London Kashmir Million March: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी मानवाधिकार उल्लंघनों और पाकिस्तानी सेना के कथित दमन के खिलाफ अब विरोध की आवाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंजने लगी है। यूनाइटेड किंगडम (UK) में बसे कश्मीरी समुदाय ने रविवार को लंदन की सड़कों पर एक ऐतिहासिक प्रदर्शन का आयोजन किया, जिसे ‘लंदन कश्मीर मिलियन मार्च’का नाम दिया गया। इस मार्च का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में जारी अत्याचारों को दुनिया के सामने उजागर करना था।
पार्लियामेंट से लेकर पाक उच्चायोग तक गूंजे नारे
यूके की राजधानी में इस विशाल रैली की शुरुआत प्रतिष्ठित पार्लियामेंट स्क्वेयर से हुई। जबरदस्त भीड़ ने पाकिस्तान उच्चायोग की ओर कूच किया। सूत्रों की मानें तो इस विरोध प्रदर्शन में लगभग 50,000 (पचास हजार) लोगों ने भाग लिया। सड़कों पर उमड़ी भीड़ ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आजादी के समर्थन में जोशीले नारे लगाए।

बलोच और पख्तून समुदाय ने कश्मीरियों को दी ताकत
इस विरोध प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि यह सिर्फ कश्मीरी समुदाय तक सीमित नहीं रहा। पाकिस्तान से जुड़े अन्य उपेक्षित समुदाय—विशेषकर बलोच और पश्तून लोग भी बड़ी संख्या में इस मार्च में शामिल हुए। उन्होंने कश्मीरी प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए पाकिस्तानी सेना पर अपने-अपने क्षेत्रों में भी मानवाधिकारों के हनन के गंभीर आरोप लगाए। यह नजारा इशारा कर रहा था कि पाकिस्तान के तीनों प्रमुख कब्जे वाले क्षेत्रों के लोग अब इस्लामाबाद के तानाशाही रवैये के खिलाफ एक मंच पर आ रहे हैं।
हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख शौकत नवाज मीर सहित अन्य राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की। उनका कहना था कि लोगों को शांतिपूर्ण विरोध करने और अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है। पाकिस्तान प्रशासन द्वारा नेताओं को जेलों में डालना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। लंदन में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में मांग उठाई कि सभी बंदी नेताओं को तुरंत और बिना किसी शर्त रिहा किया जाए।
JKNIA चेयरमैन ने पाक सेना पर लगाए गंभीर आरोप
पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए जम्मू-कश्मीर नेशनल इंडिपेंडेंस अलायंस (JKNIA) के चेयरमैन महमूद कश्मीरी ने पाकिस्तानी सेना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “आज पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर की यह भीड़ यह दर्शाती है कि दुनिया भर के कश्मीरी पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के खिलाफ अब चुप नहीं रहेंगे।”
महमूद कश्मीरी ने तत्तापानी, सिहंसा और कोटली जैसे इलाकों में पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा निर्दोष नागरिकों पर की गई बर्बरता का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीरी किसी भी सूरत में पाकिस्तान के सामने घुटने नहीं टेकेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान सत्ता और अपनी सेना का यह जुल्म जारी रखता है, तो विश्व भर के कश्मीरी इसका शांतिपूर्ण लेकिन बेहद मजबूत और लंबे विरोध का सामना कराएंगे।
हिरासत में मौत के बाद शव न देने का मुद्दा
महमूद कश्मीरी ने एक और दिल दहला देने वाला आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी फौज ने कई युवाओं को हिरासत में लेकर उनकी बेरहमी से हत्या की है और उनके शव भी परिजनों को नहीं सौंपे जा रहे हैं। लंदन में उपस्थित लोगों ने मांग उठाई कि जिन युवाओं की हिरासत में मौत हुई है, उनके शव परिवारों को तुरंत वापस किए जाएं ताकि उन्हें अंतिम संस्कार करने का धार्मिक अधिकार मिल सके।
5 जून से जारी है PoJK में ज्वालामुखी
यह लंदन मार्च ऐसे समय में हुआ है, जब PoJK में 5 जून से लगातार आग लगी हुई है। सूत्रों के अनुसार, जब स्थानीय लोगों ने अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, तो पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। इस घटना के बाद से आक्रोश भड़क गया और JAAC ने पूरे क्षेत्र में व्यापक आंदोलन छेड़ दिया है। पाकिस्तान प्रशासन इस आंदोलन को कुचलने के लिए लगातार राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर छापेमारी कर रहा है, लेकिन जनता का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार
इस ‘लंदन कश्मीर मिलियन मार्च’ के आयोजकों ने साफ कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ विरोध जताना नहीं, बल्कि पीड़ितों के प्रति एकजुटता दिखाना और पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह बनाना है। प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनकी मांग है कि दुनिया को PoJK में बिगड़ती स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और पाकिस्तान पर दबाव बनाकर वहां के निवासियों को उनके बुनियादी अधिकार दिलाने चाहिए।






















