Stock Market: शेयर बाजार में सोमवार को भीषण गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के चेहरे पर उमंग की जगह चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी दिनभर टूटते रहे और मार्केट क्लोज होने तक यह गिरावट जारी रही। इस दिन निवेशकों को करीब 12 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
सेंसेक्स-निफ्टी का हाल
बाजार में कारोबार की शुरुआत ही गिरावट के साथ हुई। पिछले बंद 74,532 की तुलना में सेंसेक्स 73,732 पर खुला और आगे चलकर यह 72,558 के निचले स्तर तक पहुंच गया। अंत में, सेंसेक्स 1,836.57 अंक या 2.46 फीसदी की गिरावट के साथ 72,696.39 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी 601.85 अंक फिसलकर 22,512.65 पर पहुंच गया।
12 लाख करोड़ का नुकसान
इस भारी गिरावट ने निवेशकों की जेंद खाली कर दी। बीते शुक्रवार को बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 426 लाख करोड़ रुपये था, जो सोमवार को घटकर 414 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इस तरह, निवेशकों की करीब 12 लाख करोड़ रुपये की रकम स्वाहा हो गई।

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गिरावट के पीछे के 5 बड़े कारण
- मिडिल ईस्ट युद्ध और क्रूड ऑयल:
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने शेयर बाजार पर दबाव डाला है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है और यह $112.9 प्रति बैरल दर्ज किया गया। तेल का सबसे बड़ा आयातक होने के नाते भारत के लिए यह चिंता का विषय है, जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ा। - India VIX में उछाल:
बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाले ‘India VIX’ में तेज उछाल देखने को मिला। यह 15 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 26 के स्तर पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि निवेशकों में घबराहट फैली हुई है और वे जोखिम से बचने का रास्ता अपना रहे हैं। - एशियाई बाजारों में गिरावट:
मिडिल ईस्ट के युद्ध का असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। जापान, कोरिया और हांगकांग के बाजार 4-5 फीसदी तक क्रैश हो गए। इन निगेटिव संकेतों ने भारतीय बाजार का सेंटीमेंट भी बिगाड़ दिया। - रुपये में गिरावट (Sentiment):
रुपये का स्तर भी बाजार के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट खराब हुआ। - रुपये का रिकॉर्ड लो:
शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 93.92 पर पहुंच गया, जो कि भारतीय करेंसी का नया रिकॉर्ड लो-लेवल है। करेंसी का टूटना और डॉलर का मजबूत होना शेयर बाजार की गिरावट की रफ्तार बढ़ाने का एक बड़ा कारण बना।

















