Delhi News: दिल्ली के मोहन गार्डन क्षेत्र के बुध बाजार राजापुर खुर्द में आज भी बुनियादी सुविधाओं को लेकर हालात बेहद खराब हैं। यहां की सफाई व्यवस्था और सीवरेज सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गया है। इस क्षेत्र में साफ-सफाई की आफत इस कदर बीमारी और परेशानी का रूप ले चुकी है कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। सबसे बड़ी आफत और मुद्दा यहां का ‘सीवर जाम’ बन चुका है, जो हर कोने में कहीं ना कहीं अपना डंक मार ही रहा है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
गंदगी का ऐसा आलम कि नाक बंद करने पर मजबूर हैं लोग
मोहन गार्डन की गलियों और मुख्य सड़कों पर आए दिन सीवर जाम होने की समस्या देखने को मिलती है। गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता है और एक अजीब सी बदबू फैल जाती है। लोगों को अपने ही घरों के बाहर निकलने पर नाक बंद करनी पड़ती है। सीवर का गंदा पानी घरों तक घुसने लगता है, जिससे गलियों में गंदगी का ऐसा आलम हो जाता है कि बच्चों और बुजुर्गों का बाहर निकलना दूभर हो जाता है। वाहन चालकों को भी इस गंदे पानी से गुजरने में भारी परेशानी होती है। कई बार तो इस गंदे पानी के कारण सड़कों पर गिरकर लोगों को चोटें भी लग जाती हैं।
बीमारियों का अड्डा बनता जा रहा है मोहन गार्डन
लगातार सीवर जाम और सड़कों पर गंदा पानी बहने का सबसे बड़ा खतरा स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इस गंदगी से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। साथ ही, लगातार बदबू और संक्रमित माहौल के कारण लोगों में त्वचा की बीमारियां, एलर्जी और सांस संबंधी परेशानियां भी बढ़ रही हैं। आने-जाने वाले लोगों और राहगीरों के लिए यह तकलीफदेह स्थिति अब बर्दाश्त से बाहर हो गई है।
माहेन गार्डन दिल्ली जल बोर्ड का ‘दिखावटी’ ऑफिस
इस पूरे मामले का सबसे दुखद पहलू यह है कि जिस विभाग को इन समस्याओं को दूर करना चाहिए, वही पूरी तरह से निष्क्रिय और लापरवाह नजर आ रहा है। मोहन गार्डन में दिल्ली जल बोर्ड (Jal Board) का एक कार्यालय स्थित है। लेकिन यहां का नजारा कुछ और ही बयां कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह ऑफिस सिर्फ ‘दिखावटी’ है। जनता जब भी सीवर जाम की शिकायत लेकर इस ऑफिस तक पहुंचती है, तो उसे कोई ठोस समाधान नहीं मिलता। शिकायत दर्ज होने के बाद भी महीनों तक कोई काम नहीं होता है। यह ऑफिस सिर्फ नाम के लिए और कागजों पर खुला हुआ है, जबकि जमीनी हकीकत में यहां के अधिकारियों और कर्मचारियों का रवैया उदासीन बना हुआ है। जनता की समस्याओं को लेकर इस दफ्तर में कोई संवेदना नजर नहीं आती।
शिकायतों का अंबार लगाना भी पड़ा बेअसर
आम जनता का कहना है कि वे कई बार फोन पर शिकायत कर चुके हैं, तो कई बार ऑफलाइन जाकर अधिकारियों से मिलकर गुहार लगा चुके हैं। कुछ लोगों ने तो ऑनलाइन पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन नतीजा शून्य है। एक बार जब बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है, तो जल बोर्ड की टीम मशीन लेकर आती है, लेकिन वह ‘जुगाड़’ के तौर पर सीवर को खोल देती है। कुछ घंटों बाद जैसे ही टीम वापस चली जाती है, समस्या फिर वहीं से शुरू हो जाती है। कोई स्थायी समाधान नहीं किया जाता।
सवाल यह उठता है कि आखिर जल बोर्ड का यह ऑफिस मोहन गार्डन में क्यों बनाया गया? क्या इसका मकसद सिर्फ वेतन खाना और दफ्तर संभालना है? अगर शिकायतों पर सुनवाई नहीं होगी और महीनों तक समस्या यूं ही बनी रहेगी, तो इस विभाग के अस्तित्व पर ही सवाल उठने लगते हैं। इस दिखावटी ऑफिस के चलते लोगों का भरोसा पूरी तरह से टूट चुका है। न तो जनप्रतिनिधि इस मामले में गंभीर दिखते हैं और न ही अधिकारी। यही वजह है कि आम जनता भी अब शिकायतों से थक चुकी है और हताश है।
मोहन गार्डन के निवासियों की स्पष्ट मांग है कि इस दिखावटी जल बोर्ड ऑफिस को चेताया जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। सीवर लाइनों को जल्द से जल्द नई तकनीक (जैसे- सीवर जेटिंग मशीन) के माध्यम से पूरी तरह साफ किया जाए, न कि बस औपचारिकता पूरी करने के लिए जुगाड़ किया जाए। जिन अधिकारियों पर शिकायतों के बावजूद काम न करने का आरोप लग रहा है, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए।






















