Delhi News: दिल्ली सरकार द्वारा हर समय ‘स्वच्छ दिल्ली’ और बेहतर बुनियादी ढांचे के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन राजधानी के मोहन गार्डन इलाके की वर्तमान स्थिति इन सभी दावों की कलई खोल रही है। पिछले कई महीनों से इस क्षेत्र में सीवर जाम की समस्या गंभीर रूप धारण कर चुकी है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के अधिकारियों की अकड़ और घोर लापरवाही के चलते यहां की गलियां गंदे पानी और गंदगी का एक बड़ा नाला बनकर रह गई हैं। आम जनता की परेशानियों को देखते हुए लगता ही नहीं कि इस मामले में कोई सुधार होने वाला है।
गलियों में फैला गंदा पानी बना जहर का धुआं
मोहन गार्डन राजापुर खुर्द नियर बाय राहुल प्रॉपटी गली नंबर 1 के निवासियों के लिए घर से निकलना एक चुनौती बन चुका है। सीवर लाइनों का लंबे समय से जाम रहना कोई छोटी बात नहीं है। गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता है, जिससे आने-जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और हर तरफ भयंकर दुर्गंध फैली रहती है। लोगों को मजबूरन मुंह पर कपड़ा बांधकर या जूते पहनकर ही अपने घरों से बाहर निकलना पड़ रहा है।
बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर गंभीर खतरा
स्वच्छता के अभाव में यह इलाका बीमारियों का गढ़ बनता जा रहा है। सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर दिख रहा है। लगातार गंदगी और दुर्गंध के संपर्क में रहने से बच्चे बार-बार बीमार पड़ रहे हैं। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और पेट संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अभिभावकों में अपने बच्चों को लेकर गहरी चिंता है, क्योंकि इलाके में कोई भी सुरक्षित जगह नहीं बचा है जहां वे खेल सकें। सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए भी लंबी कतारें लगनी पड़ रही हैं, जिससे आर्थिक तंगी भी लोगों पर मंडरा रही है।
शिकायतों का ढेर, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती
सबसे दुखद पहलू यह है कि लोगों ने शिकायत करने की कोई कमी नहीं छोड़ी है। स्थानीय लोगों ने जल बोर्ड के अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को इस मुद्दे से अवगत कराया। ऑनलाइन पोर्टल्स पर शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। मोहन गार्डन के अधिकारियों का रवैया ऐसा लगता है जैसे उन्हें इस मामले से कोई मतलब नहीं है। शिकायतें फाइलों में दफन होकर रह गई हैं और जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
पुरानी और नई सरकार में भेदभाव का अहसास
इस पूरे प्रकरण ने एक राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है। मोहन गार्डन के निवासियों का कहना है कि पहले जब पुरानी सरकार (आम आदमी पार्टी) कार्यकाल में थी, तो शिकायतों पर थोड़ी बहुत कार्रवाई तो होती थी। लेकिन अब जब से भाजपा (BJP) की नई सरकार आई है, तो तस्वीर बिल्कुल बदल गई है। लोगों को लगता है कि जल बोर्ड और निगम के अधिकारी जानबूझकर नई सरकार को बेइज्जत करने और उसके कामकाज को एवॉयड (Avoid) करने की कोशिश कर रहे हैं।
विधायक से लेकर एलजी तक का चक्कर, लेकिन राहत नहीं
परेशान लोगों ने क्षेत्र के विधायक से मिलकर इस समस्या को उठाया। जब कुछ नहीं बना, तो लोगों ने ऑनलाइन माध्यमों से दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर (LG) को शिकायत भेजी। उच्च स्तर पर शिकायत पहुंचने के बावजूद जल बोर्ड के अधिकारियों की नींद नहीं टूटी। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि दिल्ली जल बोर्ड और एमसीडी के तंत्र में कितनी गहरी खामियां हैं। अधिकारी अपनी कुर्सी की इज्जत तो बचाना चाहते हैं, लेकिन आम आदमी की समस्याओं को दूर करने में कोई दिलचस्पी नहीं लेते।
अधिकारियों का ‘अनाड़ीपन’ या ‘जानबूझकर की गई लापरवाही’?
महीनों से चल रहे सीवर जाम को किसी एक दिन में साफ नहीं किया जा सकता, लेकिन मोहन गार्डन जैसे घनी आबादी वाले इलाके में इतने लंबे समय तक अभियांत्रिकी समस्या का समाधान न कर पाना, या तो अधिकारियों की अक्षमता का प्रमाण है, या फिर यह एक तरह से राजनीतिक षड्यंत्र है। ऐसा लग रहा है कि नौकरशाही अपने ही तरीके से नई सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है, ताकि जनता का गुस्सा सरकार के खिलाफ मोड़ा जा सके।





















