दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार और पुनर्गठन की गर्माई चर्चाएं हैं। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा पार्टी की नई संगठनात्मक टीम का ऐलान करने के बाद, अब सबकी निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट पर टिकी हैं।
सूत्रों का मानना है कि अगले कुछ महीनों में मंत्रिपरिषद में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसमें युवा और महिला चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की प्रबल संभावना है।
हालांकि, यह सब केवल राजनीतिक अटकलें हैं, क्योंकि अभी तक सरकार या पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिर भी, आइए विस्तार से समझते हैं कि इन चर्चाओं का आधार क्या है:
संविधान के नियम
वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में उनको मिलाकर कुल 69 सदस्य हैं। इसमें 29 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 34 राज्य मंत्री शामिल हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के मुताबिक, लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक केंद्रीय मंत्री नहीं हो सकते हैं। इस गणित के अनुसार केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्रियों की बहाली हो सकती है।
गणित साफ है कि इस समय मोदी कैबिनेट में 12 पद पूरी तरह से खाली हैं। हाल ही में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दिया है, जिसके बाद इन रिक्तियों को भरने की जरूरत और बढ़ गई है।
क्या अनुभवी चेहरों से लेकर युवाओं तक का होगा सफर?
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल (NDA 3.0) की शुरुआत में जो कैबिनेट बनी थी, उसमें अनुभव का पैमाना काफी भारी था। लगभग 65 प्रतिशत से अधिक मंत्री 51 से 70 वर्ष के आयु वर्ग से थे, जबकि 31 से 50 वर्ष के युवा चेहरों की हिस्सेदारी महज 24 प्रतिशत के आसपास थी।
अब सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस अंतर को कम करना चाहती है। आने वाले फेरबदल में युवा सांसदों और दमदार महिला नेत्रियों को मंत्रिमंडल में जगह देकर कैबिनेट का औसत आयु घटाया जा सकता है।
14 मंत्रियों पर लदा है दोहरा बोझ
सूत्रों के अनुसार, फेरबदल की एक बड़ी वजह मंत्रियों पर बढ़ा हुआ काम का बोझ भी है। वर्तमान में 14 केंद्रीय मंत्रियों के पास एक से अधिक महत्वपूर्ण मंत्रालयों का प्रभार है। इनमें अमित शाह, जे.पी. नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल, एच.डी. कुमारस्वामी, पीयूष गोयल, ललन सिंह, प्रह्लाद जोशी, अश्विनी वैष्णव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, गजेंद्र सिंह शेखावत, किरेन रिजिजू, मनसुख मांडविया और जी. किशन रेड्डी जैसे दिग्गज शामिल हैं। उम्मीद है कि नए विस्तार में इन वरिष्ठ नेताओं से कुछ अतिरिक्त विभाग लेकर नए चेहरों को सौंपे जा सकते हैं।
चुनावी समीकरण और ‘परक्रामवादियों’ पर नजर
किसी भी कैबिनेट फेरबदल का सबसे बड़ा आधार आने वाले चुनावी समीकरण होते हैं। 2027 में पंजाब सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। इसी के तहत:
- आप पार्टी के बागी: आप पार्टी छोड़कर भाजपा में आए 7 राज्यसभा सांसदों में से किसी को पंजाब की राजनीति को संभालने के लिए मंत्री पद मिल सकता है।
- शिवसेना (यूबीटी) गुट: शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के भाजपा में शामिल होने से इस गुट की संख्या 13 हो गई है। ऐसे में श्रीकांत शिंदे जैसे चेहरों को कैबिनेट में जगह दिए जाने की चर्चा तेज है।
- अन्य दल: राजनीतिक अफसानों में DMK, NCP-SP, और अकाली दल जैसे दलों के NDA में शामिल होने और उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलने की भी बातें हो रही हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों से बने गुट (NCPI) को लेकर भी अटकलें हैं।
भाजपा की राजनीति में हमेशा से क्षेत्रीय संतुलन को लेकर विशेष रणनीति बनती है। सूत्रों का मानना है कि इस बार उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से नए युवा और महिला चेहरों को मौका दिया जा सकता है।

























