Mumbai News: मुंबई से एक दिलदहला देने वाली खबर सामने आई है। चेंबूर इलाके में दोपहर के समय एक स्कूल बस पर अचानक पेड़ गिर जाने से हड़कंप मच गया। इस भयानक दुर्घटना में एक मासूम छात्र की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि नगर निगम (BMC) की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है, क्योंकि स्थानीय लोगों ने पहले ही इस पेड़ को खतरनाक बताते हुए इसे हटाने की मांग उठाई थी। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
जाने हादसे के बारे में
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह भयानक हादसा आज दोपहर लगभग 2 बजकर 50 मिनट पर हुआ। तिलकनगर स्थित प्रतिष्ठित ‘यूनिवर्सल स्कूल’ की बस अपने नियमित रूट पर चल रही थी और उसमें स्कूल से घर लौट रहे बच्चे सवार थे। जैसे ही बस चेंबूर के 11 नंबर रोड पर पहुंची, तभी अचानक एक विशाल पेड़ बिजली के खंभों और तारों से टकराते हुए सीधा बस के ऊपर आ गिरा।
पेड़ इतना भारी था कि बस की छत पूरी तरह से धसक गई और खिड़कियां चकनाचूर हो गईं। इस हादसे के वक्त बस के अंदर बच्चों का चीखना-चिल्लाना सुनाई दे रहा था। हादसा इतना अचानक और भयंकर था कि बच्चे समझ ही नहीं पाए कि क्या हो गया। एक छात्र इस हादसे में बुरी तरह पेड़ की चपेट में आ गया, जिसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
रेस्क्यू और अस्पताल में भर्ती
हादसे की जानकारी मिलते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग, पास से गुजर रहे वाहन चालकों और दुकानदारों ने तत्परता दिखाई। किसी तरह बस के शीशे तोड़कर और दरवाजों से रास्ता बनाकर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। दमकल विभाग और पुलिस को तुरंत सूचना दी गई।
घायल बच्चों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। इनमें से 4 सबसे ज्यादा घायल छात्रों को चेंबूर के जेन अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। बाकी घायल बच्चों को भी अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चों पर नजर बनाए हुए है। हादसे की खबर फैलते ही अस्पतालों के बाहर बच्चों के माता-पिता की भीड़ जमा हो गई।
बीएमसी की चली लापरवाही
प्राप्त जानकारी के अनुसार चेंबूर के 11 नंबर रोड पर मौजूद पेड़ पहले से ही जर्जर हालत में थे और आसमान में झूल रहे तारों के कारण ये किसी भी वक्त गिर सकते थे। स्थानीय निवासियों ने इस खतरे को भांपते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के उच्च अधिकारियों को कई पत्र लिखकर इन पेड़ों की छंटाई कराने या इन्हें पूरी तरह से काटने की मांग की थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी इसी इलाके में एक पेड़ गिरकर नुकसान पहुंचा चुका है। लेकिन नगर निगम प्रशासन ने कई पत्रों और शिकायतों के बावजूद आंखें मूंद लीं। मौसम विभाग ने भी बारिश का अलर्ट दे रखा था, ऐसे में पेड़ों की ट्रिमिंग का काम पहले ही हो जाना चाहिए था। बीएमसी की इस घोर लापरवाही की वजह से आज एक परिवार का सारा सहारा छिन गया।
हादसे के बाद स्थानीय नेताओं और आम जनता में भारी रोष है। लोगों की मांग है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और जिन बीएमसी अधिकारियों ने पेड़ काटने की मांग को अनदेखा किया, उनके खिलाफ हत्या के इरादे से हमला और लापरवाही के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।























