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मन की बात की 135वीं कड़ी – प्रधानमंत्री का सम्बोधन

PM Modi's 'Mann Ki Baat' message: जून महीने में ही एयरस्पेस में भी भारत ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। C-295 विमान का निर्माण ‘Made in India’ है। यह विमान अपनी पहली उड़ान पूरी कर चुका है, और भारत में ही 40 से अधिक विमान बनाए जा रहे हैं। यह भारतीय MSME और एयरोस्पेस सेक्टर को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

मन की बात की 135वीं कड़ी में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ

HIGHLIGHTS

  • देश की सुरक्षा में स्वदेशी का योगदान
  • आत्मनिर्भर भारत की नई ऊंचाइयां
  • भारत की सफलतम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
  • जनभागीदारी से राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा
  • स्वदेशी प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण

PM Modi’s ‘Mann Ki Baat’ message: ‘मन की बात’ में एक बार फिर आप सभी से जुड़कर मुझे अत्यंत हर्ष हो रहा है। यह वर्ष 2026 का आधा भाग समाप्त होने को है। इन छह महीनों में हमने देश की अनेक उपलब्धियों पर चर्चा की है, जो देशवासियों के समर्पण और प्रयास का परिणाम हैं। जून महीने में भारत ने अनेक ऐसी सफलता प्राप्त की हैं, जो हर देशवासी को गर्व से भर देती हैं। ये उपलब्धियां देश की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और विकास के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। आज मैं आप सभी के साथ इन सफलताओं, प्रयासों और महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा करना चाहता हूँ।

देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता

हाल ही में मुझे कोलकाता में नौसेना से जुड़े एक कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिला। वहाँ INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय नामक तीन स्वदेशी युद्धपोतों का भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इन युद्धपोतों का डिज़ाइन, निर्माण और तकनीक का अधिकांश हिस्सा स्वदेशी है। यह हमारे देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। देश की सुरक्षा में यह महत्वपूर्ण कदम है, जो दर्शाता है कि भारत अब अपने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है।

विमानन क्षेत्र में भी भारत का परचम

जून महीने में ही एयरस्पेस में भी भारत ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। C-295 विमान का निर्माण ‘Made in India’ है। यह विमान अपनी पहली उड़ान पूरी कर चुका है, और भारत में ही 40 से अधिक विमान बनाए जा रहे हैं। यह भारतीय MSME और एयरोस्पेस सेक्टर को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने के साथ-साथ, यह हमारे युवाओं के स्वावलंबन का भी प्रतीक है। साथ ही, DRDO ने स्वदेशी ‘Long Range Land Attack Cruise Missile’ का सफल परीक्षण किया है। इस मिसाइल का विकास भारत की समुद्री और वायु सीमा की सुरक्षा को मजबूत करता है। यह सभी प्रयास मिलकर भारत को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम हैं।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और विश्व योग

इस महीने का एक बड़ा आयोजन था ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’। इस बार दुनिया के 2500 से अधिक स्थानों पर योग कार्यक्रम हुए। भारत में करोड़ों लोगों ने योग में भाग लिया। अहमदाबाद में आयोजित ‘विश्व योगासन चैम्पियनशिप’ में भारत ने 114 पदक जीते, जिनमें 102 स्वर्ण पदक शामिल हैं। भारत इस पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा। यह हमारे योग और स्वस्थ जीवनशैली की वैश्विक पहचान का प्रतीक है। मैं सभी विजेता खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई देता हूँ।

राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी

किसी भी राष्ट्र की आत्मा उसके लोग होते हैं। जब देश के लोग संकल्प लेते हैं, तो कोई भी शक्ति उन्हें अपने लक्ष्य से नहीं हटा सकती। भारत में जन भागीदारी की यह ताकत अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी भावना के साथ, मैंने कुछ समय पहले अपने देशवासियों से कुछ आग्रह किए थे। जैसे, सोना खरीदने से बचना, विदेश यात्रा को टालना, कारपूलिंग को बढ़ावा देना, और प्राकृतिक खाद का उपयोग करना। इन अपीलों का देशभर में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। अनेक परिवारों ने तय किया है कि इस बार सोना नहीं खरीदेंगे, पुराने सोने को रीसायकल कर नए गहने बनाएंगे। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अपने अनुभव साझा किए हैं। यह जनभागीदारी ही है, जो देश को मजबूत बनाती है।

