National Weather News: देश के मौसम का नक्शा इन दिनों दो अलग-अलग दुनियाओं की तरह लग रहा है। एक तरफ जहां मुंबई और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में तेज बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली और उत्तर भारत की धरती सूखती जा रही है। तापमान बढ़ रहा है और लोगों को गर्मी से राहत मिलने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस पूरे मौसमी उथल-पुथल का कारण है एल-नीनो प्रभाव। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर ये एल-नीनो है क्या, ये देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसा क्यों कर रहा है, और ये हालात कब तक बरकरार रहेंगे।
El-Nino क्या है और ये मॉनसून को कैसे प्रभावित करता है?
एल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से कहीं ज्यादा गर्म हो जाता है। यह गर्मी वैश्विक मौसम के पैटर्न को पूरी तरह बदल देता है। सामान्य स्थिति में ‘वॉकर सर्कुलेशन’ के तहत पश्चिमी प्रशांत गर्म और पूर्वी प्रशांत ठंडा होता है, जिससे भारत की ओर नमी लेकर हवाएं आती हैं। लेकिन एल-नीनो के दौरान यह गर्म पानी पूर्व की ओर खिसक जाता है, जिससे भारत की ओर आने वाली मॉनसून हवाओं पर ब्रेक लग जाता है।
वर्ष 2026 में एल-नीनो मध्यम से मजबूत स्तर पर पहुंच चुका है। आईएमडी (भारतीय मौसम विभाग) के अनुमानों के मुताबिक, इस साल पूरे देश में मॉनसून लंबी अवधि के औसत (LPA) का मात्र 90 प्रतिशत रहने वाला है। यह पिछले 11 सालों का सबसे कमजोर मॉनसून साबित हो सकता है।
मुंबई में बाढ़, देर से आया, लेकिन तबाही मचाया
जून 2026 में मुंबई में मॉनसून अपने शेड्यूल से देर से पहुंचा, लेकिन जैसे ही इसने दस्तक दी, तो कहर बरपा दिया। शहर के कई हिस्सों में एक दिन में 79 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। सड़कें नदी बन गईं, ट्रैफिक जाम लग गया और निचले इलाकों में बाढ़ आ गई। हालांकि, इस बारिश ने शहर के जलाशयों को राहत जरूर दी, जो पहले महज 10% के स्तर पर चल रहे थे।
दरअसल, एल-नीनो कुल मॉनसून को कमजोर तो करता है, लेकिन साथ ही यह ‘चरम मौसमी घटनाओं’ को भी बढ़ावा देता है। अरब सागर और पश्चिमी घाट से आने वाली भारी नमी के कारण मुंबई में कम दिनों में बहुत ज्यादा बारिश हुई। ऊपर से शहर का खराब ड्रेनेज सिस्टम इस समस्या को और भी बड़ा बना रहा है।
दिल्ली और उत्तर भारत: सूखे की गर्मी से बेहाल
जहां मुंबई डूब रहा है, वहीं दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में जून का महीना पूरी तरह सूखा रहा। बारिश की कमी के कारण तापमान और आर्द्रता दोनों बढ़ गए हैं, जिससे लोगों को गर्मी से कोई राहत नहीं मिल पा रही।
एल-नीनो का सबसे ज्यादा असर उत्तर-पश्चिम भारत पर पड़ता है। इस बार मॉनसून ट्रफ दक्षिण की ओर ज्यादा सक्रिय रहा, जिससे उत्तर भारत तक नमी नहीं पहुंच पाई। साथ ही, पश्चिमी विक्षोभ भी कमजोर रहे। इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई अभी भी प्रभावित है।
क्या आईओडी (इंडियन ओशन डाइपोल) कोई राहत दे सकता है?
मौसम विशेषज्ञों की नजरें इस समय हिंद महासागर आईओडी (IOD) पर भी टिकी हैं। आईओडी एक ऐसा मौसमी पैटर्न है जो हिंद महासागर में बनता है। अगर आईओडी पॉजिटिव रहता है, तो यह एल-नीनो के कुछ नकारात्मक प्रभावों को बैलेंस कर सकता है और भारत में बारिश में इजाफा कर सकता है। हालांकि, 2026 में अभी तक इसका कोई बड़ा सकारात्मक प्रभाव देखने को नहीं मिला है।

ये हालात कब तक रहेंगे?
आईएमडी के वेदर मैप और जलवायु मॉडल्स की मानें तो एल-नीनो पूरे मॉनसून सीजन (जून से सितंबर) तक सक्रिय रहेगा और सर्दियों तक और मजबूत हो सकता है।
- जुलाई-अगस्त: ये दोनों महीने भारतीय मॉनसून के लिए सबसे क्रूचियल होते हैं। अनुमान है कि इन महीनों में भी बारिश की कमी बनी रहेगी।
- असमानता बरकरार: जुलाई के अंत या अगस्त तक अनियमित बारिश का पैटर्न जारी रहेगा। कुछ इलाकों (खासकर पूर्वी और पश्चिमी तट) में अचानक भारी बारिश के स्पेल आएंगे, जबकि बड़े हिस्सों (मध्य और उत्तर भारत) में सूखा पड़ा रहेगा।
- सितंबर: इस महीने तक स्थिति में कुछ सुधार की उम्मीद है, लेकिन कुल नुकसान की भरपाई मुश्किल है।






















