Aamras Food Poisoning Case: गर्मियों का मौसम और फलों का राजा ‘आम’। आम का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके पसंदीदा इस फल में छिपा मजा आपकी जान ले सकता है? मुंबई में तरबूज खाने से हुई फूड पॉइजनिंग की दिल दहला देने वाली घटना के बाद अब महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक परिवार के खुशियों भरे डिनर की मेज को एक पल में मौत का सन्नाटा घेर लिया, जब परिवार के 7 सदस्यों को आमरस पीने के बाद अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
खुशियों भरा डिनर बना मौत का खेल
घटना अहिल्यानगर के जायभाय (Jaybhay) परिवार की है। जैसा कि हर गर्मी में होता है, परिवार ने बाजार से ताजे आम खरीदे। शाम को खाने के दौरान परिवार के सभी सदस्यों ने बड़े चाव से आमरस का सेवन किया। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई। डिनर के तुरंत बाद घर का माहौल बदलने लगा।
पहले तो सबको थोड़ी बेचैनी महसूस हुई, लेकिन कुछ ही पलों में स्थिति गंभीर हो गई। परिवार के सदस्य एक-एक करके जमीन पर गिरने लगे। डिनर टेबल पर सिर्फ थालियां और बेहोश पड़े शरीर रह गए। इस घटना में एक 4 साल की मासूम बच्ची भी शामिल थी, जो आमरस पीने के बाद बेहोश हो गई। पूरे घर में चीख-पुकार मच गई, लेकिन बेहोश हो चुके लोगों में मदद मांगने की ताकत नहीं बची थी।
भाई की सूझ-बूझ ने बचाई परिवार की जान
इस हादसे में सबसे बड़ी राहत और भाग्य की बात यह रही कि परिवार का एक सदस्य, जो बड़ा भाई था, उस समय डिनर पर मौजूद नहीं था। वह अपनी दिनचर्या के अनुसार देर से खाना खाता था। जब वह खाना खाने के लिए आया, तो उसे अपने परिवार के सभी सदस्यों को जमीन पर पड़े और बेहोश हालत में देखकर दुनिया ही सामने से उजड़ गई।
लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और बिना एक पल भी गंवाए तत्काल मदद के लिए कदम उठाए। उसने सभी बेहोश सदस्यों को उठाया और उन्हें पास के एशियन हॉस्पिटल (Asian Hospital) में भर्ती कराया। अगर वह भी उस समय खाना खा लेता, तो शायद किसी को मदद मिलनी मुश्किल हो जाती और यह हादसा एक बड़ी त्रासदी में बदल सकता था।
अस्पताल में तीन दिन तक चला जीवन-मृत्यु का संघर्ष
एशियन हॉस्पिटल के डॉक्टरों के लिए यह कोई आम मामला नहीं था। अस्पताल के डॉ. सचिन पांडुले (Dr. Sachin Pandule) ने बताया कि जब मरीजों को अस्पताल लाया गया, तो सभी की हालत बेहद नाजुक थी। सभी पूरी तरह से बेहोश थे और उनका नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) पूरी तरह से प्रभावित लग रहा था।
डॉक्टरों की टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया। लगातार तीन दिनों तक चले गहन उपचार (Intense Treatment) के बाद अस्पताल ने राहत की खबर दी। तीन दिन की कड़ी मेहनत के बाद 7 में से 6 सदस्यों की स्थिति में सुधार हुआ और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। हालांकि, परिवार के एक सदस्य का इलाज अभी भी जारी है, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को स्थिर बताया है, जिससे परिवार को थोड़ी सांत्वना मिली है।
आखिरी बार आम में क्या था जो बन गया जहर?
