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कानपुर से यूके तक फर्जी डिग्री का बड़ा जालसाज़ी नेटवर्क का पर्दाफाश

UP news: पुलिस ने आरोपियों के पास से अत्याधुनिक उपकरण भी जब्त किए हैं, जिनमें एक एप्पल मैकबुक प्रो, एक एचपी लैपटॉप, सैमसंग डेस्कटॉप, कैनन कलर प्रिंटर, तीन हार्ड डिस्क, वाई-फाई राउटर, 141 जाली मोहरें, 80 स्ट्रिप 3डी मोनोग्राम, 830 ब्लैंक पेपर, 24 डाई और होलोग्राम शामिल हैं।

पुलिस ने बरामद किए 141 जाली मोहरें और हजारों नकली डिग्रियां

HIGHLIGHTS

  • नकली डिग्री और जाली दस्तावेजों का कारोबार
  • लंदन जाने की तैयारी में था गिरोह का मास्टरमाइंड
  • भारत-विदेश में नकली डिग्री बेचने वाला गिरोह गिरफ्तार
  • उच्च शिक्षा की आड़ में फर्जी डिग्री का कारोबार
  • नकली डिग्री और जाली वेरिफिकेशन का जाल

Kanpur News: कानपुर बेकनगंज थाना पुलिस, एसआईटी और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने एक बड़े फर्जी डिग्री गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने पिछले 13 वर्षों से भारत और विदेशों में नकली शैक्षणिक दस्तावेजों का कारोबार चला रहा था। इस गिरोह का मुख्य मकसद था उच्चतम गुणवत्ता वाली जाली डिग्रियां तैयार कर उन्हें विश्वसनीयता के साथ सप्लाई करना, ताकि संबंधित व्यक्ति बिना किसी जाँच के नौकरी, वीजा और अन्य जरूरी दस्तावेजों में उपयोग कर सकें।

गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड जियाउल हसन उर्फ समीर, उर्फ आतिफ, जो खुद ग्राफिक्स डिजाइनिंग का माहिर था, को पुलिस ने कानपुर में छापेमारी कर गिरफ्तार किया। उसके साथ ही चार अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस की जांच में पता चला है कि यह गिरोह अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर नकली डिग्रियों और मार्कशीट्स का निर्माण कर रहा था और उन्हें भारत, सऊदी अरब, कनाडा और यूके जैसे देशों में सप्लाई कर रहा था। पुलिस ने इस पूरे जाली दस्तावेज़ बनाने वाले सेटअप को सील कर दिया है, साथ ही करोड़ों रुपये के बैंक ट्रांजेक्शन और हजारों जाली दस्तावेज़ भी जब्त किए हैं।

मास्टरमाइंड का लंदन भागने का इरादा

जांच के दौरान पता चला कि गिरोह का मुख्य सरगना जियाउल हसन 32 वर्षीय ग्राफिक्स डिजाइनिंग का माहिर है। वह लंदन के मोबाइल नंबर का उपयोग कर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। उसकी योजना थी कि वह जल्द ही ब्रिटेन में स्थायी रूप से रहने के लिए तैयारी कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस की गिरफ्त में आ गया। जियाउल हसन का यह नेटवर्क केवल नकली डिग्रियों का ही कारोबार नहीं था, बल्कि यह बैकग्राउंड वेरिफिकेशन को भी धोखा देता था। जब विदेशों या अन्य जगहों से डिग्री के सत्यापन के लिए कॉल आते थे, तो यह गिरोह फिशिंग के जरिए कॉल को खुद ही अटेंड करता था और फर्जी वेरिफिकेशन भी कर देता था। नकली डिग्री के बदले यह गिरोह करीब 10 हजार रुपये की वसूली करता था।

प्रमुख संस्थानों के नाम पर फर्जीवाड़ा

गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने भारत और विदेशों की विभिन्न विश्वविद्यालयों के नाम वाली 800 से अधिक नकली डिग्रियां बरामद की हैं। इनमें छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएम), उस्मानिया विश्वविद्यालय, कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, अन्नामलाई विश्वविद्यालय, लिंगाया विद्यापीठ, डॉ. डी.वाई. पाटिल विद्यापीठ, अलगप्पा विश्वविद्यालय और आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय जैसे नामचीन संस्थान शामिल हैं। इन नकली डिग्री और मार्कशीट्स में केवल नाम भरने की प्रक्रिया बाकी रह गई थी।

जाली उपकरण और दस्तावेज़ का जखीरा

पुलिस ने आरोपियों के पास से अत्याधुनिक उपकरण भी जब्त किए हैं, जिनमें एक एप्पल मैकबुक प्रो, एक एचपी लैपटॉप, सैमसंग डेस्कटॉप, कैनन कलर प्रिंटर, तीन हार्ड डिस्क, वाई-फाई राउटर, 141 जाली मोहरें, 80 स्ट्रिप 3डी मोनोग्राम, 830 ब्लैंक पेपर, 24 डाई और होलोग्राम शामिल हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल कर गिरोह नकली दस्तावेज़ तैयार करता था और उन्हें असली दिखाने का प्रयास करता था। गिरोह में जियाउल हसन के अलावा नूरुद्दीन, हसन आसिफ और आमिर अहमद जैसे साथी भी शामिल थे।

गिरफ्तारियों और आगे की जांच

गिरोह के सदस्यों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने हजारों लोगों को नकली डिग्रियों के जरिए नौकरी दिलाने में मदद की है। ये डिग्रियां मुख्य रूप से भारत और विदेशों में काम कर रहे व्यक्तियों द्वारा ही नहीं, बल्कि कई एजेंसियों और कंपनियों द्वारा भी खरीदी गई थीं। पुलिस की टीम अब इन आरोपियों की मदद से उनके खरीदारों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, ताकि इस फर्जीवाड़े का पूरा पर्दाफाश किया जा सके और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।

यह मामला न केवल कानपुर बल्कि पूरे देश के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि शैक्षणिक दस्तावेजों की सुरक्षा और सत्यता को लेकर जागरूकता कितनी आवश्यक है। फर्जी डिग्रियों का यह सिंडिकेट न केवल शैक्षणिक क्षेत्र को प्रभावित कर रहा था, बल्कि यह विदेशों में भारतीय युवाओं की छवि को भी धूमिल कर रहा था। पुलिस का यह ऑपरेशन इस तरह के जालसाज गिरोहों के खिलाफ एक कड़ी कार्रवाई है, और उम्मीद है कि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगेगी।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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