कॉकरोच जनता पार्टी नोएडा- गाजियाबाद चींटी जनता पार्टी बिल्डर पंजाब-हरियाणा बिहार-झारखंड क्राइम न्यूज़ फिल्म न्यूज राजनीतिक न्यूज लाइफस्टाइल जरा हटके खेल जर्नल नॉलेज

---Advertisement---

मेनका गांधी के बयान पर जैन समाज ने जताई कड़ी आपत्ति

Delhi News: पत्र में स्पष्ट किया गया है कि दिगंबर जैन संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली मयूर पिच्छी केवल प्राकृतिक रूप से झड़े हुए मोरपंखों से बनाई जाती है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म जीवों की रक्षा करना तथा जैन धर्म के मूल सिद्धांत ‘अहिंसा’ का पालन करना है।

मयूर पिच्छी टिप्पणी पर भगवान महावीर देशना फाउंडेशन हुआ मुखर

HIGHLIGHTS

  • प्राकृतिक रूप से झड़े मोरपंखों से बनती है मयूर पिच्छी
  • सूक्ष्म जीवों की रक्षा के लिए संन्यासी करते पिच्छी उपयोग
  • अहिंसा के मूल सिद्धांत का प्रतीक है जैन मयूर पिच्छी
  • सनातन और जैन संस्कृति में पवित्र माना जाता है मोरपंख
  • श्रीकृष्ण के मुकुट की तरह पूजनीय है जैन मयूर पिच्छी

Delhi News: भगवान महावीर देशना फाउंडेशन के निदेशक मनोज कुमार जैन ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को एक औपचारिक पत्र भेजकर दिगंबर जैन संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली मयूर पिच्छी के संबंध में उनके हालिया कथनों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

फाउंडेशन द्वारा भेजे गए पत्र में कहा

फाउंडेशन द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उक्त बयान से देशभर के जैन समाज, विशेषकर दिगंबर जैन संत समुदाय तथा भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि दिगंबर जैन संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली मयूर पिच्छी केवल प्राकृतिक रूप से झड़े हुए मोरपंखों से बनाई जाती है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म जीवों की रक्षा करना तथा जैन धर्म के मूल सिद्धांत ‘अहिंसा’ का पालन करना है।

फाउंडेशन ने किया यह उल्लेख

फाउंडेशन ने यह भी उल्लेख किया कि मोरपंख न केवल जैन परंपरा में, बल्कि सनातन संस्कृति में भी अत्यंत पवित्र और श्रद्धा का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट में सुशोभित मोरपंख भारतीय आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण अंग है। ऐसे में बिना पर्याप्त प्रमाण के लगाए गए आरोप समाज में भ्रम उत्पन्न करने के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकते हैं।

फाउंडेशन ने मेनका गांधी के पशु कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए योगदान का सम्मान करते हुए उनसे आग्रह किया है कि वे अपने वक्तव्य की पुनः समीक्षा करें। यदि उनके कथन तथ्यात्मक रूप से असत्य या भ्रामक पाए जाते हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से वापस लेते हुए जैन संत समुदाय एवं श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए खेद व्यक्त करें।

धार्मिक सद्भाव और समरसता की पहल

इसके अतिरिक्त, फाउंडेशन ने सुझाव दिया है कि भविष्य में किसी भी धार्मिक परंपरा या आस्था से जुड़े विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पूर्व संबंधित समुदाय के प्रतिनिधियों एवं विषय विशेषज्ञों से संवाद स्थापित किया जाए, जिससे समाज में सौहार्द, आपसी सम्मान और विश्वास की भावना को और अधिक मजबूती मिल सके।

फाउंडेशन ने आशा व्यक्त की है कि इस विषय की गंभीरता को समझते हुए सकारात्मक और संवेदनशील कदम उठाए जाएंगे, जिससे धार्मिक सद्भाव और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now