डॉक्टरों के मुताबिक, यह सीधे-सीधे ‘फूड पॉइजनिंग’ का मामला है। प्राथमिक जांच और लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों का मानना है कि आमों को पकाने के लिए खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया गया था। आमतौर पर, बाजार में जल्दी पकाने के लिए ‘कैल्शियम कार्बाइड’ (Calcium Carbide) नामक रसायन का उपयोग किया जाता है।
कैल्शियम कार्बाइड एक ऐसा रसायन है जो न केवल फलों को जल्दी पकाता है, बल्कि यह मानव शरीर के लिए घातक होता है। जब यह रसायन शरीर के अंदर जाता है, तो यह जहर की तरह काम करता है। इसका सीधा असर हमारे नर्वस सिस्टम पर पड़ता है, जिससे व्यक्ति को तेज बेचैनी, चक्कर आना और फिर बेहोशी जैसे लक्षण होते हैं। जायभाय परिवार के साथ भी यही हुआ।
फलों का राजा या जान का दुश्मन? ऐसे करें पहचान
आम (Mango) हर किसी को पसंद है, लेकिन बाजार में बिकने वाले ‘रसायनिक आम’ आपकी खुशी को गम में बदल सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप आम खरीदते और खाते समय कुछ सावधानियां बरतें। यहां कुछ ऐसी टिप्स दी गई हैं जिनसे आप खराब आम की पहचान कर सकते हैं और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं:
1. रंग पर करें गौर
अगर आप देखें कि आम पूरी तरह से एक समान पीले या गोल्डन रंग का है और उस पर एक भी हरा धब्बा नहीं है, तो सावधान हो जाएं। प्राकृतिक रूप से पके आमों का रंग थोड़ा असमान होता है। ज्यादा पक्का और चमकदार रंग रसायन के इस्तेमाल का संकेत हो सकता है।
2. पानी में भिगोना है जरूरी
आम खाने से कम से कम 1 से 2 घंटे पहले उन्हें पानी से भरी बाल्टी में भिगो दें। इस प्रक्रिया से फल की सतह पर लगे रसायन और कीटनाशक कण पानी में घुल जाते हैं। इससे आम की ऊपरी परत का तापमान भी कम होता है और वह थोड़ा सुरक्षित हो जाता है।
3. छिलका उतारने में रखें सावधानी
आम को कभी भी सीधे मुंह से काटकर न खाएं। रसायनों का असर सबसे ज्यादा छिलके के ठीक नीचे की परत में होता है। हमेशा आम को अच्छी तरह धोकर, चाकू से छिलका उतारकर ही खाना चाहिए।
4. खुशबू से समझें सच
प्राकृतिक रूप से पके आम की डंठल के पास एक मीठी और सौंधी खुशबू आती है, जो मन को मोह लेती है। जबकि रसायन से पकाए गए आमों में यह खुशबू नहीं होती, बल्कि उनमें से एक तीखी या दवा जैसी गंध आ सकती है। अगर आपको ऐसी ही कोई गंध आए, तो उस आम को तुरंत फेंक दें।
5. सफेद पाउडर का हो सकता है खतरा
अगर आम की सतह पर कहीं भी सफेद पाउडर जैसा निशान दिखाई देता है, तो समझ लें कि उसे पकाने के लिए कार्बाइड पाउडर का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे आमों से दूरी बनाए रखें।
लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अक्सर लोगों को लगता है कि फल खाने के बाद हल्का सिरदर्द या पेट में मरोड़ सामान्य बात है, लेकिन यह फूड पॉइजनिंग के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। अगर आम या किसी भी फल के सेवन के तुरंत बाद आपको सिरदर्द, घमंड, तेज चक्कर आना, जी मिचलाना या पेट खराब जैसा महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें। घरेलू उपायों पर भरोसा करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अहिल्यानगर की यह घटना हम सभी के लिए एक सबक है। स्वाद के चक्कर में हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं कि हम क्या खा रहे हैं। थोड़ी सावधानी और सजगता आपके और आपके परिवार की जान बचा सकती है। इस गर्मी में आम का मजा लें, लेकिन सावधानी बनाए रखें।
