स्वदेशी प्रयास और सामाजिक पहल

मध्यम प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की बहनों ने एक प्रेरणादायक पहल की है। उन्होंने अपने शहर में प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा कर उससे Eco-bricks बनाना शुरू किया। इन Eco-bricks का उपयोग सार्वजनिक स्थानों को सुंदर बनाने में किया जा रहा है। यह प्रयास प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण संरक्षण का अच्छा उदाहरण है। इसी तरह, मेघालय में रूट ब्रिज, यानी जड़ों से बने प्राकृतिक पुल, हमारी परंपरा का अनमोल धरोहर हैं। इन जीवित ब्रिजों का निर्माण वर्षों में होता है। मेघालय के लोग इनकी देखभाल कर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इन ब्रिजों की संख्या का पता लगाने और संरक्षण का जिम्मा संभाला है। यह हमारे देश की प्रकृति और मानव सृजनशीलता का अनूठा उदाहरण है।

सांस्कृतिक और पर्यावरणीय जागरूकता

गणेश उत्सव के दौरान, मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि आप मिट्टी की मूर्तियों का ही प्रयोग करें। प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों से हमारी नदियों और पर्यावरण को नुकसान होता है। स्थानीय कारीगरों से मिट्टी की मूर्तियों का निर्माण कराकर, हम ‘Vocal for Local’ का समर्थन भी कर सकते हैं। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण का कदम है, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं को भी मजबूत करता है।

प्राचीन ज्ञान और आधुनिक टेक्नोलॉजी का मेल

आधुनिक तकनीक में भी हम अपने प्राचीन ज्ञान को शामिल कर सकते हैं। भारतीय विश्वविद्यालयों में ‘Artificial Intelligence’ और ‘Data Science’ की पढ़ाई शुरू हो रही है। नालंदा विश्वविद्यालय जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्र का पुनः जागरण हो रहा है। वेद-शास्त्रों की परंपरा को आधुनिक अनुसंधान से जोड़ते हुए, हम नई पीढ़ी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं। इसी क्रम में, दिल्ली के केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने डिजिटल युग में संस्कृत भाषा और ग्रंथों को संरक्षित करने का प्रयास किया है। यह हमारी परंपरा और आधुनिकता का मेल है।

भारतीय संस्कृति का विश्वव्यापी फैलाव

भारत की संस्कृति दुनिया के हर कोने में पहुंच रही है। Caribbean के Dominican Republic में भारतीय संस्कृति का प्रभाव दिख रहा है। वहाँ के लोग वैदिक मंत्रों का अध्ययन कर रहे हैं, मंत्र उच्चारण कर रहे हैं। यह प्रयास हमारी परंपराओं को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का अनुपम उदाहरण है। हम सबको अपने देश की इस सांस्कृतिक विरासत पर गर्व है।

धरोहर संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान

मेघालय के रूट ब्रिज, जिसे ‘जीवित पुल’ कहा जाता है, हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं। इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। स्थानीय समुदाय इन पुलों की देखभाल कर रहे हैं। भारत सरकार ने इन रूट ब्रिजों को UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का प्रयास किया है। इन प्रयासों से न केवल पर्यावरण का संरक्षण होगा, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रहेगी। आप भी यदि इन ब्रिजों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करें, तो यह विश्वभर में भारत की अनोखी धरोहर को फैलाने का माध्यम बनेगा।

स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता

मध्य प्रदेश के ब्यावरा की बहनों ने अपने प्रयास से शहर के प्लास्टिक कचरे को Eco-bricks में बदला है। इस पहल ने शहर की खूबसूरती को बढ़ाया है और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया है। यह छोटे-छोटे प्रयास ही हैं, जो बड़े बदलाव लाते हैं। हमें अपने आसपास की स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना चाहिए।

समापन और अपील

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारी ताकत हमारे लोग हैं। जब मन में संकल्प हो और समाज का साथ हो, तो कोई भी बदलाव असंभव नहीं है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप अपने आस-पास की छोटी-छोटी पहल को पहचानें और उन्हें प्रोत्साहित करें। आने वाले महीने में हम फिर मिलेंगे, नई कोशिशों और प्रयासों की चर्चा करेंगे। तब तक अपने परिवार और समाज का ध्यान रखें। बारिश का पानी बचाने के लिए ‘Catch the Rain’ अभियान को मजबूत बनाएं। पानी की एक-एक बूंद की कीमत है, इसे सुरक्षित करें। आइए, हम सब मिलकर अपने देश को, अपनी धरती को, अपने पर्यावरण को बेहतर बनाने में अपना योगदान दें।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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