Ram Navami 2026: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब भारतीय रसोईघरों से लेकर मंदिरों तक पहुंच गया है। देशभर में LPG सिलेंडर की भारी किल्लत ने रामनवमी जैसे पावन त्योहार के आयोजनों को भी प्रभावित किया है। ईंधन संकट के चलते इस बार भंडारों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई, तो वहीं कई जगहों पर प्रसाद बनाने के लिए लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ा।
दिल्ली में कालाबाजारी का शिकार, 4400 रुपए में खरीदा सिलेंडर
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध करोल बाग हनुमान मंदिर में इस बार भंडारे का आयोजन काफी सीमित रहा। मंदिर कमेटी के सदस्य विनोद ने बताया कि पिछले साल वे 500 श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद बनाते थे, लेकिन इस बार गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण केवल 200 लोगों का ही प्रसाद बन पाया। उन्होंने कहा कि प्रसाद बनाने की सारी सामग्री मौजूद थी, लेकिन पकाने के लिए गैस नहीं थी।
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हम पैसे देने को तैयार थे, लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। अंततः हमें कालाबाजारी में एक सिलेंडर 4400 रुपए में खरीदना पड़ा, जबकि उसका सामान्य दाम 900 रुपए है। जब हालात हाथ से निकल गए, तो हमने दो-तीन लकड़ी के चूल्हे जलाकर प्रसाद बनाया।” उन्होंने यह भी बताया कि इस संकट के कारण आसपास पहले जहां 10-12 भंडारे होते थे, वहां इस बार मुश्किल से 2-4 ही हो पाए।
वाराणसी में लकड़ी के चूल्हों का सहारा
उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित प्राचीन मां काली मंदिर पर दशकों से चल रही भंडारे की परंपरा इस बार ईंधन संकट की चपेट में आ गई। आयोजकों ने बताया कि करीब 10,000 लोगों के भंडारे के लिए उन्हें 12 सिलेंडर चाहिए थे, लेकिन वे 8 ही जुटा पाए। ऐसे में उन्हें पहले लकड़ी के चूल्हों पर प्रसाद बनाने का निर्णय लेना पड़ा ताकि बाद में सिलेंडर का उपयोग किया जा सके।

मध्य प्रदेश में 60% तक कम हुए भंडारे
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी LPG संकट ने रामनवमी का माहौल फीका कर दिया। चैत्र नवरात्र की समापन परंपरा के अनुसार होने वाले भंडारों की संख्या इस बार 50 से 60 प्रतिशत तक घट गई। जहां पहले हजारों लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था होती थी, वहां इस बार सिलेंडर की कमी के चलते केवल 500 से 1000 लोगों का ही आयोजन किया जा सका।
दक्षिण भारत से लेकर शिरडी तक प्रभाव
LPG का यह संकट केवल उत्तर भार तक सीमित नहीं है। अयोध्या, काशी, शिरडी से लेकर दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों में भी भोग-प्रसाद पर संकट के बादल छाए हैं। कर्नाटक के बनशंकरी मंदिर में ‘अन्नप्रसादम’ बंद करना पड़ा है, तो वहीं शिरडी और पंढरपुर के खाद्य स्टाल भी गैस किल्लत से जूझ रहे हैं। कई मंदिरों ने भंडारे तो बंद कर दिए हैं और केवल भगवान को चढ़ने वाला प्रसाद ही बनाया जा रहा है।





















