NEET UG 2026 Re-Exam: परीक्षा में व्यापक गड़बड़ियां और प्रश्नपत्र लीक होने के बाद देशभर में मचे भारी बवाल के बाद राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की तरफ से रविवार, 21 जून 2026 को एक बार फिर से नीट यूजी 2026 (NEET UG 2026) की परीक्षा कराई गई। इस री-एग्जाम का उद्देश्य छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना और उनमें विश्वास जगाना था, लेकिन नियंत्रण रेखा (कट-ऑफ) की कड़ाई और प्रशासनिक अमर्यता के कारण इस परीक्षा ने भी कई छात्रों के सपनों पर पानी फेर दिया।
कई जगहों पर ऐसी दिलदहला देने वाली घटनाएं सामने आईं, जहां अभ्यर्थी मात्र एक मिनट, तीन मिनट या थोड़ी सी देरी से परीक्षा केंद्र पर पहुंचे और उन्हें कड़े नियमों के चलते सेंटर के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
बेंगलुरु: निराशा में परीक्षा केंद्र की दीवारें फांदती दिखीं छात्राएं
ताजा और सबसे चौंकाने वाली घटना कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से सामने आई है। यहां नीट यूजी 2026 की परीक्षा देने वाली तीन छात्राओं के साथ ऐसा हुआ, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल गया। नियमानुसार, परीक्षा केंद्र का गेट दोपहर 1:30 बजे बंद हो जाता है। यह तीनों छात्राएं इस समय सीमा के कुछ मिनट बाद अपने निर्धारित परीक्षा सेंटर पर पहुंचीं।
जब उन्हें गेट बंद देखने को मिला और अधिकारियों ने अंदर जाने की जिद पर अनसुना कर दिया, तो डर और निराशा के मारे इन छात्राओं ने एक ऐसा कदम उठाया, जो किसी भी सवाल पर खरा उतरता है। परीक्षा हॉल तक पहुंचने की बेताब कोशिश में तीनों छात्राओं ने एग्जाम सेंटर के मुख्य गेट की रेलिंग पर चढ़कर परिसर के अंदर छलांग लगा दी।
हालांकि, उनकी यह मेहनत भी बेकार गई। जब वे पहला गेट फांदकर अंदर पहुंचीं, तो उन्हें यह जानकर करारा झटका लगा कि एग्जाम सेंटर (Exam Hall) की तरफ जाने वाला दूसरा गेट भी सुरक्षा कर्मियों द्वारा बंद कर दिया गया था। अब न तो वे अंदर जा पाईं और न ही उनके पास वापस निकलने का कोई सही रास्ता बचा था। इसके बाद तीनों छात्राओं को परिसर की दीवार फांदकर बाहर निकलते हुए देखा गया। यह पूरा वाकया न सिर्फ प्रशासन की व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करता है, बल्कि बताता है कि परीक्षा का दबाव छात्रों पर कितना भारी पड़ रहा है।
भोपाल: मात्र एक मिनट की देरी ने बर्बाद किया साल भर का मेहनत
इसी तरह की एक और दर्दनाक घटना मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सामने आई है, जहां एक छात्रा का साल भर का तप, मेहनत और सपना मात्र 60 सेकंड (एक मिनट) की देरी की वजह से बीच में ही अधूरा रह गया।
यह मामला भोपाल के ‘सुभाष एक्सिलेंस स्कूल’ परीक्षा केंद्र का है। यहां नीट यूजी 2026 री-एग्जाम देने पहुंची एक अभ्यर्थी छात्रा सिर्फ एक मिनट की देरी से सेंटर पहुंची। गेट बंद होने के कारण उसे परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से वंचित कर दिया गया।
जब मात्र एक मिनट की देरी के कारण बेटी को अंदर जाने से रोका गया, तो वहां मौजूद छात्रा के पिता के हाथ-पैर फूल गए। उन्होंने मौके पर तैनात सुरक्षा जवानों और अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाहट की। पिता ने अधिकारियों से अनुनय-विनय करते हुए कहा कि “गलती से हम दूसरे सेंटर पर पहुंच गए थे, जिसके चलते यह एक मिनट की देरी हो गई। कृपया बेटी को अंदर जाने दीजिए, उसका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।” लेकिन नियम कानून के नाम पर काफी कोशिश और निवेदन करने के बाद भी छात्रा को एग्जाम सेंटर में एंट्री नहीं मिली और उसे वापस लौटना पड़ा।
कड़े नियम या अमानवीय व्यवस्था?
नीट जैसी देश की सबसे बड़ी और प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में समय का पालन क्यों जरूरी है, इसके तर्क समझ में आते हैं। परीक्षा की शुद्धता बनाए रखने और प्रश्नपत्र लीक होने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए लॉकडाउन टाइम का पालन करना अनिवार्य है। लेकिन सवाल यह है कि क्या नियमों को इतना अंधा बनाया जाना चाहिए?
जहां एक तरफ NTA पहले ही प्रश्नपत्र लीक और गड़बड़ी के कारण छात्रों का भरोसा जीतने के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं एजेंसी की क्रूरता को उजागर करती हैं। बेंगलुरु और भोपाल जैसी घटनाएं साबित करती हैं कि ग्राउंड लेवल पर तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों के पास मानवीय संवेदना का बिल्कुल भी अभाव है।
























