Delhi News: प्रधानमंत्री मोदी ने आज गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और प्रशासक, केंद्रीय मंत्री तथा नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस बैठक का उद्देश्य देश के समग्र विकास को नई दिशा देना, समावेशी मानव विकास के लक्ष्यों को साकार करना और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रणनीतियों को परिष्कृत करना था।
बैठक का मुख्य उद्देश्य और थीम
इस वर्ष की बैठक की थीम “विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी मानव विकास” पर केंद्रित थी और इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक का संपूर्ण विकास एवं कल्याण सुनिश्चित करना है, चाहे उसकी आयु, लिंग, क्षेत्र या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो। इस थीम के माध्यम से यह संकेत मिलता है कि भारत का भविष्य अधिक समावेशी, सशक्त और टिकाऊ होगा, जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और गरिमा मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश और सहकारी संघवाद
इस बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि सहकारी संघवाद की भावना से प्रेरित होकर, हम भारत की विकास यात्रा को गति देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। ‘विकसित भारत’ के हमारे साझा विजन को साकार करने में केंद्र और राज्यों के सामूहिक प्रयास अहम भूमिका निभाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केंद्र और राज्यों का समन्वित प्रयास ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सहकारी संघवाद के तहत सभी स्तरों पर बेहतर तालमेल से ही देश का समग्र विकास संभव है।
बैठक में चर्चा किए गए प्रमुख बिंदु
1. रणनीतियों और लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा
बैठक में इस विजन को धरातल पर लाने और नागरिकों तक प्रभावी परिणाम पहुंचाने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें उद्यमिता को प्रोत्साहित करना, कौशल विकास को मजबूत बनाना, और रोजगार के स्थायी अवसर सृजित करना शामिल है। इसके अलावा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के माध्यम से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया गया।
2. समावेशी मानव विकास के चार स्तंभ
बैठक में चार प्रमुख स्तंभों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया:
- मानव पूंजी और कौशल विकसित करना: युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना, शिक्षा और प्रशिक्षण पर जोर।
- रोजगार और उद्यमिता: उत्पादक रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देना।
- स्वास्थ्य और पोषण: बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और पोषण स्तर में सुधार।
- समान अवसर और गरिमा: हर नागरिक को समान अवसर प्रदान करना, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक न्याय को मजबूत बनाना।
3. विकास योजनाओं का समावेशी वितरण
विकास योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। इसमें राज्यों की विकास दृष्टि को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सुशासन, समन्वय और साझेदारी मॉडल को प्राथमिकता दी गई। साथ ही, योजनाओं की निगरानी के लिए एक व्यवस्थित तंत्र विकसित करने पर भी चर्चा हुई, ताकि उनपर जवाबदेही तय की जा सके और परिणामों का सही आकलन हो सके।
4. मुख्य सचिवों के सम्मेलन की सिफारिशें
बैठक में दिसंबर 2025 में आयोजित मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन की प्रमुख सिफारिशों पर चर्चा की गई। इनमें प्रारंभिक बाल शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कौशल विकास, उच्च शिक्षा को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ना, और खेल तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा देना शामिल हैं। इन सुझावों का उद्देश्य भारत के युवा वर्ग को बेहतर शिक्षा और कौशल से लैस करना है ताकि वे देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।
‘विकसित भारत 2047’ का सपना
नीति आयोग ने स्पष्ट किया कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्यों और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और समावेशी तथा टिकाऊ विकास के लिए साझा रोडमैप तैयार करना है। यदि केंद्र और राज्य मिलकर इन लक्ष्यों पर काम करते हैं, तो भारत के 100वें स्वतंत्रता दिवस 2047 तक ‘विकसित भारत’ का सपना साकार हो सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि सभी स्तर पर समर्पित और योजनाबद्ध प्रयास किए जाएं, जिससे देश के हर नागरिक का जीवन बेहतर हो सके।
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई इस नीति आयोग बैठक ने देश के विकास के लिए नई ऊर्जा का संचार किया है। इस बैठक में तय की गई रणनीतियों और लक्ष्यों को यदि सही ढंग से लागू किया गया, तो भारत निश्चित ही 2047 तक अपने ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार कर सकेगा। सहकारी संघवाद, समावेशी विकास, और डिजिटल क्रांति के साथ ही विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही इस दिशा में सफलता की कुंजी है। भारत का यह यात्रा-पथ निश्चित ही बदलाव और प्रगति का प्रतीक बनेगा, जिससे हर नागरिक का जीवन बेहतर होगा और देश का गौरव विश्व में और ऊंचा होगा।






















