देश के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज की असली ताकत तब दिखती है, जब जनप्रतिनिधि जनता की भागीदारी से समस्याओं का समाधान निकालते हैं। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश (या संबंधित राज्य) की ग्राम पंचायत देई दा नौण ने एक ऐसी मिसाल कायम की है, जिसे आज क्षेत्र भर में एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है। पंचायत प्रधान विक्की वनिता के नेतृत्व में हुई पहली ग्राम सभा की बैठक कोई औपचारिकता पूरी करने का माध्यम नहीं रही, बल्कि इसमें ऐसे सख्त और बेहद प्रगतिशील फैसले लिए गए, जो सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।
अब नहीं मिलेगा ‘करेक्टर सर्टिफिकेट’
ग्राम सभा में सबसे चर्चित और सख्त निर्णय नशाखोरी को लेकर लिया गया। पंचायत ने सार्वजनिक स्थलों पर शराब पीने या ड्रग्स लेने के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। यदि कोई भी व्यक्ति गांव के खुले मैदान, सड़क किनारे या किसी सार्वजनिक जगह नशे की हालत में पकड़ा जाता है, तो उसे भले ही पुलिस प्रशासन से बच जाए, लेकिन पंचायत स्तर पर उसे भारी कीमत चुकानी होगी।
सर्वसम्मति से पारित इस प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे दोषियों का ‘चरित्र प्रमाण पत्र’ जारी होना पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। यह फैसला इसलिए भी अत्यंत प्रभावी है, क्योंकि आज के समय में चरित्र प्रमाण पत्र किसी भी सरकारी नौकरी, आर्मी में भर्ती, पासपोर्ट बनवाने या विदेश जाने के लिए सबसे अनिवार्य दस्तावेजों में से एक है। इतना ही नहीं, पंचायत द्वारा जारी होने वाली अन्य अनुपालन प्रमाणपत्रों (NOC) और सरकारी सुविधाओं में भी ऐसे लोगों को पूरी कानूनी सख्ती का सामना करना पड़ेगा। यह कदम गांव के युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए एक डंटी के तौर पर काम करेगा।
शादियों में किन्नरों की बधाई राशि पर लगाई पारदर्शी सीमा
भारतीय संस्कृति में शुभ कार्यों पर किन्नर समुदाय द्वारा आशीर्वाद देने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। हालांकि, कई बार इस मामले में असमानता और मनमानी देखने को मिलती है। कभी-कभी अमीर परिवार जहां हजारों की राशि दे देते हैं, वहीं गरीब परिवारों पर बधाई राशि के नाम पर आर्थिक बोझ पड़ जाता है।
इस सामाजिक असमानता को दूर करने के लिए ग्राम पंचायत देई दा नौण ने एक संतुलित प्रस्ताव पारित किया है। अब गांव में होने वाले किसी भी विवाह या शुभ कार्य में सामान्य परिवारों द्वारा किन्नरों को अधिकतम 2100 रुपये और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों द्वारा 1100 रुपये की बधाई राशि दी जा सकेगी। इस सीमा को तय करने का मुख्य उद्देश्य परिवारों को अनावश्यक रूप से ब्लैकमेल या दबाव में रखने से बचाना है। इस फैसले से एक तरफ किन्नर समुदाय का सम्मान बरकरार रहेगा, वहीं गरीब परिवारों की जेब पर भी पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम होगा और पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
मेधावी छात्रों के सम्मान से शिक्षा को दी जाएगी नई दिशा
नशामुक्ति और सामाजिक सुधार के साथ-साथ पंचायत ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी प्राथमिकताएं साफ कर दी हैं। ग्राम पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दोनों सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मेधावी छात्रों और छात्राओं को अब ग्राम सभा के मंच पर सम्मानित किया जाएगा।
गांवों में सरकारी स्कूलों के बच्चों में अक्सर आत्मविश्वास की कमी और प्राइवेट स्कूलों के प्रति एक भेदभाव की भावना होती है। ग्राम सभा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कृत करने से ना केवल उनका मनोबल बढ़ेगा, बल्कि यह अन्य बच्चों के लिए भी एक प्रेरणा बन जाएगा। यह पहल गांव में शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक और प्रतिस्पर्धी वातावरण बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।























