Delhi IPL 2026 News: दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जा रहे आईपीएल मैचों के दौरान कॉम्प्लिमेंट्री (फ्री) पासों की कालाबाज़ारी का एक बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि कैसे स्टेडियम के अंदर से एक संगठित गिरोह फ्री पासों को लाखों रुपये में बेच रहा था। इस रैकेट में डीडीसीए (DDCA) का एक वरिष्ठ अधिकारी और स्टेडियम से सटे एक पेट्रोल पंप का कर्मचारी मुख्य भूमिका में था।
विराट कोहली के मैच में पास की कीमत 80 हजार
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कोई आम टिकट ब्लैक मार्केटिंग नहीं थी, बल्कि एक पूरी प्लानिंग के साथ चलाया जाने वाला ‘वीआईपी पास सिंडिकेट’ था। जिस मैच में स्टार खिलाड़ी, खासकर विराट कोहली होते थे, वहां पासों के दाम आसमान छू जाते थे। जांच में सामने आया कि जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और दिल्ली कैपिटल्स का मैच था, तो एक-एक कॉम्प्लिमेंट्री पास 80 हजार रुपये तक में बिका। वहीं, सामान्य मैचों में ये पास 8 हजार से 20 हजार रुपये में बिक्री के लिए उपलब्ध थे।
पेट्रोल पंप बना गिरोह का मुख्यालय
सबसे हैरान करने वाला खुलासा इस रैकेट की कार्यप्रणाली का है। पुलिस को पता चला कि स्टेडियम के बगल में स्थित एक पेट्रोल पंप को इस नेटवर्क का ‘डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर’ बनाया गया था। डीडीसीए से जुड़े अधिकारी फ्री पास इसी पेट्रोल पंप पर पहुंचाते थे, जहां से कर्मचारी पंकज यादव उन्हें दूसरे युवाओं में बांटकर स्टेडियम के अलग-अलग गेट्स पर भेजता था। ये युवक मैच शुरू होने के ठीक पहले जरूरतमंद लोगों को ये पास मोटी कीमत पर बेचते थे।
पुलिस ने की कार्रवाई, डीडीसीए अधिकारी पर शक
8 मई को दिल्ली पुलिस को सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस ने मुकीम, गुफरान और मोहम्मद फैसल को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पेट्रोल पंप कर्मचारी पंकज यादव का नाम सामने आया। अब पुलिस की निगाह इस पूरे खेल के ‘मास्टरमाइंड’ पर है, जो डीडीसीए का एक बड़ा अधिकारी बताया जा रहा है। पुलिस ने डीडीसीए के चार अधिकारियों से करीब 5 घंटे तक पूछताछ की है।
क्या ऑनलाइन सट्टेबाजी से है कनेक्शन?
जांच एजेंसियों को अब एक और गंभीर एंगल का शक है। आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क सिर्फ पास बेचने तक सीमित नहीं था, बल्कि ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोहों को स्टेडियम के अंदर एंट्री दिलाने में भी इनकी भूमिका हो सकती है। कुछ प्रीमियम पास उन लोगों को दिए जाते थे जो लाइव बेटिंग करते थे।
फॉरेंसिक जांच से होगा खुलासा
पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं, जिनमें से कई चैट और कॉल रिकॉर्ड डिलीट किए गए हैं। फोन फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं ताकि डिलीट डेटा रिकवर किया जा सके। पुलिस को उम्मीद है कि डेटा रिकवरी से इस रैकेट के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेनदेन का पूरा खुलासा हो सकेगा।
























