उठाई है।

12 अक्टूबर को INDIA गठबंधन ने निकाला था मार्च

बता दें कि इस पूरे विवाद के बीच 12 अक्टूबर को राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला था। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विपक्षी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

विपक्षी नेताओं की मांग थी कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी तय हो। मार्च के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया गया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की थी और मार्च को लेकर यातायात पर भी असर पड़ा। इस प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर बैरिकेड को नुकसान पहुंचाने और आवश्यक अनुमति के बिना मार्च निकालने के मामले में प्राथमिकी भी दर्ज की। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी क्यों चर्चा में है?

बता दें कि 12 अक्टूबर के मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्यवाही भी इस मामले का अहम हिस्सा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने के किसी भी प्रयास को लेकर सख्त टिप्पणी की और कहा कि अदालत को धमकाया नहीं जा सकता। इस संदर्भ में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं सहित प्रदर्शन से जुड़े लोगों को नोटिस दिए जाने की खबर सामने आई है। स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया।

यहां दोनों कानूनी घटनाक्रमों के बीच अंतर समझना जरूरी है। एक तरफ SIR और कथित मतदाता नाम कटने के मामले में चुनाव आयोग को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया गया है। दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने को लेकर अदालत की टिप्पणी और संबंधित लोगों को नोटिस देने का मामला है। दोनों की कानूनी प्रकृति अलग है और इन्हें एक ही आदेश मानना सही नहीं होगा।

SIR क्या है और मतदाताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

SIR का पूरा नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसके तहत मतदाता सूची की विस्तृत समीक्षा की जाती है, ताकि सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सही तरीके से दर्ज रहें और अपात्र या गलत प्रविष्टियों की पहचान की जा सके।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। हालांकि, यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटा दिया जाता है, तो उसके सामने चुनाव में मतदान करने में परेशानी आ सकती है। इसी वजह से नाम जोड़ने, हटाने और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया पारदर्शी होना महत्वपूर्ण है।

भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल पर नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम खोज सकते हैं और उपलब्ध सेवाओं के जरिए पंजीकरण संबंधी आवेदन कर सकते हैं। मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने नाम और विवरण की जांच करें। आधिकारिक पोर्टल।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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