संध्या समय न्यूज
किसान संघर्ष समिति ने अडानी समूह द्वारा धिरौली ब्लॉक के आठ गांवों में कथित अवैध भूमि अधिग्रहण और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के विरोध में अपनी आवाज बुलंद कर दी है। समिति ने आरोप लगाया है कि लगभग 6,600 एकड़ भूमि के अधिग्रहण और 6 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई के बाद भी आदिवासियों और किसानों को आज तक उचित मुआवजा नहीं मिला है।
पांचवीं किसान पंचायत का आयोजन
किसान संघर्ष समिति द्वारा ग्राम बांसी बेरदाह में पांचवीं किसान पंचायत का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने की। पंचायत में अडानी समूह द्वारा 1400 हेक्टेयर क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को अवैध बताते हुए भूमि अधिग्रहण रद्द करने की मांग उठाई गई।
‘जीत का आधार है एकजुटता’: डॉ. सुनीलम
किसान पंचायत को संबोधित करते हुए किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने कहा कि किसी भी संघर्ष में जीत का आधार एकजुटता, संकल्प और वैचारिक प्रतिबद्धता होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां कुछ लोगों को लालच देकर, कुछ को डराकर और कुछ को सीएसआर (CSR) के माध्यम से उपकृत कर आंदोलनों को कुचलने की कोशिश करती हैं। उन्होंने कहा कि इसी रणनीति के तहत कंपनियों ने धीरे-धीरे पूरे सिंगरौली क्षेत्र पर कब्जा किया है। डॉ. सुनीलम ने किसानों, मजदूरों और आदिवासियों की व्यापक एकजुटता पर जोर देते हुए घोषणा की कि किसी भी परिस्थिति में किसानों का संघर्ष जारी रहेगा।
मार्च के अंतिम सप्ताह में होगा अगला आंदोलन
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने बताया कि किसान संघर्ष समिति द्वारा बांसी बेरदाह में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ अब तक पांच कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि बांसी बेरदाह के आदिवासियों ने 6 लाख पेड़ों की कटाई का मुद्दा सामने नहीं लाया होता, तो चुपचाप पेड़ काट लिए जाते। उन्होंने आश्वासन दिया कि जब तक बांसी बेरदाह के आदिवासी संघर्षरत रहेंगे, तब तक किसान संघर्ष समिति उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने घोषणा की कि अगली किसान पंचायत मार्च के अंतिम सप्ताह में आयोजित की जाएगी।
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मुआवजे की मांग: जमीन के बदले जमीन या 1 करोड़ रुपये
किसान संघर्ष समिति की महिला जिला अध्यक्ष सोनमती ने सरकार से स्पष्ट मांग रखी। उन्होंने कहा कि गांव में कई राजनीतिक दलों के नेता आए, जिससे न्याय की उम्मीद जगी। उन्होंने कहा, “हम अपनी पुरखों की जमीन, जिस पर हमारा जीवन निर्भर है, अडानी को नहीं देना चाहते। लेकिन सरकार ने बिना सहमति के जमीन सौंप दी है। अब हमारी मांग है कि हमें जमीन के बदले जमीन दी जाए या एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए, साथ ही हर विस्थापित परिवार के एक सदस्य को स्थाई नौकरी दी जाए।”
राहुल गांधी के इंतजार में ग्रामीण
सोनमती ने यह भी खुलासा किया कि राहुल गांधी ने उन्हें आश्वस्त किया है कि वे जल्द ही बांसी बेरदाह आएंगे। ग्रामीण उनके आने का इंतजार कर रहे हैं।
‘हम डरने वाले नहीं’: अखिलेश शाह
इस दौरान अखिलेश शाह ने कहा कि उन पर फर्जी मुकदमें लगाकर और जिला बदर करके उन्हें डराने की कोशिश की गई है, लेकिन वे बिरसा मुंडा, टंट्या भील, सिदो कान्हू, शंकर शाह और रघुनाथ शाह के वंशज हैं और डरने वाले नहीं हैं। प्रदेश सचिव निसार आलम अंसारी ने भी कहा कि समिति सड़क से लेकर न्यायालय तक अडानी द्वारा किए गए अवैध अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी।

















